| मेवाड़ राजवंश: शौर्य और बलिदान का इतिहास (The Rulers of Mewar) |
| क्रम | राजा का नाम | शासन काल (लगभग) | विशेष विवरण (महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ) |
| 1 | गुहादित्य | 566 ई. | मेवाड़ में गुहिल वंश की स्थापना की। |
| 2 | बप्पा रावल (कालभोज) | 734 – 753 ई. | चित्तौड़ जीता और एकलिंग जी मंदिर का निर्माण करवाया। |
| 3 | जैत्र सिंह | 1213 – 1253 ई. | भूताला के युद्ध में इल्तुतमिश को हराया; चित्तौड़ को राजधानी बनाया। |
| 4 | तेज सिंह | 1252 – 1273 ई. | इनके काल में प्रथम चित्रित ग्रंथ ‘श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णी’ लिखा गया। |
| 5 | रावल रतन सिंह | 1302 – 1303 ई. | अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण और रानी पद्मिनी का जौहर (चित्तौड़ का प्रथम साका)। |
| 6 | राणा हम्मीर | 1326 – 1364 ई. | मेवाड़ का उद्धारक’ और ‘विषम घाटी पंचानन’ कहे जाते हैं। |
| 7 | क्षेत्र सिंह (खेता) | 1364 – 1382 ई. | मालवा और मेवाड़ के बीच संघर्ष की शुरुआत इनके समय हुई। |
| 8 | राणा लाखा | 1382 – 1421 ई. | जावर में चाँदी की खान निकली; पिचोला झील का निर्माण इन्हीं के काल में हुआ। |
| 9 | राणा मोकल | 1421 – 1433 ई. | हंसाबाई और लाखा के पुत्र; समिधेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। |
| 10 | महाराणा कुंभा | 1433 – 1468 ई. | स्थापत्य कला का जनक’; विजय स्तंभ और 32 किलों का निर्माण करवाया। |
| 11 | उदा (उदय सिंह प्रथम) | 1468 – 1473 ई. | पितृहंता शासक (अपने पिता कुंभा की हत्या की)। |
| 12 | राणा रायमल | 1473 – 1509 ई. | मेवाड़ में शांति व्यवस्था स्थापित की; पृथ्वीराज राठौड़ (उड़ना राजकुमार) इनके पुत्र थे। |
| 13 | राणा सांगा | 1509 – 1528 ई. | हिंदू पथ’ के नाम से प्रसिद्ध; खानवा के युद्ध में बाबर से टक्कर ली। |
| 14 | राणा रतन सिंह II | 1528 – 1531 ई. | बूंदी के सूरजमल के साथ युद्ध में मारे गए। |
| 15 | विक्रमादित्य | 1531 – 1536 ई. | इनके समय चित्तौड़ का दूसरा साका (रानी कर्मावती का जौहर) हुआ। |
| 16 | महाराणा उदय सिंह II | 1537 – 1572 ई. | उदयपुर शहर की स्थापना की और चित्तौड़ का तीसरा साका हुआ। |
| 17 | महाराणा प्रताप | 1572 – 1597 ई. | मेवाड़ की आन-बान-शान; हल्दीघाटी और दिवेर के युद्ध लड़े। |
| 18 | अमर सिंह प्रथम | 1597 – 1620 ई. | 1615 में मुगलों से संधि की; जहाँगीर के साथ समझौता हुआ। |
| 19 | करण सिंह | 1620 – 1628 ई. | मुगल दरबार में उपस्थित होने वाले मेवाड़ के पहले राजकुमार। |
| 20 | जगत सिंह प्रथम | 1628 – 1652 ई. | उदयपुर में जगदीश मंदिर (सपनों का मंदिर) बनवाया। |
| 21 | महाराणा राज सिंह | 1652 – 1680 ई. | औरंगजेब का कड़ा विरोध किया और राजसमंद झील बनवाई। |
| 22 | जय सिंह | 1680 – 1698 ई. | जयसमंद झील (ढेबर झील) का निर्माण करवाया। |
| 23 | अमर सिंह द्वितीय | 1698 – 1710 ई. | इनके समय प्रसिद्ध ‘देबारी समझौता’ हुआ था। |
| 24 | जगत सिंह द्वितीय | 1734 – 1751 ई. | हुरड़ा सम्मेलन की अध्यक्षता की; ‘पिछोला’ में जगत निवास महल बनवाया। |
| 25 | भीम सिंह | 1778 – 1828 ई. | अंग्रेजों से सहायक संधि की; कृष्णा कुमारी विवाद इन्हीं के समय हुआ। |
| 26 | स्वरूप सिंह | 1842 – 1861 ई. | 1857 की क्रांति के समय अंग्रेजों की सहायता की; ‘स्वरूपशाही’ सिक्के चलाए। |