1. संधि किसे कहते हैं?
जब दो निकटवर्ती वर्ण (अक्षर) आपस में मिलते हैं, तो उनके मेल से जो विकार (परिवर्तन या बदलाव) उत्पन्न होता है, उसे संधि कहते हैं।
- मुख्य नियम: इसमें पहले शब्द का अंतिम वर्ण और दूसरे शब्द का प्रथम वर्ण आपस में मिलकर एक नया रूप ले लेते हैं।
- उदाहरण:
हिम+आलय➡️हिमालय(यहाँ ‘म’ का ‘अ’ और ‘आ’ मिलकर ‘आ’ बन गए)।
2. संधि विच्छेद क्या है?
संधि के नियमों द्वारा बने हुए शब्दों को उनके पहले वाले मूल रूप में अलग-अलग करके लिखना ही संधि विच्छेद कहलाता है।
- उदाहरण 1:
परोपकार➡️ विच्छेद करने पर:पर+उपकार - उदाहरण 2:
महेश➡️ विच्छेद करने पर:महा+ईश
3. संधि के भेद
हिंदी व्याकरण में वर्णों के आधार पर संधि के मुख्य रूप से 3 भेद होते हैं:
┌─────────────── संधि के 3 भेद ───────────────┐
│ │
┌────────────┴────────────┐ ┌─────────────┴─────────────┐
│ 1. स्वर संधि │ │ 3. विसर्ग संधि │
│ 2. व्यंजन संधि │ │ │
└─────────────────────────┘ └───────────────────────────┘
1. स्वर संधि और उसके 5 भेद
जब स्वर वर्ण का मेल किसी दूसरे स्वर वर्ण से होता है और उससे जो परिवर्तन आता है, उसे स्वर संधि कहते हैं। हिंदी में स्वर संधि के 5 उपभेद होते हैं:
1. दीर्घ संधि (बड़ी मात्रा का नियम)
- नियम: जब हस्व या दीर्घ (अ, इ, उ) के बाद समान स्वर (अ, इ, उ या आ, ई, ऊ) आएं, तो दोनों मिलकर हमेशा दीर्घ (आ, ई, ऊ) हो जाते हैं।
- पहचान सूत्र: शब्द के बीच में आ, ई या ऊ की मात्रा दिखाई देगी।
- उदाहरण:
परम+अर्थ➡️परमार्थ(अ + अ = आ)विद्या+आलय➡️विद्यालय(आ + आ = आ)कवि+इंद्र➡️कवींद्र(इ + इ = ई)भानु+उदय➡️भानूदय(उ + उ = ऊ)
2. गुण संधि (एक चोटी का नियम)
- नियम: यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘इ/ई’ आए तो ए, ‘उ/ऊ’ आए तो ओ, और ‘ऋ’ आए तो अर् हो जाता है।
- पहचान सूत्र: शब्द के बीच में ए (◌े), ओ (◌ो) या ऊपर रेफ़ (र्) की मात्रा दिखाई देगी।
- उदाहरण:
नर+इंद्र➡️नरेंद्र(अ + इ = ए)ज्ञान+उपदेश➡️ज्ञानोपदेश(अ + उ = ओ)महा+ऋषि➡️महर्षि(आ + ऋ = अर्)
3. वृद्धि संधि (दो चोटी का नियम)
- नियम: यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘ए/ऐ’ आए तो ऐ, और ‘ओ/औ’ आए तो औ हो जाता है।
- पहचान सूत्र: शब्द के बीच में ऐ (◌ै) या औ (◌ौ) की दो मात्राएँ दिखाई देंगी।
- उदाहरण:
एक+एक➡️एकैक(अ + ए = ऐ)सदा+एव➡️सदैव(आ + ए = ऐ)महा+ओजस्वी➡️महौजस्वी(आ + ओ = औ)
4. यण संधि (अधूरा अक्षर + य, व, र)
- नियम: यदि ‘इ/ई’ के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो य, ‘उ/ऊ’ के बाद आए तो व, और ‘ऋ’ के बाद आए तो र हो जाता है।
- पहचान सूत्र: शब्द में य, व, र से ठीक पहले कोई आधा (अधूरा) अक्षर अवश्य होगा।
- उदाहरण:
इति+आदि➡️इत्यादि(‘त’ आधा हुआ, इ + आ = या)प्रति+एक➡️प्रत्येक(‘त’ आधा हुआ, इ + ए = ये)सु+आगत➡️स्वागत(‘स’ आधा हुआ, उ + आ = वा)
5. अयादि संधि (ऐ, आय, अव, आव का नियम)
- नियम: यदि ‘ए, ऐ, ओ, औ’ के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो क्रमशः ए का अय, ऐ का आय, ओ का अव और औ का आव हो जाता है।
- पहचान सूत्र: इन शब्दों में अधिकतम 3 अक्षर होते हैं और मात्राएँ बहुत कम होती हैं। उच्चारण में अय, आय, अव या आव की ध्वनि आती है।
- उदाहरण:
ने+अन➡️नयन(ए + अ = अय)गै+अक➡️गायक(ऐ + अ = आय)पो+अन➡️पवन(ओ + अ = अव)पौ+अक➡️पावक(औ + अ = आव)
2. व्यंजन संधि के प्रमुख नियम
जब व्यंजन का मेल किसी व्यंजन या स्वर से होता है, तो उसे व्यंजन संधि कहते हैं। इसके मुख्य नियम निम्नलिखित हैं:
नियम 1: वर्ग के पहले वर्ण का तीसरे वर्ण में बदलना (1 का 3 नियम)
