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राजस्थान के प्रमुख महिला व्यक्तित्व

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राजस्थान के प्रमुख महिला व्यक्तित्व : Quick Revision Notes

नामसंबंधित क्षेत्र / परिवारविशेष योगदान एवं परीक्षा उपयोगी तथ्य
अंजना देवी चौधरीसिरोही / रामनारायण चौधरी की पत्नीस्वतंत्रता आंदोलन में गिरफ्तार होने वाली प्रथम राजस्थानी महिला। इन्होंने बिजौलिया और बेगू किसान आंदोलनों में महिलाओं का नेतृत्व किया।
काली बाईरास्तापाल (डूंगरपुर)रास्तापाल कांड’ (1947) की नायिका। अपने गुरु नानाभाई खांट और सेंगाभाई को बचाने के लिए 13 वर्ष की उम्र में शहीद हुई भील बालिका। इन्हें ‘साक्षरता की देवी’ माना जाता है।
किशोरी देवीसीकर (कटराथल)कटराथल सम्मेलन (25 अप्रैल 1934): सिहोट के ठाकुर द्वारा महिलाओं के साथ किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में 10,000 महिलाओं के विशाल सम्मेलन का नेतृत्व किया।
नारायणी देवी वर्मामाणिक्य लाल वर्मा की पत्नीइन्होंने 1944 में भीलवाड़ा में ‘महिला आश्रम’ की स्थापना की। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इन्हें अपने 6 माह के पुत्र के साथ जेल जाना पड़ा था।
जानकी देवी बजाजजमनालाल बजाज की पत्नी1956 में पद्म विभूषण से सम्मानित होने वाली राजस्थान की प्रथम महिला। इन्होंने विनोबा भावे के ‘भूदान आंदोलन’ में सक्रिय भूमिका निभाई।
रत्ना शास्त्रीहीरालाल शास्त्री की पत्नीवनस्थली विद्यापीठ की सह-संस्थापिका। महिला शिक्षा और महिला अधिकारों के लिए इन्हें ‘पद्म श्री’ और ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया।
शांता त्रिवेदीउदयपुर1947 में उदयपुर में ‘राजस्थान महिला परिषद’ की स्थापना की। इन्होंने महिलाओं को जागरूक करने और कुरीतियों के विरुद्ध लड़ने के लिए जीवन समर्पित किया।
रमा देवीजयपुर (देशपांडे परिवार)बिजौलिया किसान आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका। इन्होंने जेल में रहने के दौरान भी महिलाओं को चरखा चलाने और खादी पहनने के लिए प्रेरित किया।
नगीन बालाकोटाराजस्थान की प्रथम महिला जिला प्रमुख (कोटा)। इन्होंने हाड़ौती क्षेत्र में महिला शिक्षा और किसानों के उत्थान के लिए कार्य किया।
इन्दूमती गोयनकाजोधपुर (मारवाड़)मारवाड़ प्रजामंडल के दौरान खादी प्रचार और जनजागृति में सक्रिय। इन्हें जोधपुर में विदेशी कपड़ों की होली जलाने के कारण गिरफ्तार किया गया था।
मंजू राजपालप्रशासनिक सेवाआधुनिक समाज सुधार के क्षेत्र में चर्चित। इन्हें ‘आदिवासियों की बाईसा’ कहा जाता है क्योंकि इन्होंने डूंगरपुर और अन्य जिलों में विकास के अभूतपूर्व कार्य किए।

राजस्थान के प्रमुख महिला व्यक्तित्व : In Details

1. अंजना देवी चौधरी (सिरोही / रामनारायण चौधरी की पत्नी)

