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Computer Architecture : CPU, ALU, CU, Registers & Motherboard

अगर कंप्यूटर को एक इंसान मान लिया जाए, तो कंप्यूटर आर्किटेक्चर का मतलब है— उसके शरीर की बनावट (Anatomy)। कौन सा अंग क्या काम करेगा, हाथ-पैर कैसे हिलेंगे और दिमाग कैसे सोचेगा, इसी पूरे डिजाइन को हम Computer Architecture कहते हैं।

  • इतिहास का फैक्ट: दुनिया में सबसे पहला और सबसे प्रसिद्ध कंप्यूटर आर्किटेक्चर सन 1945 में डॉ. जॉन वॉन न्यूमैन (Dr. John von Neumann) ने दिया था। आज के हमारे फोन, लैपटॉप और पीसी इसी ‘वॉन न्यूमैन आर्किटेक्चर’ पर काम करते हैं।

1. CPU (Central Processing Unit) — कंप्यूटर का असली राजा

  • सरल भाषा में समझें: जैसे हमारे शरीर में सारा फैसला हमारा ‘दिमाग’ लेता है, वैसे ही कंप्यूटर में सब कुछ CPU तय करता है। इसीलिए इसे “Brain of the Computer” (कंप्यूटर का दिमाग) या “Heart of the Computer” (कंप्यूटर का दिल) कहा जाता है।
  • टेक्निकल नाम: कंप्यूटर खरीदते समय हम जो कहते हैं न कि इसमें Intel i5 या AMD Ryzen प्रोसेसर है, वह प्रोसेसर ही असल में CPU होता है। यह सिलिकॉन (Silicon) नाम के सेमीकंडक्टर से बनी एक छोटी सी Microchip होती है।

CPU के काम करने की स्पीड (Clock Speed)

CPU कितनी तेजी से काम करेगा, यह उसकी Clock Speed से नापा जाता है।

  • पुराने जमाने में स्पीड MHz (मेगाहर्ट्ज) में होती थी।
  • आज के लेटेस्ट प्रोसेसर की स्पीड GHz (गीगाहर्ट्ज) में नापी जाती है। (अगर आपके प्रोसेसर की स्पीड 3.2 GHz है, तो इसका मतलब है कि वह 1 सेकंड में 320 करोड़ कैलकुलेशन कर सकता है!)

CPU का वर्किंग साइकिल (Machine Cycle)

एग्जाम में इसका सही क्रम बहुत बार पूछा जाता है। CPU किसी भी काम को 4 स्टेप्स में पूरा करता है:

  1. Fetch (लाना): मेमोरी (RAM) से निर्देशों को अपने पास खींच कर लाना
  2. Decode (समझना): उन निर्देशों को अपनी भाषा (0 और 1) में डिकोड करना कि आखिर यूजर करवाना क्या चाहता है
  3. Execute (चलाना): उस काम को असलियत में पूरा करना (जैसे जोड़ना या घटाना)
  4. Store (सहेजना): फाइनल रिजल्ट को वापस मेमोरी में सेव कर देना

2. ALU (Arithmetic Logic Unit) — कंप्यूटर का मुनीम (कैलकुलेटर)

CPU के अंदर तीन छोटे-छोटे कर्मचारी काम करते हैं, उनमें से पहला है ALU। इसे आप कंप्यूटर का मुनीम या गणितज्ञ कह सकते हैं। इसका काम सिर्फ और सिर्फ कैलकुलेशन करना है।

ALU दो तरह के काम करता है:

  • A – Arithmetic Operations (अंकगणितीय गणनाएं): इसमें शुद्ध गणित आता है। जैसे— जोड़ना (+), घटाना (-), गुणा करना (*), और भाग देना (/).
  • L – Logic Operations (तार्किक गणनाएं): इसमें कंप्यूटर अपना दिमाग लगाकर तुलना (Comparison) करता है। जैसे— कौन सा नंबर बड़ा है (>), कौन सा छोटा है (<), या कौन सा बराबर है (=)। (जैसे: पासवर्ड सही है या गलत, यह फैसला ALU ही करता है)।

3. CU (Control Unit) — कंप्यूटर का ट्रैफिक पुलिस (मैनेजर)

यह CPU का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंट्रोल यूनिट (CU) खुद कोई कैलकुलेशन नहीं करता, इसका काम सिर्फ राज करना और हुक्म चलाना है।

  • लाइव उदाहरण: जैसे चौराहे पर खड़ा ट्रैफिक पुलिसकर्मी खुद गाड़ी नहीं चलाता, बल्कि इशारों से बताता है कि कौन सी गाड़ी कब रुकेगी और कब जाएगी; ठीक वैसे ही CU कंप्यूटर के सारे इनपुट, आउटपुट, मेमोरी और प्रोसेसर के बीच तालमेल (Coordination) बिठाता है।
  • टेक्निकल नाम: इसीलिए कंट्रोल यूनिट को कंप्यूटर का “Nervous System” (तंत्रिका तंत्र) या “Traffic Controller” कहा जाता है। यह पूरे कंप्यूटर में डेटा के बहाने (Data Flow) को कंट्रोल करता है।

