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Introduction to Computer

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कंप्यूटर शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में एक ऐसी मशीन की इमेज आती है जो कैलकुलेशन करती है। लेकिन टेक्निकल और एग्जाम के नजरिए से कंप्यूटर की परिभाषा, उसके काम करने का तरीका और उसकी हिस्ट्री बहुत गहरी है। आइए इसका पूरा पोस्टमार्टम करते हैं।


1. कंप्यूटर शब्द का व्युत्पत्ति शास्त्र (Etymology of Computer Word)

  • लैटिन Vs इंग्लिश विवाद: अक्सर परीक्षाओं में यह सवाल फंसाता है। ध्यान दें:
    • कंप्यूटर शब्द की उत्पत्ति मूल रूप से लैटिन भाषा के ‘Computare’ (कंप्यूटारे) शब्द से हुई है।
    • बाद में इसे अंग्रेजी भाषा के ‘Compute’ (कंप्यूट) शब्द के रूप में अपनाया गया।
    • इन दोनों ही शब्दों का शाब्दिक अर्थ (Literal Meaning) होता है— To Calculate (गणना करना या हिसाब लगाना)
  • हिंदी नाम और उनके टेक्निकल अर्थ:
    • कंप्यूटर को हिंदी में ‘संगणक’ कहा जाता है, जिसका मतलब है “वह मशीन जो बहुत सारी गणनाएं एक साथ कर सके।”
    • इसे कुछ शुद्ध हिंदी किताबों में ‘अभिकलित्र’ या ‘गणक’ भी लिखा जाता है।
  • Computer का Full Form (Technical Definition): हालांकि कंप्यूटर का कोई ऑफिशियल फुल फॉर्म नहीं है, लेकिन दुनिया भर के एक्सपर्ट्स ने इसके कार्य के आधार पर एक यूनिवर्सल फुल फॉर्म बनाया है जो अक्सर एग्जाम्स में पूछा जाता है:
    • C – Commonly (सामान्य रूप से)
    • O – Operated (ऑपरेट होने वाली)
    • M – Machine (मशीन)
    • P – Particularly (विशेष रूप से)
    • U – Used for (उपयोग की जाने वाली)
    • T – Technical and (तकनीकी और)
    • E – Educational (शैक्षणिक)
    • R – Research (अनुसंधान)

2. कंप्यूटर का बुनियादी आर्किटेक्चर और IPO चक्र (The IPO Cycle Mechanism)

दुनिया का कोई भी डिजिटल सिस्टम हो, वह हमेशा IPO (Input –> Process –> Output) Cycle पर ही काम करता है। इस चक्र को और गहराई से समझते हैं:

  [ INPUT ] ───> ( Raw Data / Instructions )
      │
      ▼
[ PROCESSING ] ──> ( CPU / ALU / CU / Registers )
      │
      ▼
 [ OUTPUT ] ───> ( Processed Data / Information )
      │
      ▼
 [ STORAGE ] ───> ( Secondary Memory / Future Use )

A. इनपुट (Input Stage)

  • जब यूजर किसी इनपुट डिवाइस (जैसे Keyboard, Mouse, Scanner, MICR) के जरिए कंप्यूटर को डेटा भेजता है, तो उसे इनपुट कहते हैं।
  • इस स्टेज पर जो कुछ भी कंप्यूटर के अंदर जाता है, उसे ‘Raw Data’ या ‘Unprocessed Facts’ कहा जाता है। इसका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व या स्पष्ट मतलब नहीं होता।
  • एग्जाम फैक्ट: इनपुट कनवर्टर (Input Interfaces) यूजर की भाषा को कंप्यूटर की भाषा यानी Machine Language (0 and 1 / Binary) में बदलने का काम करते हैं।

B. प्रोसेसिंग (Processing Stage)

  • यह कंप्यूटर का सबसे मुख्य भाग है। यहाँ CPU (Central Processing Unit) डेटा पर लॉजिकल और अर्थमैटिक ऑपरेशन्स परफॉर्म करता है।
  • जब इनपुट किया गया डेटा CPU के पास जाता है, तो CPU उसे अपने Registers में होल्ड करता है, ALU (Arithmetic Logic Unit) से कैलकुलेशन करवाता है और CU (Control Unit) के जरिए पूरे सिस्टम को मैनेज करता है।

