राज्य की अधिकांश नदियाँ मौसमी हैं और इनका प्रवाह पूरी तरह से अरावली पर्वतमाला की बनावट पर निर्भर करता है। अरावली श्रेणी राजस्थान में एक महान जल विभाजक की भूमिका निभाती है, जो राज्य के पानी को दो अलग-अलग दिशाओं में मोड़ देती है। इसी आधार पर राज्य के नदी तंत्र को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्र): वह निश्चित भू-भाग जहाँ से वर्षा का पानी इकट्ठा होकर किसी मुख्य नदी तंत्र में प्रवाहित होता है, उसे उस नदी का ‘जलग्रहण क्षेत्र’ कहते हैं।
अपवाह द्रोणी (River Basin): एक मुख्य नदी और उसकी समस्त छोटी-बड़ी सहायक नदियों द्वारा घेरा गया कुल जल प्रवाह क्षेत्र ‘अपवाह द्रोणी’ कहलाता है।
जल विभाजक रेखा (Water Divide): दो अलग-अलग नदी बेसिन या अपवाह द्रोणियों को आपस में पृथक करने वाली ऊँची भौगोलिक सीमा को जल विभाजक या ‘जल-संभर’ कहा जाता है। विशाल तंत्रों के लिए ‘नदी द्रोणी’ शब्द का प्रयोग होता है, जबकि स्थानीय स्तर पर छोटे नालों के जल क्षेत्र को ‘जल-संभर’ (Watershed) कहते हैं।
राजस्थान का अपवाह तंत्र मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित है
| आंतरिक जल प्रवाह | बंगाल की खाड़ी तंत्र | अरब सागर तंत्र |
|---|---|---|
| 60.00% | 23.00% | 17.00% |
| घग्घर | बनास | माही |
| काँतली | चंबल | लूणी |
| साबी | कालीसिंध | साबरमती |
| रूपारेल | आहू | सोम |
| कांकनेय | पार्वती | जाखम |
| मेन्था (मेंढा) | परवन | जवाई |
| रूपनगढ़ | जोजड़ी | |
| सुकड़ी | ||
| पश्चिमी बनास |
राजस्थान के 5 सबसे महत्वपूर्ण त्रिवेणी संगमों की सूची
| क्र.सं. | त्रिवेणी संगम स्थल (जिला) | शामिल नदियों का नाम | विशेष विवरण एवं परीक्षा उपयोगी धार्मिक महत्व |
|---|---|---|---|
| 1 | बेणेश्वर धाम (नवाटापुरा, डूंगरपुर) | 🔹 सोम 🔹 माही 🔹 जाखम | इसे ‘आदिवासियों का महाकुंभ’ कहा जाता है। भारत का यह एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ खंडित शिवलिंग की पूजा होती है। यहाँ प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा को विशाल मेला भरता है, जिसकी स्थापना संत मावजी ने की थी। |
| 2 | बिगोद (मांडलगढ़, भीलवाड़ा) | 🔹 बनास 🔹 बेड़च 🔹 मैनाल | यह मांडलगढ़ तहसील के पास स्थित एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र तीर्थ स्थल है। पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली बनास नदी का यह पहला प्रमुख त्रिवेणी संगम है। इसके निकट ही प्रसिद्ध मैनाल जलप्रपात स्थित है। |
| 3 | रामेश्वरम घाट (खंडार, सवाई माधोपुर) | 🔹 बनास 🔹 चंबल 🔹 सीप | इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से ‘मीणा जाति का प्रयागराज’ भी कहा जाता है। यह खंडार क्षेत्र में चंबल और बनास के मिलन का एक बेहद भव्य और धार्मिक स्थल है, जहाँ कार्तिक पूर्णिमा को मेला भरता है। |
| 4 | राजमहल (देवली, टोंक) | 🔹 बनास 🔹 डाई 🔹 खारी | यह देवली (टोंक) के ऐतिहासिक क्षेत्र के पास स्थित है। इस त्रिवेणी संगम के बिल्कुल निकट ही राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना बीसलपुर बाँध निर्मित की गई है, जो जयपुर-अजमेर की लाइफलाइन है। |
| 5 | देवधाम जोधपुरिया (निवाई, टोंक) | 🔹 बनास 🔹 बांडी 🔹 मानसी | यह पवित्र स्थल भगवान श्री देवनारायण जी (गुर्जर समाज के आराध्य देव) के ऐतिहासिक मंदिर के लिए पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है। यह स्थल सभी भक्तों की गहरी आस्था और सामाजिक सद्भाव का एक प्रमुख केंद्र है। |
राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक दुर्ग एवं संबंधित नदियाँ व संगम स्थल
| क्र.सं. | ऐतिहासिक दुर्ग / किला | संबंधित नदियाँ / संगम स्थल | जिला |
|---|---|---|---|
| 1 | गागरोन का किला | 🔹 कालीसिंध + 🔹 आहू नदी के संगम पर | झालावाड़ |