  • संबंधित क्षेत्र / परिवार: इनका जन्म सिरोही के एक मध्यमवर्गीय अग्रवाल परिवार में हुआ था। इनका विवाह प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी रामनारायण चौधरी से हुआ था।
  • महत्वपूर्ण योगदान व ऐतिहासिक कार्य:
    • अंजना देवी चौधरी राजस्थान के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गिरफ्तार होने वाली प्रथम महिला थीं। इन्हें 1921-24 के दौरान मेवाड़ और बूंदी राज्यों में किसान आंदोलनों के दौरान गिरफ्तार किया गया था।
    • इन्होंने अपने पति के साथ मिलकर बिजौलिया और बेगू किसान आंदोलनों में महिलाओं का नेतृत्व किया और सामंती दमन के खिलाफ आवाज उठाई।
    • गांधी जी के आह्वान पर इन्होंने पर्दा प्रथा का त्याग किया और दलितोंद्धार व हरिजन सेवा के कार्यों में जीवन लगा दिया।
    • इन्होंने अजमेर और वर्धा में रहते हुए नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

2. काली बाई (रास्तापाल, डूंगरपुर)

  • संबंधित क्षेत्र / परिवार: डूंगरपुर रियासत के रास्तापाल गांव की एक वीर भील बालिका (छात्रा)।
  • महत्वपूर्ण योगदान व ऐतिहासिक कार्य:
    • काली बाई को राजस्थान के इतिहास में ‘साक्षरता की देवी’ और गुरुभक्ति की अनूठी मिसाल माना जाता है।
    • जून 1947 में रास्तापाल गांव में प्रजामंडल के कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित पाठशाला को बंद करने के लिए रियासती पुलिस और अंग्रेज पहुंचे थे।
    • जब पुलिस अधिकारी पाठशाला के अध्यापक ‘सेंगाभाई’ को गाड़ी के पीछे रस्सी से बांधकर घसीट रहे थे, तब 13 वर्षीय इस वीर भील बालिका ने अपनी जान की परवाह न करते हुए हंसिए (दातली) से वह रस्सी काट दी।
    • क्रूर पुलिसकर्मियों ने इस पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं, जिससे 19 जून 1947 को यह नन्ही बालिका शहीद हो गई। रास्तापाल में इनकी स्मृति में एक भव्य स्मारक और प्रतिमा स्थापित है।

3. किशोरी देवी (सीकर, कटराथल)

  • संबंधित क्षेत्र / परिवार: सीकर (शेखावाटी क्षेत्र) के प्रसिद्ध किसान नेता हरलाल सिंह खर्रा की धर्मपत्नी।
  • महत्वपूर्ण योगदान व ऐतिहासिक कार्य:
    • शेखावाटी के सीहोट के ठाकुर मानसिंह द्वारा सोतिया का बास नामक गांव में महिला उत्पीड़न की घटना के विरोध में किशोरी देवी ने एक विशाल आंदोलन का बिगुल फूंका था।
    • इनके नेतृत्व में 25 अप्रैल 1934 को सीकर के ‘कटराथल’ नामक स्थान पर एक ऐतिहासिक विशाल महिला सम्मेलन आयोजित हुआ।
    • इस सम्मेलन में शेखावाटी की लगभग 10,000 जाट महिलाओं ने भाग लिया था, जो उस दौर में महिला अधिकारों और सामंतशाही के खिलाफ देश का सबसे बड़ा महिला एकत्रीकरण था।
    • इन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से महिलाओं में चेतना जगाई और जागीरदारों के अत्याचारों का पुरजोर विरोध किया।

4. नारायणी देवी वर्मा (माणिक्य लाल वर्मा की पत्नी)

  • संबंधित क्षेत्र / परिवार: मेवाड़ प्रजामंडल के संस्थापक और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक्य लाल वर्मा की धर्मपत्नी।
  • महत्वपूर्ण योगदान व ऐतिहासिक कार्य:
    • नारायणी देवी वर्मा ने स्वतंत्रता आंदोलन और मेवाड़ प्रजामंडल के रचनात्मक कार्यों में कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया।
    • साल 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान इन्हें अपने 6 महीने के दूधमुंहे बच्चे (दीनबंधु) के साथ जेल की अमानवीय यातनाएं सहनी पड़ी थीं।
    • इन्होंने आदिवासियों और भील समाज की महिलाओं में शिक्षा की अलख जगाने के लिए साल 1944 में भीलवाड़ा में ‘महिला आश्रम’ की स्थापना की।
    • देश की आजादी के बाद ये साल 1970 से 1976 तक राजस्थान से राज्यसभा की सदस्य भी रहीं।