C. आउटपुट (Output Stage)

  • प्रोसेसिंग पूरी होने के बाद जो रिजल्ट यूजर को मॉनिटर, प्रिंटर या स्पीकर के जरिए मिलता है, उसे आउटपुट कहते हैं।
  • आउटपुट हमेशा ‘Information’ (सूचना) के रूप में बाहर आता है। यह पूरी तरह से अर्थपूर्ण (Meaningful) और व्यवस्थित होता है।
  • एग्जाम फैक्ट: आउटपुट कनवर्टर कंप्यूटर की बाइनरी भाषा (0, 1) को वापस इंसानी भाषा (Human Readable Form) में बदलते हैं।

D. स्टोरेज (Storage Stage – जो अक्सर बुक्स में छोड़ दिया जाता है)

  • आउटपुट मिलने के बाद अगर यूजर उस डेटा को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना चाहता है, तो वह उसे Secondary Storage (Hard Disk, SSD, Pendrive) में सेव करता है। इसे IPOS (Input-Process-Output-Storage) Cycle भी कहा जाता है।

3. डेटा (Data) और सूचना (Information)

डेटा (Data) क्या है?

  • यह Unorganized (अव्यवस्थित) और कच्चे आंकड़ों का समूह होता है।
  • इसे हम ‘Pre-Processing Status’ भी कह सकते हैं (यानी प्रोसेस होने से पहले की स्थिति)।
  • डेटा के टेक्निकल प्रकार (Data Types):
    1. Numeric Data (संख्यात्मक): इसमें केवल 0 से 9 तक के अंक आते हैं। जैसे- किसी की सैलरी, परीक्षा के नंबर, या बैंक बैलेंस। इस डेटा पर हम मैथमेटिकल कैलकुलेशन (जोड़, घटाव) कर सकते हैं।
    2. Alphabetic Data (अक्षरात्मक): इसमें केवल A से Z या a से z और हिंदी के अक्षर आते हैं। जैसे- किसी का नाम। इस पर गणितीय क्रियाएं नहीं हो सकतीं।
    3. Alphanumeric Data (चिन्हांत्मक/अल्फ़ान्यूमेरिक): इसमें अक्षर, अंक और स्पेशल करैक्टर (जैसे- @, #, $, %, *) सब मिक्स होते हैं। जैसे- आपका ईमेल आईडी, पासवर्ड या घर का पता। याद रखें: इस डेटा पर गणितीय कैलकुलेशन नहीं हो सकती, केवल तुलना (Comparison) की जा सकती है।
    4. Multimedia Data: इसमें ऑडियो, वीडियो, इमेजेस और एनिमेशन फाइलें शामिल होती हैं।

सूचना (Information) क्या है?

  • जब डेटा को प्रोसेस करके उसे Organized (व्यवस्थित), स्ट्रक्चर्ड और अर्थपूर्ण बना दिया जाता है, तो वह सूचना कहलाती है।
  • यह ‘Post-Processing Status’ होती है (यानी प्रोसेस होने के बाद की स्थिति)।
  • निर्णय लेने (Decision Making) के लिए हमेशा ‘सूचना’ का ही उपयोग किया जाता है, ‘डेटा’ का नहीं।