- यदि कचटतप (क्, च्, ट्, त्, प्) के बाद कोई स्वर, तीसरा/चौथा वर्ण या य, र, ल, व आए, तो पहला वर्ण अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्) में बदल जाता है।
- उदाहरण:
दिक्+अंबर➡️दिंबर(क् बदलकर ग् हो गया)वाक्+ईश➡️वागीश(क् बदलकर ग् हो गया)सत्+आनंद➡️सदानंद(त् बदलकर द् हो गया)
नियम 2: वर्ग के पहले वर्ण का पाँचवें वर्ण में बदलना (1 का 5 नियम)
- यदि कचटतप (क्, च्, ट्, त्, प्) के बाद कोई अनुनासिक वर्ण (मुख्यतः न् या म्) आए, तो पहला वर्ण अपने वर्ग के पाँचवें वर्ण (ङ्, ञ्, ण्, न्, म्) में बदल जाता है।
- उदाहरण:
वाक्+मय➡️वाङ्मय(क् बदलकर ङ् हो गया)जगत+नाथ➡️जगन्नाथ(त् बदलकर न् हो गया)उत्+नति➡️उन्नति(त् बदलकर न् हो गया)
नियम 3: ‘त्’ संबंधी विशेष नियम
- त् के बाद यदि ‘च/छ’ हो, तो त् का च् हो जाता है। उदाहरण:
उत्+चारण➡️उच्चारण - त् के बाद यदि ‘ज/झ’ हो, तो त् का ज् हो जाता है। उदाहरण:
सत्+जन➡️सज्जन - त् के बाद यदि ‘ल’ हो, तो त् का ल् हो जाता है। उदाहरण:
उत्+लेख➡️उल्लेख
नियम 4: अनुस्वार (बिंदी) का नियम (‘म्’ का नियम)
- यदि ‘म्’ के बाद कोई भी स्पर्श व्यंजन आए, तो ‘म्’ उस वर्ग के पंचमाक्षर या अनुस्वार (ं) में बदल जाता है।
- उदाहरण:
सम्+कल्प➡️संकल्पसम्+तोष➡️संतोषसम्+पूर्ण➡️संपूर्ण
3. विसर्ग संधि और उसके अपवाद
विसर्ग (ः) के बाद किसी स्वर या व्यंजन के आने से विसर्ग में जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं।
प्रमुख नियम:
- विसर्ग का ‘ओ’ हो जाना: यदि विसर्ग से पहले ‘अ’ हो और बाद में ‘अ’ या प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण या य, र, ल, व, ह हो, तो विसर्ग ‘ओ’ में बदल जाता है।
- उदाहरण:
मनः+रथ➡️मनोरथ,तपः+भूमि➡️तपोभूमि
- उदाहरण:
- विसर्ग का ‘र’ हो जाना: यदि विसर्ग से पहले ‘अ, आ’ को छोड़कर कोई दूसरा स्वर हो, तो विसर्ग ‘र’ में बदल जाता है।
- उदाहरण:
निः+धन➡️निर्धन,दुः+उपयोग➡️दुरुपयोग
- उदाहरण:
- विसर्ग का ‘श, ष, स’ हो जाना:
- विसर्ग के बाद च/छ हो, तो श होता है। उदाहरण:
निः+चल➡️निश्चल - विसर्ग के बाद ट/ठ या क/फ हो, तो ष होता है। उदाहरण:
निः+कपट➡️निष्कपट - विसर्ग के बाद त/थ हो, तो स होता है। उदाहरण:
नमः+ते➡️नमस्ते
- विसर्ग के बाद च/छ हो, तो श होता है। उदाहरण:
विसर्ग संधि के महत्वपूर्ण अपवाद (Exceptions)
परीक्षाओं में अक्सर परीक्षक अपवाद ही पूछते हैं क्योंकि छात्र यहाँ नियम लगाकर गलती कर बैठते हैं। इन्हें विशेष रूप से याद रखें:
- अपवाद 1 (पुनः और अंतः का नियम): नियमानुसार ‘पुनः’ और ‘अंतः’ में विसर्ग का ‘ओ’ होना चाहिए था, परंतु यहाँ विसर्ग का ‘र’ हो जाता है।
पुनः+जन्म➡️पुनर्जन्म(पुनोजन्म नहीं होगा)अंतः+धान➡️अंतर्धान(अंतोधान नहीं होगा)
- अपवाद 2 (परिवर्तन न होना): यदि विसर्ग से पहले ‘अ’ हो और बाद में ‘क’ या ‘प’ हो, तो विसर्ग में कोई बदलाव नहीं होता, वह वैसा ही लिखा जाता है।
प्रातः+काल➡️प्रातःकाल(प्रातोकाल या प्रातकाल नहीं होगा)अंतः+करण➡️अंतःकरणअधः+पतन➡️अधःपतन
Quick Revision Table
| संधि का नाम | शॉर्टकट पहचान सूत्र | सटीक उदाहरण |
|---|---|---|
| दीर्घ संधि | शब्द के बीच में आ, ई, ऊ की बड़ी मात्रा | विद्यालय, भानूदय |
| गुण संधि | शब्द के बीच में एक मात्रा (ए, ओ) या ऊपर र् (रेफ़) | नरेंद्र, महर्षि |
| वृद्धि संधि | शब्द के बीच में दो मात्राएँ (ऐ, औ) | सदैव, महौजस्वी |
| यण संधि | आधा अक्षर + य, व, र | इत्यादि, स्वागत |
| अयादि संधि | अधिकतम 3 अक्षर, साधारण शब्द (अय, अव की ध्वनि) | नयन, पवन |
| व्यंजन संधि | हलंत वाले शब्द, वर्णों का तीसरे या पाँचवें में बदलना | वागीश, जगन्नाथ |
| विसर्ग संधि | विसर्ग (ः) का ओ, र, श, ष, स में बदलना | मनोरथ, नमस्ते |
