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शब्द भेद और व्याकरणिक नियम

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1. शब्द भेद (विकार के आधार पर)

हिंदी भाषा में शब्दों को उनके रूप-परिवर्तन या विकार के आधार पर मुख्य रूप से 2 भागों में बाँटा गया है:

  1. विकारी शब्द: वे शब्द जिनमें लिंग, वचन, कारक या काल के कारण बदलाव (परिवर्तन) आ जाता है। इनके अंतर्गत संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया आते हैं।
  2. अविकारी शब्द (अव्यय): वे शब्द जिनमें लिंग, वचन, कारक या काल के कारण कभी कोई बदलाव नहीं आता। ये हर स्थिति में एक समान रहते हैं।

2. मुख्य शब्द भेद: परिभाषा और भेद

यहाँ हम पाँचों मुख्य शब्द भेदों का गहन अध्ययन करेंगे:

1. संज्ञा (Noun)

  • परिभाषा: किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव या अवस्था के नाम को संज्ञा कहते हैं। सरल शब्दों में, इस संसार में जिसका भी कोई नाम है, वह संज्ञा है।
  • संज्ञा के भेद: मुख्य रूप से संज्ञा के 3 भेद होते हैं (परंतु अंग्रेजी के प्रभाव के कारण कुल 5 भेद पढ़े जाते हैं):
    • व्यक्तिवाचक संज्ञा: जो किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराए। जैसे—राम, दिल्ली, हिमालय, गंगा।
    • जातिवाचक संज्ञा: जो किसी पूरी जाति या वर्ग का बोध कराए। जैसे—लड़का, शहर, नदी, पर्वत।
    • भाववाचक संज्ञा: जो किसी गुण, दशा, अवस्था या मन के भाव को प्रकट करे (इसे छुआ नहीं जा सकता, केवल महसूस किया जा सकता है)। जैसे—बुढ़ापा, मिठास, ईमानदारी, क्रोध।
    • द्रव्यवाचक संज्ञा (जातिवाचक का उपभेद): जो किसी धातु या द्रव्य का बोध कराए। जैसे—सोना, पानी, घी, तेल।
    • समूहवाचक संज्ञा (जातिवाचक का उपभेद): जो किसी समूह या समुदाय का बोध कराए। जैसे—सेना, कक्षा, सभा, भीड़.

2. सर्वनाम (Pronoun)

  • परिभाषा: संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य संज्ञा की बार-बार होने वाली आवृत्ति को रोकना है।
  • सर्वनाम के भेद: सर्वनाम के कुल 6 भेद होते हैं:
    • पुरुषवाचक सर्वनाम: जो बोलने वाले, सुनने वाले या किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रयुक्त हो। इसके 3 प्रकार हैं—उत्तम पुरुष (मैं, हम), मध्यम पुरुष (तू, तुम, आप), अन्य पुरुष (वह, वे)।
    • निश्चयवाचक सर्वनाम: जो किसी निश्चित वस्तु या व्यक्ति की ओर संकेत करे। जैसे—यह मेरी पुस्तक है, वह राम का घर है।
    • अनिश्चयवाचक सर्वनाम: जिससे किसी निश्चित वस्तु या व्यक्ति का बोध न हो। जैसे—बाहर कोई खड़ा है, दूध में कुछ गिरा है।
    • संबंधवाचक सर्वनाम: जो वाक्य में दूसरे संज्ञा या सर्वनाम से संबंध बताए। जैसे—जो सोएगा, वह खोएगा; जिसकी लाठी, उसकी भैंस।
    • प्रश्नवाचक सर्वनाम: जिसका प्रयोग प्रश्न पूछने के लिए किया जाए। जैसे—वहाँ कौन है? तुम क्या कर रहे हो?
    • निजवाचक सर्वनाम: जिसका प्रयोग कर्ता अपने स्वयं के लिए करता है। जैसे—मैं यह काम अपने आप (या खुद) कर लूँगा।

3. विशेषण (Adjective)

  • परिभाषा: जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, मात्रा आदि) बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं। जिसकी विशेषता बताई जाती है, उसे विशेष्य कहा जाता है।
  • विशेषण के भेद: इसके मुख्य रूप से 4 भेद होते हैं:
    • गुणवाचक विशेषण: जो संज्ञा के गुण, दोष, रंग, आकार, दशा का बोध कराए। जैसे—अच्छा लड़का, काली गाय, पुरानी कार।
    • संख्यावाचक विशेषण: जो संज्ञा की संख्या का बोध कराए। इसके दो प्रकार हैं—निश्चित संख्यावाचक (चार आम) और अनिश्चित संख्यावाचक (कुछ लोग)।
    • परिमाणवाचक विशेषण: जो संज्ञा की नाप, तौल या मात्रा का बोध कराए। इसके दो प्रकार हैं—निश्चित परिमाणवाचक (2 लीटर दूध) और अनिश्चित परिमाणवाचक (थोड़ा पानी)।
    • सार्वनामिक विशेषण: जब कोई सर्वनाम शब्द संज्ञा से ठीक पहले आकर विशेषण की तरह काम करता है। जैसे—वह घर मेरा है, यह लड़का बुद्धिमान है।

