राजस्थान की आंतरिक प्रवाह वाली नदियाँ : Quick Revision Notes
| नदी का नाम | उद्गम स्थल | विशेष विवरण |
|---|---|---|
| घग्घर | शिवालिक की पहाड़ियाँ (हिमाचल प्रदेश) | इसे ‘मृत नदी’ (Dead River), ‘नट नदी’ और प्राचीन ‘सरस्वती’ कहते हैं। इसके बहाव क्षेत्र को ‘नाली’ कहा जाता है। |
| काँतली | खंडेला की पहाड़ियाँ (सीकर) | यह पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली आंतरिक प्रवाह की सबसे लंबी लगभग (104 किमी) नदी है। इसके किनारे गणेश्वर सभ्यता विकसित हुई। |
| साबी | सेवर की पहाड़ियाँ (जयपुर) | यह नदी अलवर जिले की सबसे बड़ी नदी है। यह हरियाणा के गुरुग्राम (गुड़गांव) के मैदानों में जाकर विलीन हो जाती है। |
| रूपारेल | उदयनाथ की पहाड़ियाँ (अलवर) | इसे ‘वराह नदी’ या ‘लसवारी नदी’ भी कहते हैं। भरतपुर की मोतीझील को इसी नदी से पानी मिलता है। |
| कांकनेय | कोटरी गाँव (जैसलमेर) | इसे ‘मसूरदी’ नदी भी कहते हैं। यह आंतरिक प्रवाह की सबसे छोटी नदी (17 किमी) है और ‘बुझ झील’ का निर्माण करती है। |
| मेन्था (मेंढा) | मनोहरपुरा (जयपुर) | यह नदी उत्तर दिशा से आकर सांभर झील में गिरती है। यह जैन तीर्थ ‘लूणवा’ के पास से गुजरती है। |
| रूपनगढ़ | सलेमाबाद (अजमेर) | यह नदी अजमेर के सलेमाबाद (निम्बार्क सम्प्रदाय की पीठ) से होकर सांभर झील में दक्षिण दिशा से गिरती है। |
राजस्थान की आंतरिक प्रवाह वाली नदियाँ : In Details
राजस्थान के कुल अपवाह तंत्र का सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 60%) आंतरिक जल प्रवाह की नदियों के अंतर्गत आता है। ये वे नदियाँ हैं जो अपना जल किसी समुद्र या खाड़ी तक नहीं ले जा पातीं, बल्कि धरातल या रेगिस्तान में ही विलीन हो जाती हैं।
1. घग्घर नदी
- प्रमुख उपनाम: प्राचीन सरस्वती, दृषद्वती, मृत नदी (Dead River), सोतर नदी और नट नदी।
- उद्गम (Origin): हिमाचल प्रदेश में कालका के पास शिवालिक की पहाड़ियों से।
- राजस्थान में प्रवेश: हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी नामक स्थान पर प्रवेश करती है और सामान्यतः भटनेर दुर्ग के पास जाकर समाप्त हो जाती है।
- बाढ़ की स्थिति : अत्यधिक वर्षा होने पर यह नदी श्रीगंगानगर जिले में आगे बढ़ती है और अंत में पाकिस्तान के बहावलपुर जिले के फोर्ट अब्बास तक चली जाती है।
- हकरा : पाकिस्तान में इस नदी के बहाव क्षेत्र को ‘हकरा’ (फारसी शब्द) कहा जाता है। पाकिस्तान में इसके रेगिस्तानी क्षेत्र को चोलिस्तान कहते हैं।
- भौगोलिक तथ्य:
- इसकी कुल लंबाई 465 किलोमीटर है। यह राजस्थान की आंतरिक प्रवाह की सबसे लंबी नदी है।
- इसे राजस्थान की एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय नदी का दर्जा प्राप्त है।
- स्थानीय भाषा में इसके पाट (बहाव क्षेत्र) को ‘नाली’ कहा जाता है। इसके कारण हनुमानगढ़ को ‘राजस्थान का धान का कटोरा’ भी कहते हैं।
- इसकी कुल लंबाई 465 किलोमीटर है। यह राजस्थान की आंतरिक प्रवाह की सबसे लंबी नदी है।
- किनारे स्थित प्रमुख स्थल:
- हरियाणा में: बनवाली सभ्यता और ओटू झील (Otu Lake) इसी पर स्थित हैं।
- राजस्थान में: तलवाड़ा झील (राज्य की सबसे नीची झील), भटनेर दुर्ग, और विश्व प्रसिद्ध कालीबंगा व रंगमहल सभ्यता इसके किनारे विकसित हुईं।
- हरियाणा में: बनवाली सभ्यता और ओटू झील (Otu Lake) इसी पर स्थित हैं।
2. कांतली नदी
- उद्गम (Origin): सीकर जिले की खंडेला की पहाड़ियों से।