4. Registers (रजिस्टर) — CPU की अपनी पर्सनल और सबसे तेज मेमोरी

  • देसी उदाहरण: मान लीजिए आप एक गणितज्ञ हैं और एक बड़ी सी टेबल पर बैठकर मैथ का सवाल हल कर रहे हैं। आपके पीछे एक बहुत बड़ी अलमारी (Hard Disk) है जिसमें लाखों किताबें हैं। आपकी टेबल पर भी कुछ किताबें (RAM) खुली रखी हैं। लेकिन जब आप पेन से कागज पर सवाल हल कर रहे होते हैं, तो कुछ नंबरों को आप अपने हाथ में या दिमाग में कुछ सेकंड के लिए याद रखते हैं। बस, वही हाथ या दिमाग की तुरंत वाली मेमोरी Register है।
  • टेक्निकल फैक्ट: रजिस्टर CPU के बिल्कुल अंदर (In-built) स्थित होते हैं। यह दुनिया की सबसे तेज मेमोरी (Fastest Memory) होती है। इसकी स्टोरेज कैपेसिटी बहुत कम (कुछ बाइट्स) होती है, लेकिन इसकी स्पीड का कोई मुकाबला नहीं है।

परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रमुख रजिस्टर्स (Types of Registers):

  1. PC (Program Counter – प्रोग्राम काउंटर): यह बहुत शातिर रजिस्टर है। CPU अभी जो काम कर रहा है, यह उस पर नजर नहीं रखता; बल्कि यह अगले प्रोसेस होने वाले निर्देश का एड्रेस (Address) अपने पास एडवांस में स्टोर रखता है
  2. IR (Instruction Register): मेमोरी से लाने के बाद, वर्तमान में जिस निर्देश पर काम चल रहा है, वह IR के अंदर आकर बैठता है
  3. MAR (Memory Address Register): यह उस मेमोरी लोकेशन का एड्रेस रखता है, जहाँ से डेटा लाया जाना है या जहाँ डेटा भेजा जाना है
  4. MBR / MDR (Memory Buffer/Data Register): मेमोरी से आने वाला या मेमोरी में जाने वाला एक्चुअल डेटा कुछ समय के लिए इसी रजिस्टर में ठहरता है
  5. Accumulator (AC – एक्युमुलेटर): ALU जब कोई जोड़-घटाव करता है, तो उसका जो इंटरमीडिएट रिजल्ट (बीच का परिणाम) आता है, उसे कुछ देर के लिए Accumulator अपने पास रखता है

मेमोरी की स्पीड का सही क्रम (रट लो, एग्जाम में आता है):
रजिस्टर (सबसे तेज़) > कैश मेमोरी (Cache) > रैम (RAM) > हार्ड डिस्क / SSD (सबसे धीमा)


5. Motherboard (मदरबोर्ड) — कंप्यूटर का रीढ़ की हड्डी (Main Circuit Board)

अब बात करते हैं उस बड़े से बोर्ड की, जिस पर ये CPU, चूहे-बिल्ली (Mouse-Keyboard) सब आकर जुड़ते हैं।

  • नाम के पीछे का कारण: इसे ‘मदर’ बोर्ड इसलिए कहते हैं क्योंकि एक माँ की तरह यह कंप्यूटर के सभी छोटे-मोटे कंपोनेंट्स (RAM, Hard Disk, Graphics Card) को अपनी गोद में संभालकर रखता है और उन्हें आपस में जोड़ता है।
  • अन्य नाम: इसे PCB (Printed Circuit Board), Main Board, या System Board भी कहा जाता है। यह हरे या नीले रंग का एक प्लास्टिकनुमा बोर्ड होता है, जिस पर तांबे (Copper) की बारीक लाइनें बनी होती हैं।

मदरबोर्ड के मुख्य हिस्से (Components of Motherboard):

  • CPU Socket: यह वह जगह है जहाँ कंप्यूटर का दिमाग यानी प्रोसेसर (CPU) फिट किया जाता है।
  • RAM Slots: कंप्यूटर की प्राइमरी मेमोरी (RAM) को लगाने के लिए वर्टिकल स्लॉट्स बने होते हैं।
  • BIOS Chip (बायोस चिप): मदरबोर्ड पर एक छोटी सी ROM चिप होती है जिसमें कंप्यूटर को चालू करने वाला सॉफ्टवेयर BIOS (Basic Input Output System) स्टोर रहता है।
  • CMOS Battery (कमोस बैटरी): आपने ध्यान दिया होगा कि कंप्यूटर को महीनों बाद भी चालू करो, तो उसमें टाइम और डेट एकदम सही दिखती है। यह जादू मदरबोर्ड पर लगी एक गोल घड़ी वाले सेल (Battery) की वजह से होता है, जिसे CMOS (Complementary Metal Oxide Semiconductor) बैटरी कहते हैं। यह कंप्यूटर बंद होने पर भी घड़ी को चालू रखती है।

बसें क्या होती हैं ? (What are Buses in Computer ?)

मदरबोर्ड पर तांबे की जो बारीक-बारीक लाइनें (पटरियाँ) दिखती हैं, उन्हें कंप्यूटर साइंस में Buses (बस) कहा जाता है। जैसे सड़क पर चलने वाली बस सवारियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है, वैसे ही मदरबोर्ड की ‘बसें’ डिजिटल सिग्नल्स और डेटा को CPU से RAM या अन्य डिवाइसेज तक ले जाती हैं।

यह मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं:

  1. Internal Bus (System Bus): यह CPU को मदरबोर्ड के आंतरिक कंपोनेंट्स (जैसे RAM) से जोड़ती है. यह तीन तरह की होती है:
    • Data Bus: इसमें सिर्फ एक्चुअल डेटा ट्रेवल करता है
    • Address Bus: यह बताती है कि डेटा को किस मेमोरी लोकेशन पर लेकर जाना है
    • Control Bus: यह कंट्रोल सिग्नल्स (जैसे Read या Write का हुक्म) लेकर जाती है
  2. External Bus (Expansion Bus): यह कंप्यूटर के बाहरी डिवाइसेज (जैसे Printer, Keyboard, Pen drive) को कनेक्ट करने के काम आती है

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