राजस्थान की प्रमुख खारे पानी की झीलें : Quick Revision Notes
| खारे पानी की झील | जिला/स्थान | विवरण/विशेषता (विशेष जानकारी) |
|---|---|---|
| सांभर | जयपुर | भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय नमक झील और एक प्रसिद्ध रामसर साइट है। |
| पचपदरा | बाड़मेर (बालोतरा) | यहाँ का नमक सबसे उत्तम श्रेणी का (98% NaCl) होता है। खारवाल जाति के लोग इसे मोरली झाड़ी से तैयार करते हैं। |
| डीडवाना | नागौर | यहाँ के नमक में सोडियम सल्फेट अधिक होता है, इसलिए इसका उपयोग खाने के बजाय उद्योगों (चमड़ा, कागज) में होता है। |
| लूणकरणसर | बीकानेर | इसे राजस्थान का ‘राजकोट’ भी कहा जाता है, यह उत्तरी राजस्थान की एकमात्र प्रमुख खारी झील है। |
| फलोदी | जोधपुर | यह स्थान अपने शुष्क वातावरण और नमक उत्पादन के छोटे केंद्रों के लिए जाना जाता है। |
| तालछापर | चूरू | यह झील चूरू में स्थित है और इसके पास ही प्रसिद्ध काले हिरणों का अभयारण्य है। |
| कावोद | जैसलमेर | जैसलमेर की यह झील आयोडीन की दृष्टि से काफी अच्छी मानी जाती है। |
| पोकरण | जैसलमेर | यहाँ वर्षा जल के सूखने के बाद नमक की परतें बन जाती हैं, जो स्थानीय स्तर पर उपयोग होती हैं। |
| नावां | नागौर | यहाँ भारत का मॉडल साल्ट फार्म विकसित किया गया है और यह नमक मंडी के लिए प्रसिद्ध है। |
| कुचामन | नागौर | यहाँ के पानी में खारापन बहुत अधिक है और स्थानीय स्तर पर नमक बनाया जाता है। |
| डेगाना | नागौर | यह क्षेत्र खनिज संसाधनों और खारे पानी की छोटी झीलों के लिए जाना जाता है। |
| रेवासा | सीकर | इस झील का वर्णन प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है; यह कछोर झील के पास ही स्थित है। |
| कछोर | सीकर | शेखावाटी क्षेत्र की यह झील छोटे स्तर पर नमक उत्पादन के लिए जानी जाती है। |
| पीतमपुरी | सीकर | यह सीकर जिले की एक छोटी खारी झील है जो मानसून के दौरान भरती है। |
| बाप | जोधपुर | यहाँ चट्टानी नमक के भंडार मिलने की संभावना जताई जाती है। |
राजस्थान की प्रमुख मीठे पानी की झीले : Quick Revision Notes
| मीठे पानी की झील | जिला/स्थान | विशेष विवरण (Important Facts) |
| जयसमंद | सलूम्बर | इसे ‘ढेबर झील’ भी कहते हैं। यह राजस्थान की सबसे बड़ी कृत्रिम (Man-made) मीठे पानी की झील है। |
| राजसमंद | राजसमंद | इसके उत्तरी भाग को ‘नौ चौकी’ कहा जाता है, जहाँ 25 शिलालेखों पर मेवाड़ का इतिहास (राज प्रशस्ति) खुदा हुआ है। |
| पिछोला | उदयपुर | इसका निर्माण एक बंजारे ने करवाया था। इसमें जग निवास (Lake Palace) और जग मंदिर जैसे प्रसिद्ध महल स्थित हैं। |
| फतेहसागर | उदयपुर | इसे ‘कनॉट बांध’ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ सौर वेधशाला और नेहरू उद्यान स्थित हैं। |
| उदयसागर | उदयपुर | महाराणा उदयसिंह द्वारा निर्मित इस झील में आयड़ नदी का पानी आता है और निकलने के बाद वह बेड़च कहलाती है। |
| आनासागर | अजमेर | पृथ्वीराज चौहान के दादा अर्णोराज (आनाजी) ने इसका निर्माण करवाया था। यहाँ जहांगीर ने ‘दौलत बाग’ बनवाया था। |
| फॉय सागर | अजमेर | जिसे अब वरुण सागर के नाम से भी जाना जाता है यह एक अकाल राहत परियोजना के तहत अंग्रेज इंजीनियर ‘फॉय’ के निर्देशन में बनाई गई थी। |