4. क्रिया (Verb)

  • परिभाषा: जिस शब्द से किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं। क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं (जैसे – पढ़, लिख)।
  • क्रिया के भेद: कर्म के आधार पर क्रिया के मुख्य रूप से 2 भेद होते हैं:
    • अकर्मक क्रिया: जिस क्रिया का फल सीधे कर्ता पर पड़ता है और उसमें कर्म नहीं होता। जैसे—रोहन हँसता है, पक्षी उड़ते हैं
    • सकर्मक क्रिया: जिस क्रिया के साथ कर्म होता है या कर्म होने की संभावना होती है। जैसे—राम आम खाता है (आम यहाँ कर्म है), वह पत्र लिखता है

5. अव्यय या अविकारी शब्द

  • परिभाषा: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक आदि के कारण कोई विकार या परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय कहते हैं।
  • अव्यय के भेद: इसके मुख्य रूप से 4 भेद (और एक अतिरिक्त भेद ‘निपात’) होते हैं:
    • क्रियाविशेषण: जो क्रिया की विशेषता बताते हैं। जैसे—वह धीरे-धीरे चलता है, तुम कल आना।
    • संबंधबोधक: जो संज्ञा/सर्वनाम का संबंध वाक्य के अन्य शब्दों से बताते हैं। जैसे—घर के सामने पेड़ है, विद्यालय के पीछे मैदान है।
    • समुच्चयबोधक (Yojak): जो दो शब्दों या वाक्यों को आपस में जोड़ते हैं। जैसे—राम और श्याम, वह आया परंतु रुक नहीं सका।
    • विस्मयादिबोधक: जो हर्ष, शोक, घृणा, आश्चर्य आदि के भाव प्रकट करते हैं। जैसे—वाह! क्या दृश्य है, हाय! यह क्या हो गया।
    • निपात (विशेष अव्यय): जो किसी शब्द के बाद लगकर उस पर विशेष बल देते हैं। जैसे—तुम्हें आना ही पड़ेगा, मुझे भी चलना है।

3. लिंग, वचन और कारक: इनका विशेषण और क्रिया पर प्रभाव

यह व्याकरण का वह खंड है जहाँ वाक्य शुद्धि (Sentence Correction) के सबसे अधिक नियम बनते हैं।

1. लिंग (Gender) का प्रभाव

  • विशेषण पर प्रभाव: संज्ञा का लिंग बदलने पर विकारी विशेषण का रूप बदल जाता है।
    • पुल्लिंग संज्ञा: अच्छा लड़का जा रहा है।
    • स्त्रीलिंग संज्ञा: अच्छी लड़की जा रही है। (यहाँ ‘अच्छा’ बदलकर ‘अच्छी’ हो गया)।
  • क्रिया पर प्रभाव: कर्ता के लिंग के अनुसार क्रिया का रूप निर्धारित होता है।
    • पुल्लिंग कर्ता: मोहन पत्र लिखता है
    • स्त्रीलिंग कर्ता: राधा पत्र लिखती है

2. वचन (Number) का प्रभाव

  • विशेषण पर प्रभाव: संज्ञा का वचन बदलने पर विशेषण का रूप भी प्रभावित होता है।
    • एकवचन संज्ञा: काला घोड़ा दौड़ रहा है।
    • बहुवचन संज्ञा: काले घोड़े दौड़ रहे हैं।
  • क्रिया पर प्रभाव: कर्ता एकवचन है या बहुवचन, क्रिया उसी के अनुसार बदलती है।
    • एकवचन कर्ता: बच्चा सो रहा है
    • बहुवचन कर्ता: बच्चे सो रहे हैं (अनुस्वार / बिंदी का विशेष ध्यान रखें)।

3. कारक (Case) का प्रभाव

  • जब वाक्य में कर्ता के साथ कारक चिह्न (विभक्ति) जैसे ‘ने’ लग जाता है, तो क्रिया कर्ता के अनुसार न बदलकर कर्म के अनुसार बदलती है (इसे कर्मवाच्य प्रयोग कहते हैं)।
    • बिना कारक चिह्न के: राम चाय पीता है (क्रिया कर्ता ‘राम’ के अनुसार पुल्लिंग है)।
    • कारक चिह्न (‘ने’) के साथ: राम ने चाय पी (यहाँ ‘चाय’ स्त्रीलिंग कर्म है, इसलिए क्रिया ‘पी’ हो गई, भले ही कर्ता राम पुल्लिंग है)।

