राजस्थान के मुख्यमंत्री : Quick Revision Notes
| मुख्यमंत्री का नाम | कार्यकाल / श्रेणी | विशेष विवरण एवं परीक्षा उपयोगी तथ्य |
|---|---|---|
| हीरालाल शास्त्री | प्रथम मनोनीत | राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री। इन्होंने ‘जीवन कुटीर’ (वनस्थली) की स्थापना की थी। |
| सी.एस. वेंकटाचारी | मनोनीत (IAS) | केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एकमात्र IAS अधिकारी जो राजस्थान के मुख्यमंत्री बने। |
| जयनारायण व्यास | मनोनीत एवं निर्वाचित | राजस्थान के एकमात्र मुख्यमंत्री जो मनोनीत और निर्वाचित दोनों रहे। इन्हें ‘लोकनायक’ कहा जाता है। |
| टीकाराम पालीवाल | प्रथम निर्वाचित | राजस्थान के प्रथम लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित मुख्यमंत्री। प्रथम उपमुख्यमंत्री भी रहे। |
| मोहनलाल सुखाड़िया | सर्वाधिक कार्यकाल | इन्हें ‘आधुनिक राजस्थान का निर्माता’ कहा जाता है। ये सबसे लंबे समय (करीब 17 वर्ष) तक CM रहे। |
| बरकतउल्ला खान | कार्यकाल में निधन | राजस्थान के प्रथम अल्पसंख्यक (मुस्लिम) मुख्यमंत्री। भारत-पाक युद्ध (1971) के समय यही पद पर थे। |
| हरिदेव जोशी | तीन बार मुख्यमंत्री | ये 10 बार विधायक रहे और एक भी चुनाव नहीं हारे। इनके समय में पहली बार संभागीय व्यवस्था बंद हुई थी। |
| भैरोंसिंह शेखावत | प्रथम गैर-कांग्रेसी | राजस्थान के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री (जनता पार्टी)। बाद में भारत के उपराष्ट्रपति भी बने। |
| जगन्नाथ पहाड़िया | प्रथम दलित मुख्यमंत्री | राजस्थान के पहले अनुसूचित जाति (SC) के मुख्यमंत्री। इनके समय में राज्य में पूर्ण नशाबंदी लागू हुई थी। |
| शिवचरण माथुर | दो बार मुख्यमंत्री | इनका जन्म मध्य प्रदेश में हुआ था। इनके समय में प्रसिद्ध डीग गोलीकांड हुआ था। |
| हीरालाल देवपुरा | न्यूनतम कार्यकाल | राजस्थान के इतिहास में सबसे कम समय (मात्र 16 दिन) के लिए मुख्यमंत्री रहने वाले व्यक्ति। |
| अशोक गहलोत | तीन बार मुख्यमंत्री | इन्हें ‘राजस्थान का गांधी’ और ‘जादूगर’ कहा जाता है। जन कल्याणकारी योजनाओं के लिए प्रसिद्ध। |
| वसुंधरा राजे | प्रथम महिला मुख्यमंत्री | राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री। इनके समय में ‘भामाशाह योजना’ जैसी प्रमुख योजनाएं शुरू हुईं। |
| भजनलाल शर्मा | वर्तमान मुख्यमंत्री | सांगानेर विधानसभा से निर्वाचित। 15 दिसंबर 2023 को शपथ ली। |
राजस्थान के मुख्यमंत्री: इतिहास, कार्यकाल
1. हीरालाल शास्त्री (प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री)
- परिचय एवं कार्यकाल: हीरालाल शास्त्री राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री बने। इनका कार्यकाल 7 अप्रैल 1949 से 5 जनवरी 1951 तक रहा। देश की आजादी और रियासतों के एकीकरण के दौर में इन्हें राज्य की कमान सौंपी गई थी।
- महत्वपूर्ण तथ्य: शास्त्री जी का जन्म जोबनेर (जयपुर) में हुआ था। वह एक दूरदर्शी शिक्षाविद् और स्वतंत्रता सेनानी थे।
- विशेष योगदान: इन्होंने टोंक जिले के निवाई में महिलाओं की शिक्षा के लिए ‘जीवन कुटीर’ नामक संस्था की स्थापना की थी, जिसे आज हम विश्वप्रसिद्ध ‘वनस्थली विद्यापीठ’ के नाम से जानते हैं। राजस्थान के प्रशासनिक ढांचे की नींव रखने में इनका अहम योगदान माना जाता है।