| पुष्कर | अजमेर | इसे ‘तीर्थों का मामा’ और ‘सबसे पवित्र झील’ माना जाता है। यहाँ ब्रह्मा जी का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है। |
| नक्की | सिरोही (माउंट आबू) | यह राजस्थान की सबसे ऊँची झील है। लोककथाओं के अनुसार इसे देवताओं ने अपने नाखूनों से खोदा था। |
| सिलीसेढ़ | अलवर | इसे ‘राजस्थान का नंदनकानन’ कहा जाता है। महाराजा विनय सिंह ने इसे अपनी रानी हेतु बनवाया था। |
| कोलायत | बीकानेर | यहाँ महर्षि कपिल मुनि का आश्रम है और कार्तिक पूर्णिमा को यहाँ विशाल मेला लगता है। |
| बालसमंद | जोधपुर | यह एक कृत्रिम झील है जिसे 1159 में मंडोर के शासक द्वारा बनवाया गया था, जो अब एक पर्यटन स्थल है। |
| कायलाना | जोधपुर | यह झील जोधपुर शहर को पेयजल आपूर्ति करती है और इसके पास माचिया सफारी पार्क स्थित है। |
राजस्थान की प्रमुख खारे पानी की झीलें : In Details
1. सांभर झील
- स्थान व जिला: जयपुर ग्रामीण, दूदू और डीडवाना-कुचामन जिलों की सीमाओं पर स्थित (मुख्य प्रशासनिक केंद्र जयपुर ग्रामीण)।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- यह भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय (Inland) नमक झील है।
- भारत के कुल नमक उत्पादन का लगभग 8.7% अकेले इसी झील से प्राप्त होता है।
- इसे वर्ष 1990 में अंतर्राष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट (Ramsar Wetland Site) घोषित किया गया था।
- यहाँ सर्दियों में बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी ‘राजहंस’ (Flamingo) और ‘कुरंजा’ आते हैं। यहाँ केंद्र सरकार का ‘सांभर साल्ट्स लिमिटेड’ उपक्रम कार्यरत है।
2. पचपदरा झील
- स्थान व जिला: बालोतरा जिला (पूर्व में यह बाड़मेर जिले के अंतर्गत आती थी)।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- इस झील का नमक खाने की दृष्टि से सर्वोत्तम श्रेणी का माना जाता है, क्योंकि इसमें सोडियम क्लोराइड (NaCl) की मात्रा 98% तक होती है।
- यहाँ सदियों से खारवाल जाति के लोग पारंपरिक रूप से ‘मोरली झाड़ी’ की टहनियों का उपयोग करके नमक के स्फटिक (क्रिस्टल) बनाते हैं।
- इस झील के पास ही वर्तमान में राजस्थान की अत्याधुनिक ऑयल रिफाइनरी भी स्थित है।
3. डीडवाना झील
- स्थान व जिला: डीडवाना-कुचामन जिला (पूर्व में नागौर जिला)।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- इस झील के पानी में सोडियम क्लोराइड के स्थान पर सोडियम सल्फेट की मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है, जिसके कारण यह नमक खाने योग्य नहीं होता।
- इस नमक का उपयोग मुख्य रूप से औद्योगिक कार्यों जैसे चमड़ा साफ करने, रंगाई-छपाई और कागज उद्योग में किया जाता है।
- यहाँ राज्य सरकार का ‘राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स’ के दो कारखाने स्थापित हैं।
4. लूणकरणसर झील
- स्थान व जिला: बीकानेर जिला।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- यह उत्तरी राजस्थान की एकमात्र प्रमुख खारे पानी की झील है, जहाँ बहुत ही कम मात्रा में नमक का उत्पादन होता है।
- मूंगफली के प्रचुर उत्पादन के कारण लूणकरणसर कस्बे को राजस्थान का ‘राजकोट’ भी कहा जाता है।