- बहाव क्षेत्र (Torawati) : सीकर और झुंझुनूं जिलों में इसका प्रवाह क्षेत्र ‘तोरावटी’ कहलाता है। यह झुंझुनूं को दो बराबर भागों में विभाजित करती है और झुंझुनूं-चुरू की सीमा पर जाकर लुप्त हो जाती है।
- लंबाई: कुल लंबाई लगभग 100 किलोमीटर है। यह पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली आंतरिक प्रवाह की सबसे लंबी नदी है।
- ऐतिहासिक सभ्यताएं :
- गणेश्वर सभ्यता: इस नदी के तट पर लगभग 5000 वर्ष पुरानी ताम्रयुगीन ‘गणेश्वर सभ्यता’ का विकास हुआ, जहाँ से मछली पकड़ने के 400 तांबे के कांटे प्राप्त हुए हैं।
- सुनारी सभ्यता: इसके दाईं ओर सुनारी सभ्यता के अवशेष स्थित हैं, जहाँ प्राचीन भारत में लोहे गलाने की भट्टियाँ मिली थीं।
- गणेश्वर सभ्यता: इस नदी के तट पर लगभग 5000 वर्ष पुरानी ताम्रयुगीन ‘गणेश्वर सभ्यता’ का विकास हुआ, जहाँ से मछली पकड़ने के 400 तांबे के कांटे प्राप्त हुए हैं।
3. साबी नदी
- उद्गम (Origin): वर्तमान कोटपुतली-बहरोड़ जिले में स्थित सेवर की पहाड़ियों से।
- बहाव क्षेत्र: यह कोटपुतली-बहरोड़ से उत्तर-पूर्व की ओर बहते हुए खैरथल-तिजारा जिले में (मुंडावर के पास) प्रवेश करती है और आगे हरियाणा के गुरुग्राम जिले में नजफगढ़ के समीप पटौदी में जाकर समाप्त हो जाती है।
- विशेषता: मानसून के समय यह नदी अपनी विनाश लीला (बाढ़) के लिए प्रसिद्ध थी। इतिहास के अनुसार मुगल बादशाह अकबर ने इस पर कई बार पुल बनाने का प्रयास किया था, लेकिन वे हर बार असफल रहे। यह कोटपुतली-बहरोड़ क्षेत्र की सबसे बड़ी नदी है।
- प्रमुख बांध व सभ्यता:
- हरियाणा में इस नदी पर मसानी बैराज (Masani Barrage) बना हुआ है।
- इसके तट पर प्रसिद्ध जोधपुरा सभ्यता (कोटपुतली क्षेत्र) स्थित है, जहाँ 1972-75 में उत्खनन के दौरान प्राचीन अवशेष मिले थे।
- हरियाणा में इस नदी पर मसानी बैराज (Masani Barrage) बना हुआ है।
4. काकनेय या मसूरदी नदी
- उद्गम (Origin): जैसलमेर जिले के कोटड़ी गाँव से।
- उपनाम: इसे स्थानीय भाषा में ‘मसूरदी नदी’ भी कहा जाता है।
- विशेषता: यह आंतरिक जल प्रवाह की सबसे छोटी नदी (मात्र 17 किमी) है। यह नदी उत्तर-पश्चिम में बहती हुई जैसलमेर की प्रसिद्ध ‘बुझ झील’ का निर्माण करती है। अत्यधिक वर्षा होने पर इसका पानी मीठा खाड़ी तक चला जाता है।
5. रूपारेल नदी
- उद्गम (Origin): अलवर जिले की थानागाजी तहसील में स्थित उदयनाथ की पहाड़ी से।
- उपनाम: इसे वराह नदी या लसवारी नदी के नाम से भी जाना जाता है।
- समाप्ति: यह भरतपुर से होते हुए डीग जिले के मैदानी भागों में जाकर विलिन हो जाती है।
6. मैन्था नदी (मेंढा नदी)
- उद्गम (Origin): यह नदी जयपुर जिले के मनोहरथाना की पहाड़ियों से निकलती है।
- प्रवाह एवं विलीन: यह नदी उत्तर दिशा से बहती हुई सांभर झील के उत्तर में जाकर विलीन हो जाती है।
- विशेष परीक्षा तथ्य : सांभर झील में सर्वाधिक लवण (नमक) की मात्रा बहाकर लाने वाली यह मुख्य नदी है। इसके किनारे जैनियों का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ‘लूणवा’ (नागौर) स्थित है।
7. रूपनगढ़ नदी
- उद्गम (Origin) : यह नदी अजमेर जिले के सलेमाबाद (किशनगढ़ के पास) से निकलती है।
- प्रवाह एवं विलीन : उत्तर की ओर बहते हुए यह नदी सांभर झील के दक्षिण में जाकर विलीन (समाप्त) हो जाती है।
- सांस्कृतिक महत्व : इस नदी के किनारे निम्बार्क सम्प्रदाय की मुख्य पीठ (सलेमाबाद) स्थित है, जिसकी स्थापना परशुराम देवाचार्य ने की थी। परीक्षाओं में यह सवाल बार-बार पूछा जाता है।