2. सी. एस. वेंकटाचारी (मनोनीत – IAS अधिकारी)
- परिचय एवं कार्यकाल: चकरवर्ती श्रीनिवासचारी वेंकटाचारी (C.S. Venkatachari) राजस्थान के दूसरे मुख्यमंत्री थे। इनका कार्यकाल बेहद संक्षिप्त रहा (6 जनवरी 1951 से 25 अप्रैल 1951)।
- महत्वपूर्ण तथ्य: यह केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए गए राजस्थान के एकमात्र आई.सी.एस. (Civil Servant / IAS) अधिकारी थे जो मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे।
- विशेष योगदान: हीरालाल शास्त्री के इस्तीफे के बाद उत्पन्न हुए राजनीतिक गतिरोध को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने इन्हें राजस्थान का मुख्यमंत्री मनोनीत किया था। यह मूल रूप से कर्नाटक (मैसूर) के रहने वाले थे।
3. जयनारायण व्यास (मनोनीत एवं निर्वाचित मुख्यमंत्री)
- परिचय एवं कार्यकाल: जयनारायण व्यास राजस्थान के राजनीतिक इतिहास के एक अनोखे स्तंभ हैं। यह राजस्थान के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो मनोनीत और निर्वाचित दोनों रूपों में पद पर रहे। इनका कुल कार्यकाल 1951 से 1954 के बीच दो चरणों में रहा।
- महत्वपूर्ण तथ्य: इन्हें ‘लोकनायक’, ‘शेर-ए-राजस्थान’, ‘धुन के धनी’ और ‘लक्कड़ और फक्कड़’ जैसे उपनामों से जाना जाता है।
- परीक्षा उपयोगी तथ्य: 1952 के पहले विधानसभा चुनावों में व्यास जी जोधपुर और जालौर की सीटों से चुनाव हार गए थे, जिसके कारण टीकाराम पालीवाल को मुख्यमंत्री बनाया गया। बाद में किशनगढ़ सीट पर हुए उपचुनाव को जीतकर व्यास जी दोबारा मुख्यमंत्री बने।
4. टीकाराम पालीवाल (प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री)
- परिचय एवं कार्यकाल: टीकाराम पालीवाल राजस्थान के प्रथम लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित (Elected) मुख्यमंत्री थे। इनका कार्यकाल 3 मार्च 1952 से 31 अक्टूबर 1952 तक रहा।
- महत्वपूर्ण तथ्य: पालीवाल जी का जन्म मंडावर (दौसा) में हुआ था। प्रथम विधानसभा चुनाव के बाद इन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली थी।
- विशेष रिकॉर्ड: मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद, जब जयनारायण व्यास दोबारा मुख्यमंत्री बने, तो पालीवाल जी को राजस्थान का प्रथम उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) बनाया गया। इस प्रकार वे राज्य के एकमात्र ऐसे नेता हैं जो पहले मुख्यमंत्री रहे और बाद में उपमुख्यमंत्री बने।
5. मोहनलाल सुखाड़िया (आधुनिक राजस्थान के निर्माता)
- परिचय एवं कार्यकाल: मोहनलाल सुखाड़िया का नाम राजस्थान की राजनीति में सर्वाधिक लंबे कार्यकाल के लिए दर्ज है। ये लगातार करीब 17 वर्षों तक (1954 से 1971) राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे।
- महत्वपूर्ण तथ्य: इन्हें ‘आधुनिक राजस्थान का निर्माता’ कहा जाता है। सुखाड़िया जी मात्र 38 वर्ष की आयु में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, जो उस समय एक रिकॉर्ड था।
- ऐतिहासिक घटनाक्रम: इनके कार्यकाल के दौरान ही वर्ष 1967 में राजस्थान में पहली बार राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) लागू हुआ था। इसके अलावा, इन्होंने 1962 में राजस्थान की ‘संभागीय व्यवस्था’ (Divisional System) को समाप्त कर दिया था।