5. फलोदी झील
- स्थान व जिला: फलोदी जिला (पूर्व में जोधपुर जिला)।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- अत्यधिक शुष्क जलवायु वाले इस क्षेत्र में स्थित झील के आसपास नमक उत्पादन के कई छोटे-छोटे निजी केंद्र (साल्ट पैन) सक्रिय हैं।
- यह क्षेत्र अपनी भीषण गर्मी और शुष्क वातावरण के लिए जाना जाता है।
6. तालछापर झील
- स्थान व जिला: सुजानगढ़ तहसील, चूरू जिला।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- यह एक छोटी खारी झील है, जिसके ठीक समीप प्रसिद्ध ‘तालछापर कृष्ण मृग अभ्यारण्य’ (Black Buck Sanctuary) स्थित है।
- यह अभ्यारण्य काले हिरणों और ‘मोथिया’ घास के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
7. कावोद झील
- स्थान व जिला: जैसलमेर जिला।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- थार के मरुस्थल के बीच स्थित इस झील का नमक स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसमें आयोडीन की मात्रा प्राकृतिक रूप से काफी उच्च होती है।
8. पोकरण झील
- स्थान व जिला: जैसलमेर जिला।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- यह एक ‘प्लाया झील’ या ‘रन’ का उदाहरण है। मानसून के दौरान यहाँ पानी जमा होता है और पानी के सूखने के बाद सतह पर नमक की प्राकृतिक परतें जम जाती हैं।
- यहाँ का नमक स्थानीय ग्रामीण स्तर पर ही मुख्य रूप से उपयोग में लिया जाता है।
9. नावां झील
- स्थान व जिला: डीडवाना-कुचामन जिला (पूर्व में नागौर जिला)।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- यहाँ भारत सरकार और राज्य सरकार के सहयोग से एक अत्याधुनिक ‘मॉडल साल्ट फार्म’ (Model Salt Farm) विकसित किया गया है ताकि वैज्ञानिक पद्धति से नमक बनाया जा सके।
- नावां कस्बा राजस्थान में नमक के व्यापार और नमक मंडी के रूप में बेहद प्रसिद्ध है।
10. कुचामन झील
- स्थान व जिला: डीडवाना-कुचामन जिला (पूर्व में नागौर जिला)।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- इस झील के पानी में अत्यधिक खारापन (TDS) है। यहाँ स्थानीय स्तर पर निजी उत्पादकों द्वारा नमक तैयार किया जाता है।
11. डेगाना झील
- स्थान व जिला: नागौर जिला।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- डेगाना क्षेत्र मुख्य रूप से टंगस्टन खनिज (रेवत की पहाड़ी) के लिए जाना जाता है, लेकिन यहाँ खारे पानी का एक छोटा गर्त/झील भी स्थित है जहाँ मौसमी नमक की परतें बनती हैं।
12. रेवासा झील
- स्थान व जिला: सीकर जिला।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- इस झील का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है; इसका उल्लेख कई प्राचीन पौराणिक ग्रंथों और कर्नल जेम्स टॉड की किताबों में भी मिलता है। यह कछोर झील के बिल्कुल समीप है।
13. कछोर झील
- स्थान व जिला: सीकर जिला।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- शेखावाटी अंचल की यह एक मौसमी खारी झील है। यहाँ ग्रीष्म ऋतु में पानी सूखने पर स्थानीय लोग बहुत ही सीमित पैमाने पर नमक इकट्ठा करते हैं।
14. पीतमपुरी झील