4. कंप्यूटर की तकनीकी विशेषताएं और उनके पीछे के सिद्धांत

  • 1. गति (Speed) और क्लॉक स्पीड (Clock Speed):
    • कंप्यूटर की स्पीड उसके प्रोसेसर के अंदर की एक घड़ी (Clock) से तय होती है, जिसे Clock Speed कहते हैं। इसे MHz (मेगाहर्ट्ज) या GHz (गीगाहर्ट्ज) में नापा जाता है।
    • कंप्यूटर एक सेकंड में करोड़ों निर्देश प्रोसेस कर सकता है, जिसे MIPS (Million Instructions Per Second) या BIPS (Billion Instructions Per Second) में मापा जाता है।
    • सुपरकंप्यूटर की स्पीड को FLOPS (Floating Point Operations Per Second) में नापा जाता है।
  • 2. सटीकता (Accuracy) और GIGO का नियम:
    • कंप्यूटर 100% सटीक काम करता है। वह कभी खुद से गलत रिजल्ट नहीं देता।
    • कंप्यूटर साइंस में एक नियम है— GIGO (Garbage In, Garbage Out)। इसका मतलब है कि अगर यूजर कंप्यूटर को गलत इनपुट या खराब प्रोग्राम (कचरा) देगा, तो आउटपुट भी गलत (कचरा) ही आएगा। यानी कंप्यूटर की गलती हमेशा इंसानी गलती का नतीजा होती है।
  • 3. कर्मठता (Diligence):
    • कंप्यूटर एक मशीन है, इसलिए इसे इंसानों की तरह थकान (Fatigue), बोरियत (Boredom) या एकाग्रता की कमी (Lack of Concentration) नहीं होती। यह बिना थके लगातार कई दिनों तक समान स्पीड से काम कर सकता है।
  • 4. बहुमुखी प्रतिभा (Versatility):
    • इसे Multi-processing या Multi-tasking भी कह सकते हैं। कंप्यूटर एक ही समय पर अलग-अलग प्रकृति के काम कर सकता है (जैसे एमएस वर्ड पर टाइपिंग करते हुए बैकग्राउंड में म्यूजिक प्ले करना और इंटरनेट से फाइल डाउनलोड करना)।
  • 5. नो आईक्यू (0 IQ – Intelligence Quotient):
    • कंप्यूटर के पास अपना खुद का कोई दिमाग, चेतना (Consciousness) या सोचने की क्षमता नहीं होती। यह पूरी तरह यूजर के निर्देशों और प्री-रिटेन प्रोग्राम्स पर निर्भर करता है। (नोट: आज की तारीख में AI – Artificial Intelligence के जरिए कंप्यूटर में सोचने की क्षमता विकसित की जा रही है, लेकिन फिर भी उसका बेस इंसानी कोडिंग ही है)।

5. कंप्यूटर के विकास का इतिहास और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक (The Legends of Computer History)

[ अबेकस (चीन) ] ──> पहला गणना यंत्र
     │
     ▼
[ पास्कलाइन (ब्लेज पास्कल) ] ──> पहला मैकेनिकल कैलकुलेटर
     │
     ▼
[ एनालिटिकल इंजन (चार्ल्स बैबेज) ] ──> आधुनिक कंप्यूटर का आधार (Base)
     │
     ▼
[ टैबुलेटिंग मशीन (हर्मन होलेरिथ) ] ──> पंच कार्ड का पहला व्यावसायिक उपयोग
  • चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage):
    • इन्हें Father of Computer (कंप्यूटर का जनक) कहा जाता है। इन्होंने 1822 में ‘डिफरेंस इंजन’ बनाया जो भाप से चलता था, लेकिन यह असफल रहा।
    • इसके बाद इन्होंने 1833 में Analytical Engine (एनालिटिकल इंजन) का आविष्कार किया। यह दुनिया का पहला ऐसा मैकेनिकल कंप्यूटर था जिसमें इनपुट, प्रोसेसिंग, आउटपुट और स्टोरेज (Store) की व्यवस्था थी। यही वजह है कि आज के आधुनिक कंप्यूटर इसी मॉडल पर काम करते हैं।
  • लेडी एडा लवलेस (Lady Ada Lovelace / Ada Augusta):
    • यह चार्ल्स बैबेज की शिष्या थीं। इन्होंने बैबेज के एनालिटिकल इंजन के लिए दुनिया का पहला कंप्यूटर प्रोग्राम लिखा था। इसी कारण इन्हें First Programmer of the World कहा जाता है।
    • इन्होंने ही बाइनरी नंबर सिस्टम (0 और 1) की नींव रखी थी। इनके सम्मान में अमेरिका के रक्षा विभाग ने एक कंप्यूटर लैंग्वेज का नाम ‘ADA’ रखा है।
  • ब्लेज पास्कल (Blaise Pascal):
    • इन्होंने 1642 में दुनिया का पहला मैकेनिकल कैलकुलेटर बनाया था, जिसे ‘पास्कलाइन’ (Pascaline) या ‘अडिंग मशीन’ कहा जाता है। यह घड़ी और ओडोमीटर के सिद्धांत पर काम करता था।
  • हर्मन होलेरिथ (Herman Hollerith):
    • इन्होंने 1890 की अमेरिकी जनगणना के लिए एक मैकेनिकल टैबुलेटर बनाया था, जिसे टैबुलेटिंग मशीन कहा जाता है।
    • इन्होंने कंप्यूटर में डेटा स्टोर करने और इनपुट देने के लिए Punch Card (पंच कार्ड) का आविष्कार किया था। आगे चलकर हर्मन होलेरिथ की कंपनी ही दुनिया की सबसे बड़ी कंप्यूटर कंपनी IBM (International Business Machines) बनी।
  • डॉ. जॉन वॉन न्यूमैन (Dr. John von Neumann):
    • कंप्यूटर के विकास में सबसे बड़ा और क्रांतिकारी योगदान इनका माना जाता है। इन्होंने 1945 में ‘Stored Program Architecture’ (जॉन्स वॉन न्यूमैन आर्किटेक्चर) दिया था।
    • इससे पहले कंप्यूटर में हर नए काम के लिए तारों को बदलना पड़ता था (Hardwiring), लेकिन न्यूमैन ने बताया कि डेटा और प्रोग्राम दोनों को कंप्यूटर की मेमोरी के अंदर ही स्टोर किया जा सकता है। आज के हमारे सभी लैपटॉप, पीसी और मोबाइल इसी आर्किटेक्चर पर काम करते हैं।
  • एलन ट्यूरिंग (Alan Turing):
    • इन्हें Father of Modern Computer Science (आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान का जनक) कहा जाता है। इन्होंने ‘ट्यूरिंग मशीन’ की अवधारणा दी थी। इन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का शुरुआती गॉडफादर भी माना जाता है।