5. जानकी देवी बजाज (जमनालाल बजाज की पत्नी)

  • संबंधित क्षेत्र / परिवार: मध्य प्रदेश के जावरा में जन्मी जानकी देवी का विवाह प्रसिद्ध उद्योगपति और गांधी जी के पांचवें पुत्र जमनालाल बजाज से हुआ था। वर्धा और सीकर इनका मुख्य कार्यक्षेत्र रहा।
  • महत्वपूर्ण योगदान व ऐतिहासिक कार्य:
    • जानकी देवी बजाज एक कट्टर गांधीवादी महिला थीं। इन्होंने अपने घर से पर्दा प्रथा को पूरी तरह समाप्त किया और समाज में इसके खिलाफ आंदोलन चलाया।
    • 1942 में अपने पति जमनालाल बजाज के निधन के बाद इन्हें ‘गोसेवा संघ’ का अध्यक्ष बनाया गया।
    • इन्होंने आचार्य विनोबा भावे के ‘भूदान आंदोलन’ में सक्रिय भूमिका निभाई और इस दौरान लगभग 108 कुओं का निर्माण करवाया।
    • खादी के प्रचार-प्रसार और कताई-बुनाई को बढ़ावा देने के लिए इन्होंने देशव्यापी दौरे किए। भारत सरकार ने इनके सामाजिक योगदान के लिए इन्हें साल 1956 में ‘पद्म विभूषण’ (देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) से नवाजा, यह सम्मान पाने वाली वे राजस्थान की पहली महिला थीं।

6. रत्ना शास्त्री (हीरालाल शास्त्री की पत्नी)

  • संबंधित क्षेत्र / परिवार: मध्य प्रदेश के खाचरौद में जन्मी रत्ना देवी का विवाह राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित हीरालाल शास्त्री से हुआ था।
  • महत्वपूर्ण योगदान व ऐतिहासिक कार्य:
    • रत्ना शास्त्री ने अपनी पुत्री ‘शान्ता’ की असामयिक मृत्यु के बाद, ग्रामीण लड़कियों की शिक्षा के लिए अपने पति के साथ मिलकर टोंक के वनस्थली गांव में काम शुरू किया।
    • इन्होंने साल 1935 में ‘जीवन कुटीर’ की स्थापना में सहयोग किया, जो बाद में देश का विख्यात महिला विश्वविद्यालय ‘वनस्थली विद्यापीठ’ बना।
    • 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भूमिगत हुए क्रांतिकारियों की सहायता और उनके परिवारों की देखभाल करने में रत्ना शास्त्री अग्रिम पंक्ति में रहीं।
    • महिला शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए इन्हें ‘पद्म श्री’ (1955) और ‘पद्म भूषण’ (1975) जैसे नागरिक सम्मानों से विभूषित किया गया।

7. शांता त्रिवेदी (उदयपुर)

  • संबंधित क्षेत्र / परिवार: इनका मूल जन्म नागपुर (महाराष्ट्र) में हुआ था, लेकिन विवाह के बाद उदयपुर इनकी मुख्य कर्मभूमि बनी।
  • महत्वपूर्ण योगदान व ऐतिहासिक कार्य:
    • शांता त्रिवेदी मेवाड़ क्षेत्र में महिला चेतना और राजनीतिक जागृति लाने वाली प्रमुख नेत्री थीं।
    • इन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, शिक्षा देने और उनमें देशप्रेम की भावना जगाने के लिए साल 1947 में उदयपुर में ‘राजस्थान महिला परिषद’ की स्थापना की थी।
    • इस परिषद के माध्यम से उन्होंने सामंती दौर में पिछड़ी और पीड़ित महिलाओं को कानूनी और सामाजिक सहायता प्रदान की।
    • इन्होंने प्रजामंडल आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई और लोक कलाओं के संरक्षण में भी योगदान दिया।

8. रमा देवी (जयपुर / देशपांडे परिवार)