- स्थान व जिला: नीम का थाना जिला (पूर्व में सीकर जिला)।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- यह एक छोटी गर्त नुमा खारी झील है, जो केवल मानसून की अच्छी बारिश के दौरान ही पानी से भरती है। सूखे के दिनों में यह पूरी तरह मैदानी भाग जैसी दिखने लगती है।
15. बाप झील
- स्थान व जिला: फलोदी जिला (पूर्व में जोधपुर जिला)।
- विशेषताएं व मुख्य फैक्ट्स:
- इस झील और इसके आस-पास के रन क्षेत्र में भूगर्भीय सर्वे के अनुसार चट्टानी नमक (Rock Salt/Saindhav Namak) और पोटाश के गहरे भंडार मिलने की भारी संभावनाएं जताई गई हैं।
राजस्थान की प्रमुख मीठे पानी की झीले : In Details
1. जयसमंद झील
- स्थान व जिला: सलूम्बर जिला
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इसका निर्माण मेवाड़ के महाराजा जयसिंह ने 1685 से 1691 के बीच गोमती नदी पर बांध बनाकर करवाया था।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- इसे प्राचीन काल में ‘ढेबर झील’ के नाम से जाना जाता था।
- यह राजस्थान की सबसे बड़ी और भारत की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम (Man-made) मीठे पानी की झील है।
- इस झील में छोटे-बड़े कुल 7 टापू हैं। सबसे बड़े टापू का नाम ‘बाबा का भकड़ा’ और सबसे छोटे टापू का नाम ‘प्यारी’ है।
- इन टापुओं पर भील और मीणा जनजाति के लोग निवास करते हैं। इस झील से सिंचाई के लिए ‘श्यामपुरा’ और ‘भाट’ नामक दो नहरें निकाली गई हैं।
2. राजसमंद झील
- स्थान व जिला: राजसमंद जिला (कांकरोली)।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इसका निर्माण महाराजा राजसिंह ने 1662 में अकाल राहत कार्य के तहत गोमती नदी के पानी को रोककर करवाया था।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- इस झील के उत्तरी भाग को ‘नौ चौकी’ कहा जाता है, जहाँ संगमरमर के 25 काले शिलालेखों पर मेवाड़ का पूरा इतिहास संस्कृत भाषा में उत्कीर्ण है।
- इसे ‘राजप्रशस्ति’ कहा जाता है, जो विश्व का सबसे बड़ा शिलालेख है। इसके रचयिता रणछोड़ भट्ट तैलंग थे।
- इस झील के किनारे प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर और घेवर माता का मंदिर स्थित है।
3. पिछोला झील
- स्थान व जिला: उदयपुर जिला।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इस खूबसूरत झील का निर्माण 14वीं शताब्दी में राणा लाखा के शासनकाल में एक पिच्छू नामक बंजारे ने अपने बैल की स्मृति में करवाया था। बाद में उदयसिंह ने इसका विस्तार किया।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- इस झील के बीचों-बीच दो प्रसिद्ध महल स्थित हैं – जग निवास (जो अब एक हेरिटेज होटल है) और जग मंदिर।
- जग मंदिर वह ऐतिहासिक स्थान है जहाँ शाहजहाँ (खुर्रम) ने अपने पिता जहांगीर के खिलाफ विद्रोह के दौरान शरण ली थी।
- इस झील के किनारे मेवाड़ राजपरिवार का भव्य ‘सिटी पैलेस’ (राजमहल) और ‘नटनी का चबूतरा’ बना हुआ है। इसमें सीसारमा और बुझड़ा नदियां आकर गिरती हैं।
4. फतेहसागर झील
- स्थान व जिला: उदयपुर जिला।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मूल रूप से इसका निर्माण 1678 में महाराजा जयसिंह ने करवाया था, लेकिन भारी वर्षा से नष्ट होने के बाद महाराजा फतेहसिंह ने इसका पुनर्निर्माण करवाया।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- इसकी आधारशिला ‘ड्यूक ऑफ कनॉट’ द्वारा रखी गई थी, इसलिए इसे ‘कनॉट बांध’ भी कहा जाता है।