| 2 | भैंसरोडगढ़ दुर्ग | 🔹 चम्बल + 🔹 बामणी नदी के संगम पर | चित्तौड़गढ़ |
| 3 | शेरगढ़ (कोशवर्द्धन) दुर्ग | 🔹 परवन नदी के किनारे | बारां |
| 4 | चित्तौड़गढ़ दुर्ग | 🔹 गम्भीरी + 🔹 बेड़च नदियों के संगम के निकट | चित्तौड़गढ़ |
| 5 | मनोहरथाना दुर्ग | 🔹 परवन + 🔹 कालीखाड़ नदियों के संगम पर | झालावाड़ |
| 6 | गढ़ पैलेस (कोटा दुर्ग) | 🔹 चम्बल नदी के पूर्वी किनारे पर | कोटा |
राजस्थान के प्रमुख बाँध एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
| बाँध का नाम | नदी | स्थान (जिला) | विशेष विवरण (उपयोगिता और खासियत) |
|---|---|---|---|
| बीसलपुर बाँध | बनास | टोंक | यह राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है, जो जयपुर, अजमेर और टोंक को पानी देता है। |
| राणा प्रताप सागर | चंबल | रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) | भराव क्षमता की दृष्टि से यह राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है। यहाँ परमाणु बिजलीघर भी है। |
| माहि बजाज सागर | माही | बांसवाड़ा | यह राजस्थान का सबसे लंबा बाँध (3109 मीटर) है। यह आदिवासी क्षेत्र की जीवनरेखा है। |
| जाखम बाँध | जाखम | प्रतापगढ़ | यह राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध (81 मीटर) है, जो सीतामाता अभयारण्य के पास स्थित है। |
| जवाई बाँध | जवाई | पाली | इसे ‘मारवाड़ का अमृत सरोवर’ कहा जाता है। यह पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है। |
| पाँचना बाँध | पाँच नदियाँ* | करौली | यह मिट्टी से बना राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है। (भद्रावती, बरखेड़ा, अटा, माची और भैंसावट नदियाँ)। |
| कोटा बैराज | चंबल | कोटा | इस बाँध का उपयोग केवल सिंचाई के लिए किया जाता है, बिजली उत्पादन के लिए नहीं। |
| गांधी सागर | चंबल | मंदसौर (म.प्र.) | चंबल परियोजना का सबसे बड़ा और पहला बाँध है, जो राजस्थान की सीमा के पास स्थित है। |
| जवाहर सागर | चंबल | कोटा-बूंदी | इसे ‘पिकअप बाँध’ भी कहा जाता है, यहाँ पनबिजली (Hydro Power) का उत्पादन होता है। |
| मेजा बाँध | कोठारी | भीलवाड़ा | इस बाँध की पाल पर ‘ग्रीन माउंट’ नामक बगीचा विकसित किया गया है। |
| मोतीझील बाँध | रूपारेल | भरतपुर | इसे ‘भरतपुर की जीवनरेखा’ (Lifeline) कहा जाता है। इसे नील-हरित शैवाल के लिए जाना जाता है। |
| नारायण सागर | खारी | अजमेर | इसे ‘अजमेर जिले का समुद्र’ कहा जाता है। |
| मातृकुण्डिया | बनास | चित्तौड़गढ़ | इसे ‘राजस्थान का हरिद्वार’ भी कहा जाता है, यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल भी है। |
| ईसरदा बाँध | बनास | टोंक/स. माधोपुर | यह बाँध बनास नदी के अतिरिक्त जल को रोकने और पेयजल आपूर्ति के लिए बनाया गया है। |
| तोरड़ी सागर | सहोदरा | टोंक | इसकी खासियत यह है कि इसके सभी गेट खोलने पर बाँध में एक बूंद पानी भी नहीं बचता। |
| बंद बरेठा | कुकुंद | भरतपुर | यह वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में स्थित है और इसकी बनावट एक जहाज जैसी दिखती है। |
| मोरेल बाँध | मोरेल | दौसा | यह दौसा और सवाई माधोपुर की सीमा पर सिंचाई का मुख्य स्रोत है। |
| भीम सागर | उजाड़ | झालावाड़ | यह झालावाड़ जिले की एक प्रमुख सिंचाई परियोजना है। |
| अदवाणा बाँध | मानसी | भीलवाड़ा | यह मानसी नदी पर बना है और स्थानीय कृषि के लिए बहुत उपयोगी है। |
| ओराई बाँध | ओराई | चित्तौड़गढ़ | यह चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण सिंचाई बाँध है। |
| हरिश्चंद्र सागर | कालीसिंध | झालावाड़ | यह कालीसिंध नदी पर स्थित एक प्रमुख बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना है। |
| लालपुर बाँध | बाणगंगा | भरतपुर | यह बाणगंगा नदी के जल को नियंत्रित कर भरतपुर के मैदानी भागों में सिंचाई में मदद करता है। |
