हिंदी व्याकरण में श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द (श्रुति = सुनना, सम = समान, भिन्न = अलग, अर्थक = अर्थ देने वाले) उन शब्दों को कहते हैं जो सुनने और पढ़ने में लगभग एक जैसे (समान) लगते हैं, लेकिन उनके अर्थ पूरी तरह से अलग (भिन्न) होते हैं।
1. मुख्य श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द और उनके अर्थ भेद
1.1 ‘अ’ वर्ण से शुरू होने वाले शब्द युग्म
- अनल / अनिल
- अनल: आग / अग्नि (वाक्य: जंगल में भयानक अनल सुलग रही थी।)
- अनिल: हवा / वायु (वाक्य: सुबह की शीतल अनिल मन को भाती है।)
- अंश / अंस
- अंश: भाग / हिस्सा (वाक्य: यह इस संपत्ति का एक अंश है।)
- अंस: कंधा (वाक्य: उसने अपने अंस पर थैला टांगा हुआ था।)
- अम्बु / अम्बा
- अम्बु: जल / पानी
- अम्बा: माता / माँ
- अपेक्षा / उपेक्षा
- अपेक्षा: तुलना में / इच्छा / उम्मीद (वाक्य: मुझे आपसे सफलता की अपेक्षा है।)
- उपेक्षा: लापरवाही / तिरस्कार / अवहेलना (वाक्य: किसी भी गरीब की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।)
- अविराम / अभिराम
- अविराम: बिना रुके / लगातार
- अभिराम: सुंदर / आकर्षक
1.2 ‘क’ से ‘त’ वर्ण के महत्वपूर्ण शब्द युग्म
- कूट / कृत / कृंत
- कूट: पहाड़ की चोटी / रहस्य / जाली (जैसे: कूटनीति, कूट शब्द)
- कृत: किया हुआ / रचित (जैसे: तुलसीदास कृत रामचरितमानस)
- कृंत: काटना / कर्तन करना
- कूल / कुल
- कूल: किनारा / तट (वाक्य: नदी के कूल पर पेड़ लगे थे।)
- कुल: वंश / सब / योग (वाक्य: रघुकुल रीति सदा चली आई।)
- कृपण / कृपाण
- कृपण: कंजूस (वाक्य: वह स्वभाव से बहुत कृपण है।)
- कृपाण: तलवार / कटार (वाक्य: सिख धर्म में कृपाण रखना अनिवार्य है।)
- गृह / ग्रह
- गृह: घर / मकान (वाक्य: गृह प्रवेश की तिथि तय हो गई है।)
- ग्रह: आकाशीय पिंड / नक्षत्र (जैसे: पृथ्वी एक ग्रह है।)
- तरणि / तरणी / तरुण
- तरणि (छोटी ‘इ’): सूर्य
- तरणी (बड़ी ‘इ’): नाव / नौका
- तरुण: युवा / नवयुवक
1.3 ‘द’ से ‘श’ वर्ण के महत्वपूर्ण शब्द युग्म
- दिन / दीन
- दिन: दिवस / वार (वाक्य: आज का दिन बहुत शुभ है।)
- दीन: गरीब / दुखी (वाक्य: हमें दीन-दुखियों की सहायता करनी चाहिए।)
- द्रव / द्रव्य
- द्रव: तरल पदार्थ (जैसे: पानी, तेल)
- द्रव्य: धन / संपत्ति / पदार्थ (जैसे: द्रव्यमान, ठोस-द्रव-गैस)
- पुरुष / परुष
- पुरुष: मर्द / मनुष्य
- परुष: कठोर / निष्ठुर (वाक्य: उसके परुष वचनों ने मुझे ठेस पहुँचाई।)
- प्रासाद / प्रसाद
- प्रासाद: महल / राजमहल (वाक्य: राजा का प्रासाद अत्यंत भव्य था।)
- प्रसाद: भगवान का भोग / कृपा (वाक्य: मंदिर में सबको प्रसाद मिला।)
- शूर / सूर
- शूर: वीर / बहादुर (जैसे: शूरवीर)
- सूर: अंधा / सूर्य / कवि सूरदास
2. Core Exam Rules & Confusing Traps
Rule 2.1: मात्राओं का सूक्ष्म अंतर (नुक्ता और इ/ई का फेर)
परीक्षा में बहुत छोटे अंतर वाले शब्द पूछे जाते हैं, जहाँ ज़रा सी असावधानी से नंबर कट जाते हैं।
- अवधि बनाम अवधी:
- अवधि (छोटी ‘ध’) = समय सीमा (Time Period)
- अवधी (बड़ी ‘धी’) = अवध क्षेत्र की भाषा (Language)
- अलि बनाम अली:
- अलि (छोटी ‘ल’) = भौंरा / भ्रमर
- अली (बड़ी ‘ली’) = सखी / सहेली
Rule 2.2: वर्णों का फेर (समान उच्चारण वाले वर्ण)
कुछ वर्ण बोलने में लगभग एक जैसे लगते हैं लेकिन अर्थ बदल देते हैं:
- कपाट बनाम कपट:
- कपाट = दरवाजा / द्वार
- कपट = धोखा / छल
- वदन बनाम बदन:
- वदन (‘व’ से) = मुख / चेहरा
- बदन (‘ब’ से) = शरीर / काया
3. Core Practice Set
Q1. ‘अनल – अनिल’ शब्द युग्म का सही अर्थ भेद क्या है?
- (A) हवा – आग
- (B) आग – हवा
- Answer: (B)
- Explanation: ‘अनल’ का अर्थ आग होता है और ‘अनिल’ का अर्थ हवा होता है।
Q2. “राजा का ________ बहुत विशाल था।” रिक्त स्थान के लिए सही शब्द चुनिए:
- (A) प्रसाद
- (B) प्रासाद
- Answer: (B)
- Explanation: राजमहल के लिए सही शब्द ‘प्रासाद’ होता है। ‘प्रसाद’ का अर्थ भगवान का कृपा-भोग होता है।
Q3. ‘कृपण’ शब्द का अर्थ कंजूस होता है, तो ‘कृपाण’ का सही अर्थ क्या होगा?
- (A) तलवार
- (B) दयालु
- Answer: (A)
- Explanation: ‘कृपाण’ एक हथियार या तलवार को कहा जाता है।
Q4. निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
- (A) गृह – घर
- (B) ग्रह – नक्षत्र
- (C) कुल – किनारा
- Answer: (C)
- Explanation: ‘कुल’ का अर्थ वंश या सब होता है, जबकि ‘कूल’ (बड़ी ‘ऊ’) का अर्थ किनारा होता है।
Q5. ‘अपेक्षा’ का अर्थ ‘उम्मीद या तुलना में’ है, तो ‘उपेक्षा’ का सही अर्थ क्या होगा?
- (A) आदर करना
- (B) अवहेलना या तिरस्कार करना
- Answer: (B)
- Explanation: किसी की तरफ ध्यान न देना या तिरस्कार करना ‘उपेक्षा’ कहलाता है।