- यह झील एक संकरी नहर द्वारा पिछोला झील से जुड़ी हुई है।
- झील के बीच में नेहरू उद्यान और भारत की पहली सौर वेधशाल स्थापित है। यहाँ बेल्जियम के सहयोग से ‘टेलीस्कोप’ भी लगाया गया है।
5. उदयसागर झील
- स्थान व जिला: उदयपुर जिला।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इसका निर्माण मेवाड़ के संस्थापक महाराणा उदयसिंह (महाराणा प्रताप के पिता) ने 1559 से 1565 के बीच करवाया था।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- भौगोलिक दृष्टि से यह झील बेहद महत्वपूर्ण है। उदयपुर शहर से निकलने वाली आयड़ नदी इस झील में गिरती है।
- इस झील से निकलने के बाद ही इस नदी का नाम बदलकर ‘बेड़च नदी’ हो जाता है।
6. आनासागर झील
- स्थान व जिला: अजमेर जिला।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इस झील का निर्माण 1137 ईस्वी में पृथ्वीराज चौहान के दादा अर्णोराज चौहान (आनाजी) ने तुर्कों के आक्रमण के बाद रक्तापात से अशुद्ध हुई धरती को साफ करने के लिए करवाया था।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- यह दो पहाड़ियों (नाग पहाड़ और तारागढ़) के बीच स्थित एक सुरम्य झील है।
- इसके किनारे मुगल सम्राट जहांगीर ने ‘दौलत बाग’ (वर्तमान नाम: सुभाष उद्यान) बनवाया था, जहाँ नूरजहाँ की माँ अस्मत बेगम ने गुलाब से इत्र बनाने की विधि खोजी थी।
- शाहजहाँ ने यहाँ संगमरमर की 5 खूबसूरत बैठने की चौकियां, जिन्हें ‘बारादरी’ कहा जाता है, का निर्माण करवाया था।
7. फॉय सागर झील / वरुण सागर
- स्थान व जिला: अजमेर जिला।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इसका निर्माण 1891-92 में अजमेर में पड़े भीषण अकाल के समय राहत परियोजना के तहत एक अंग्रेज इंजीनियर मिस्टर फॉय के निर्देशन में बांडी नदी पर बांध बनाकर किया गया था।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- हाल ही में इसका नाम बदलकर ‘वरुण सागर’ भी चर्चा में रहा है।
- इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यदि इस झील में पानी का स्तर क्षमता से अधिक हो जाता है, तो इसका अतिरिक्त पानी स्वतः ही बहकर आनासागर झील में चला जाता है।
8. पुष्कर झील
- स्थान व जिला: अजमेर जिला।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: प्राकृतिक रूप से निर्मित यह झील ज्वालामुखी क्रेटर का हिस्सा मानी जाती है, जबकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसका निर्माण भगवान ब्रह्मा के हाथ से गिरे कमल की पंखुड़ियों से हुआ था।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- इसे ‘तीर्थों का मामा’, ‘पंचम तीर्थ’, ‘कोंकण तीर्थ’ और राजस्थान की सबसे पवित्र व प्राचीन प्राकृतिक झील माना जाता है।
- इसके चारों ओर 52 घाट बने हुए हैं, जिनमें ‘गौ घाट’ और ‘गांधी घाट’ (जहाँ महात्मा गांधी की अस्थियां विसर्जित की गई थीं) प्रमुख हैं।
- यहाँ विश्व का एकमात्र ऐसा ब्रह्मा जी का मंदिर है जहाँ विधिवत पूजा होती है। कार्तिक पूर्णिमा को यहाँ राजस्थान का सबसे रंगीन और प्रसिद्ध ‘पुष्कर मेला’ भरता है।