  • संबंधित क्षेत्र / परिवार: जयपुर के एक पारंपरिक देशपांडे परिवार में जन्मी रमा देवी का बाल विवाह हुआ था, लेकिन वैधव्य के बाद इन्होंने समाज की परवाह न करते हुए लादूराम जोशी (क्रांतिकारी) से पुनर्विवाह किया।
  • महत्वपूर्ण योगदान व ऐतिहासिक कार्य:
    • रमा देवी ने पर्दा प्रथा का विरोध किया और खादी पहनना शुरू कर देश सेवा का मार्ग चुना।
    • इन्होंने साल 1930 और 1932 के ‘सवेनय अवज्ञा आंदोलन’ में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसके कारण इन्हें जेल जाना पड़ा।
    • बिजौलिया किसान आंदोलन के समय जब किसानों पर भयंकर अत्याचार हो रहे थे, तब रमा देवी 1931 में वहाँ पहुंचीं। अंग्रेजों ने इन्हें वहाँ से निष्कासित कर दिया, लेकिन ये बार-बार गिरफ्तारी की परवाह किए बिना बिजौलिया जाती रहीं।
    • एक बार जब अंग्रेज पुलिसकर्मी ने इन पर बंदूक तानी, तो इन्होंने निर्भीकता से कहा: “गोली मार दो, हमारा काम तो देश के लिए मरना ही है।”

9. नगीन बाला (कोटा)

  • संबंधित क्षेत्र / परिवार: कोटा के प्रसिद्ध क्रांतिकारी परिवार (हरि कुमार सुखाड़िया की पुत्री) से संबंधित।
  • महत्वपूर्ण योगदान व ऐतिहासिक कार्य:
    • नगीन बाला स्वतंत्रता के बाद देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने वाली अग्रणी महिला थीं।
    • ये साल 1960 में कोटा की जिला प्रमुख चुनी गईं और इस प्रकार वे भारत की प्रथम महिला जिला प्रमुख बनीं।
    • इन्होंने हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूंदी, बारां) में महिलाओं के कल्याण, साक्षरता और सामाजिक कुप्रथाओं (जैसे बाल विवाह, दहेज प्रथा) के खिलाफ लगातार काम किया।
    • ये दो बार कोटा क्षेत्र से राजस्थान विधानसभा की सदस्य (विधायक) भी निर्वाचित हुईं और पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

10. इन्दूमती गोयनका (जोधपुर / मारवाड़)

  • संबंधित क्षेत्र / परिवार: मारवाड़ (जोधपुर) के एक संभ्रांत गोयनका परिवार से संबंधित।
  • महत्वपूर्ण योगदान व ऐतिहासिक कार्य:
    • इन्दूमती गोयनका मारवाड़ क्षेत्र की उन चुनिंदा महिलाओं में से थीं जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ खुलकर बगावत की थी।
    • इन्होंने महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन से प्रेरित होकर विदेशी कपड़ों की होली जलाई और जोधपुर के बाजारों में शराब व विदेशी वस्तुओं की दुकानों पर धरने (पिकेटिंग) दिए।
    • 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब मारवाड़ लोक परिषद के बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, तब इन्दूमती गोयनका ने स्थानीय स्तर पर महिलाओं और युवाओं की टोलियां बनाकर जुलूस निकाले और ब्रिटिश शासन को चुनौती दी।

11. मंजू राजपाल (प्रशासनिक सेवा)

  • संबंधित क्षेत्र / परिवार: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से संबंधित, राजस्थान कैडर की वरिष्ठ अधिकारी।
  • महत्वपूर्ण योगदान व वर्तमान कार्य:
    • मंजू राजपाल राजस्थान की एक बेहद कड़क, ईमानदार और विख्यात महिला प्रशासनिक अधिकारी हैं।
    • अपने कार्यकाल के दौरान इन्होंने राज्य के ग्रामीण विकास, पंचायती राज, और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्रों में क्रांतिकारी प्रशासनिक सुधार किए हैं।
    • डूंगरपुर और अन्य आदिवासी बहुल जिलों में कलेक्टर रहते हुए इन्होंने सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कई इनोवेटिव कदम उठाए।
    • इन्हें राजस्थान के आधुनिक प्रशासनिक ढांचे में महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल माना जाता है।
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