4. काल (Tense) और उसके उपभेद

क्रिया के जिस रूप से कार्य के होने के समय का बोध हो, उसे काल कहते हैं। काल के मुख्य रूप से 3 भेद होते हैं और उनके निम्नलिखित उपभेद हैं:

                            ┌─────────────── काल के 3 भेद ───────────────┐
                            │                                            │
         ┌──────────────────┴──────────────────┐       ┌──────────────────┴──────────────────┐
         │ 1. वर्तमान काल (Present)             │       │ 3. भविष्य काल (Future)            │
         │ 2. भूतकाल (Past)                    │       │                                     │
         └─────────────────────────────────────┘       └─────────────────────────────────────┘

1. वर्तमान काल (इसके मुख्य 5 उपभेद हैं)

  • सामान्य वर्तमान: क्रिया वर्तमान में सामान्य रूप से होती है। (पहचान: ता है, ती है, ते हैं)। जैसे—वह स्कूल जाता है
  • अपूर्ण/तत्कालिक वर्तमान: क्रिया वर्तमान में अभी चल रही है। (पहचान: रहा है, रही है, रहे हैं)। जैसे—श्याम पढ़ रहा है
  • पूर्ण वर्तमान: वर्तमान काल में कार्य की पूर्णता का बोध होता है। जैसे—उसने पुस्तक पढ़ी है
  • संदिग्ध वर्तमान: जहाँ वर्तमान में क्रिया के होने में संदेह हो। (पहचान: ता होगा, ती होगी)। जैसे—राम पढ़ता होगा
  • संभाव्य वर्तमान: जहाँ वर्तमान काल में काम के पूरा होने की संभावना हो। जैसे—शायद वह आया हो

2. भूतकाल (इसके मुख्य 6 उपभेद हैं)

  • सामान्य भूतकाल: क्रिया के विशेष समय का ज्ञान नहीं होता, कार्य सामान्य रूप से बीत चुका होता है। जैसे—मोहन गया
  • आसन्न भूतकाल: कार्य अभी-अभी, निकट समय में ही समाप्त हुआ है। जैसे—मैंने आम खाया है
  • पूर्ण भूतकाल: कार्य बहुत पहले ही समाप्त हो चुका था। (पहचान: था, थी, थे)। जैसे—उसने पत्र लिखा था
  • अपूर्ण भूतकाल: क्रिया भूतकाल में हो रही थी, पर समाप्ति का पता नहीं। (पहचान: रहा था, रही थी)। जैसे—गीता गाना गा रही थी
  • संदिग्ध भूतकाल: भूतकाल में कार्य होने में संदेह प्रकट हो। जैसे—बस छूट गई होगी
  • हेतु-हेतुमद भूतकाल: जहाँ भूतकाल की एक क्रिया दूसरी क्रिया पर निर्भर हो (शर्त वाले वाक्य)। जैसे—यदि वर्षा होती, तो फसल अच्छी होती

3. भविष्य काल (इसके मुख्य 3 उपभेद हैं)

  • सामान्य भविष्य काल: क्रिया सामान्य रूप से आने वाले समय में होगी। (पहचान: एगा, एगी, एंगे)। जैसे—हम कल दिल्ली जाएँगे
  • संभाव्य भविष्य काल: आने वाले समय में किसी कार्य के होने की संभावना या इच्छा हो। जैसे—शायद आज वर्षा हो
  • हेतु-हेतुमद भविष्य काल: आने वाले समय में एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर करेगा। जैसे—यदि तुम पढ़ोगे, तो पास हो जाओगे

Quick Revision Table

व्याकरण खंडमुख्य तत्व / भेद संख्यायाद रखने योग्य मूल मंत्रसटीक उदाहरण
संज्ञा5 भेदसंसार के सभी नाम संज्ञा हैं।राम, मिठास
सर्वनाम6 भेदनाम की जगह आने वाले शब्द।मैं, यह, कोई
विशेषण4 bundle भेदसंज्ञा की विशेषता या तारीफ बताना।काला घोड़ा, 2 लीटर
क्रिया2 मुख्य भेद (कर्म आधारित)किसी काम का करना या होना।हँसना (अकर्मक), खाना (सकर्मक)
अव्यय4 मुख्य भेद + निपातकभी न बदलने वाले शब्द।धीरे-धीरे, और, ही
काल3 मुख्य भेदक्रिया के होने का समय।पढ़ता है, पढ़ा था, पढ़ेगा

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