6. बरकतउल्ला खान (कार्यकाल के दौरान निधन)
- परिचय एवं कार्यकाल: बरकतउल्ला खान राजस्थान के प्रथम अल्पसंख्यक (मुस्लिम) मुख्यमंत्री थे। इनका कार्यकाल 9 जुलाई 1971 से 11 अक्टूबर 1973 तक रहा। इन्हें लोग प्यार से ‘प्यारे मियां’ भी कहते थे।
- महत्वपूर्ण तथ्य: यह राजस्थान के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनका पद पर रहते हुए (कार्यकाल के दौरान) निधन हुआ था।
- ऐतिहासिक संदर्भ: वर्ष 1971 में जब प्रसिद्ध भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ और बांग्लादेश का उदय हुआ, उस ऐतिहासिक समय में बरकतउल्ला खान ही राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य का नेतृत्व कर रहे थे।
7. हरिदेव जोशी (तीन बार मुख्यमंत्री)
- परिचय एवं कार्यकाल: हरिदेव जोशी ने तीन अलग-अलग अवधियों (1973–77, 1985–88, और 1989–90) में राजस्थान के मुख्यमंत्री का पद संभाला।
- महत्वपूर्ण तथ्य: जोशी जी के नाम भारतीय राजनीति का एक अनूठा रिकॉर्ड है। वे लगातार 10 बार विधानसभा चुनाव जीते और अपने जीवन में एक भी चुनाव नहीं हारे। वे बांसवाड़ा के खांदू गांव के रहने वाले थे।
- प्रशासनिक बदलाव: मोहनलाल सुखाड़िया द्वारा बंद की गई ‘संभागीय व्यवस्था’ को हरिदेव जोशी ने ही 1987 में दोबारा शुरू (Re-start) किया था। इनके पहले कार्यकाल के दौरान (1977 में) राजस्थान में दूसरी बार राष्ट्रपति शासन लगा था।
8. भैरोंसिंह शेखावत (प्रथम गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री)
- परिचय एवं कार्यकाल: भैरोंसिंह शेखावत राजस्थान के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। इन्होंने जनता पार्टी के नेतृत्व में 1977 में पहली बार सरकार बनाई। वे कुल तीन बार (1977–80, 1990–92, 1993–98) राज्य के मुख्यमंत्री रहे।
- महत्वपूर्ण तथ्य: इन्हें राजस्थान की राजनीति का ‘बाबोसा’ कहा जाता है। शेखावत जी मूल रूप से सीकर के खाचरियावास के रहने वाले थे।
- राष्ट्रीय पहचान: मुख्यमंत्री रहने के बाद वे देश के शीर्ष संवैधानिक पद तक पहुंचे और वर्ष 2002 से 2007 तक भारत के 11वें उपराष्ट्रपति के रूप में सेवाएं दीं। इनके समय में राज्य में दो बार (1980 और 1992) राष्ट्रपति शासन लगा था।
9. जगन्नाथ पहाड़िया (प्रथम दलित मुख्यमंत्री)
- परिचय एवं कार्यकाल: जगन्नाथ पहाड़िया राजस्थान के पहले अनुसूचित जाति (SC) यानी प्रथम दलित मुख्यमंत्री थे। इनका कार्यकाल 6 जून 1980 से 13 जुलाई 1981 तक रहा।
- महत्वपूर्ण तथ्य: पहाड़िया जी के कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इनके समय में पूरे राजस्थान में पूर्ण नशाबंदी (शराबबंदी) लागू की गई थी।
- अन्य पद: वे एक प्रखर राजनेता थे, जिन्होंने बाद में बिहार और हरियाणा के राज्यपाल के रूप में भी कार्य किया।
10. शिवचरण माथुर (दो बार मुख्यमंत्री)
- परिचय एवं कार्यकाल: शिवचरण माथुर दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने (1981–85 और 1988–89)। इनका राजनीतिक जीवन काफी प्रभावी रहा।
- महत्वपूर्ण तथ्य: माथुर जी का जन्म राजस्थान में नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश (गुना) में हुआ था, लेकिन उनकी कर्मभूमि राजस्थान रही।