6. भारत में कंप्यूटर क्रांति का प्रामाणिक इतिहास (Computer History in India)

यदि आपकी वेबसाइट के यूज़र्स राजस्थान या भारत के किसी भी स्टेट लेवल एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं, तो यह सेक्शन उनके लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है:

  • पहला आगमन (1955): भारत में सबसे पहला कंप्यूटर सन 1955 में कोलकाता (तब कलकत्ता) के भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI – Indian Statistical Institute) में स्थापित किया गया था। यह एक विदेशी कंप्यूटर था जिसका नाम HEC-2M (Hollerith Electronic Computer Model 2M) था, जिसे इंग्लैंड से मंगाया गया था।
  • पहला स्वदेशी कंप्यूटर ‘सिद्धार्थ’: भारत में पूरी तरह से निर्मित पहला घरेलू (Swadeshi) कंप्यूटर ‘सिद्धार्थ’ (Siddharth) था। इसका निर्माण ECIL (Electronics Corporation of India Limited) ने किया था। इस कंप्यूटर को सबसे पहले 16 अगस्त 1986 को बेंगलुरु के मुख्य डाकघर (Main Post Office) में स्थापित किया गया था।
  • भारतीय सुपरकंप्यूटर का जन्म (PARAM 8000): जब अमेरिका ने भारत को मौसम की भविष्यवाणी के लिए अपना ‘क्रै (Cray)’ सुपरकंप्यूटर देने से मना कर दिया, तब भारत के वैज्ञानिकों ने खुद का सुपरकंप्यूटर बनाने की ठानी।
    • C-DAC (Centre for Development of Advanced Computing), पुणे ने साल 1991 में भारत का पहला स्वदेशी सुपरकंप्यूटर बनाया, जिसका नाम PARAM 8000 था।
  • डॉ. विजय भटकर (Dr. Vijay Bhatkar): इन्हें भारत में सुपरकंप्यूटर का जनक (Father of Supercomputing in India) कहा जाता है। इनके नेतृत्व में ही ‘परम’ सीरीज के सुपरकंप्यूटर्स का निर्माण हुआ था।

7. कंप्यूटर साक्षरता: परीक्षा के नजरिए से टेक्निकल परिभाषा

एग्जाम्स में अक्सर चार ऑप्शंस देकर पूछा जाता है कि “कंप्यूटर साक्षरता (Computer Literacy) का सही अर्थ क्या है?”

  • सही परिभाषा: कंप्यूटर साक्षर होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि यूजर को कोडिंग आनी चाहिए या कंप्यूटर रिपेयर करना आना चाहिए।
  • टेक्निकल अर्थ में, “वह व्यक्ति जो कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर और उसकी कार्यप्रणाली को समझकर अपने दैनिक जीवन के जरूरी काम (जैसे— ईमेल भेजना, ऑनलाइन बिल पे करना, एमएस वर्ड पर काम करना) आसानी से कर सके, वह कंप्यूटर साक्षर कहलाता है।” इसे कंप्यूटर की कार्यसाधक कोडिंग या बेसिक अवेयरनेस भी कहते हैं।
  • विश्व कंप्यूटर साक्षरता दिवस: हर साल 2 दिसम्बर को पूरी दुनिया में कंप्यूटर साक्षरता दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत भारतीय आईटी कंपनी NIIT ने साल 2001 में अपनी 20वीं वर्षगांठ पर की थी ताकि दुनिया भर में डिजिटल अवेयरनेस बढ़ाई जा सके।

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