- चर्चित घटनाक्रम: इनके पहले कार्यकाल के दौरान वर्ष 1985 में भरतपुर के राजा मानसिंह की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी, जिसे इतिहास में ‘प्रसिद्ध डीग गोलीकांड’ कहा जाता है। इस विवाद के कारण भारी राजनीतिक दबाव में शिवचरण माथुर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
11. हीरालाल देवपुरा (न्यूनतम कार्यकाल)
- परिचय एवं कार्यकाल: हीरालाल देवपुरा का नाम राजस्थान की प्रशासनिक हिस्ट्री में एक विशेष रिकॉर्ड के साथ दर्ज है। ये राजस्थान के इतिहास में सबसे कम समय (मात्र 16 दिन) के लिए मुख्यमंत्री रहने वाले व्यक्ति हैं।
- महत्वपूर्ण तथ्य: इनका कार्यकाल 23 फरवरी 1985 से 10 मार्च 1985 तक रहा।
- अन्य पद: देवपुरा जी कुंभलगढ़ विधानसभा क्षेत्र से आते थे। मुख्यमंत्री के अलावा वे राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष (Speaker) और राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष भी रहे।
12. अशोक गहलोत (तीन बार मुख्यमंत्री)
- परिचय एवं कार्यकाल: अशोक गहलोत ने राज्य में तीन बार (1998–2003, 2008–2013, और 2018–2023) पूर्ण कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री का पद संभाला। इनका जन्म जोधपुर में हुआ था।
- महत्वपूर्ण तथ्य: राजनीति में इनकी गहरी सूझबूझ और पकड़ के कारण इन्हें ‘जादूगर’ और सादगीपूर्ण जीवन के कारण ‘राजस्थान का गांधी’ कहा जाता है।
- विशेष योगदान: गहलोत सरकार को मुख्य रूप से उनकी जन कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए जाना जाता है। मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना, निशुल्क जांच योजना और चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी क्रांतिकारी स्कीम्स इनके कार्यकाल की ही देन हैं।
13. वसुंधरा राजे (प्रथम महिला मुख्यमंत्री)
- परिचय एवं कार्यकाल: वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान के इतिहास में प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनीं। इन्होंने दो बार (2003–2008 और 2013–2018) राज्य का नेतृत्व किया। इनका निर्वाचन क्षेत्र झालावाड़ का झालरापाटन है।
- महत्वपूर्ण तथ्य: इनके पहले कार्यकाल (2003) के दौरान भाजपा ने पहली बार राजस्थान विधानसभा में स्पष्ट और पूर्ण बहुमत हासिल किया था।
- विशेष योगदान: महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन के लिए इनके द्वारा शुरू की गई ‘भामाशाह योजना’ देश की सबसे शुरुआती डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं में से एक थी। इसके अलावा ‘जल स्वावलंबन अभियान’ और ‘गौरव पथ’ जैसी योजनाएं भी काफी प्रसिद्ध रहीं।
14. भजनलाल शर्मा (वर्तमान मुख्यमंत्री)
- परिचय एवं कार्यकाल: भजनलाल शर्मा राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 15 दिसंबर 2023 को राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
- महत्वपूर्ण तथ्य: वह जयपुर की सांगानेर विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए और सीधे मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। मूल रूप से वे भरतपुर जिले के रहने वाले हैं।
- संगठनात्मक पृष्ठभूमि: मुख्यमंत्री बनने से पहले भजनलाल शर्मा लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश महासचिव (State General Secretary) के रूप में संगठन में पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहे थे।