9. नक्की झील
- स्थान व जिला: माउंट आबू, सिरोही जिला।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भूवैज्ञानिकों के अनुसार यह एक विवर्तनिक (Tectonic) या क्रेटर झील है, लेकिन लोककथाओं के अनुसार देवताओं ने अपने नाखूनों से खोदकर इसे रातों-रात तैयार किया था।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- यह राजस्थान की सबसे ऊँची (समुद्र तल से लगभग 1200 मीटर) और सबसे गहरी मीठे पानी की प्राकृतिक झील है।
- सर्दियों के मौसम में अक्सर इस झील का पानी जम जाता है।
- इस झील के किनारे अजीब आकृतियों वाली चट्टानें हैं, जैसे ‘टॉड रॉक’ (मेंढक जैसी चट्टान), ‘नन रॉक’ (घूंघट निकाले महिला जैसी) और ‘हॉर्न रॉक’। यह गरासिया जनजाति का पवित्र स्थल है।
10. सिलीसेढ़ झील
- स्थान व जिला: अलवर जिला।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इसका निर्माण 1845 में अलवर के महाराजा विनय सिंह ने अपनी रानी ‘शीला’ के लिए करवाया था।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- अपनी असीम प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के कारण इसे “राजस्थान का नंदनकानन” कहा जाता है।
- अरावली की पहाड़ियों से घिरी इस झील के किनारे महाराजा विनय सिंह द्वारा निर्मित एक शाही महल है, जो वर्तमान में आरटीडीसी (RTDC) द्वारा एक हेरिटेज होटल के रूप में संचालित किया जा रहा है।
11. कोलायत झील
- स्थान व जिला: बीकानेर जिला।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: यह थार के रेगिस्तान के बीच एक सुंदर मरुद्यान की तरह स्थित एक प्राकृतिक झील है।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- इस झील के किनारे सांख्य दर्शन के प्रणेता महर्षि कपिल मुनि का प्राचीन आश्रम स्थित है।
- प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को यहाँ एक बहुत बड़ा मेला लगता है, जिसमें दीपदान करने की प्राचीन परंपरा है।
- चारण जाति के लोग इस झील के पवित्र पानी में स्नान नहीं करते हैं (धार्मिक मान्यताओं के कारण)।
12. बालसमंद झील
- स्थान व जिला: जोधपुर जिला (मंडोर मार्ग)।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इस कृत्रिम झील का निर्माण 1159 ईस्वी में मंडोर के परिहार (प्रतिहार) शासक बालक राव ने करवाया था।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- यह झील जोधपुर के शुष्क क्षेत्र में पानी की कमी को दूर करने के लिए बनाई गई थी।
- इसके किनारे जोधपुर के महाराजा सूरसिंह द्वारा निर्मित अष्टकोणीय ग्रीष्मकालीन महल और लाल पत्थरों का एक भव्य बगीचा है, जो अब पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।
13. कायलाना झील
- स्थान व जिला: जोधपुर जिला।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: यह एक प्राकृतिक गर्त था, जिसे आधुनिक रूप देकर 1872 में सर प्रताप सिंह (जोधपुर के प्रधानमंत्री) ने एक विशाल कृत्रिम झील के रूप में विकसित करवाया था।
- महत्वपूर्ण तथ्य व विशेषताएं:
- यह झील संपूर्ण जोधपुर शहर को मुख्य रूप से पेयजल की आपूर्ति करती है।
- वर्तमान में इस झील को ‘इन्दिरा गांधी नहर परियोजना’ (IGNP) की ‘राजीव गांधी लिफ्ट नहर’ से जोड़कर हमेशा पानी से लबालब रखा जाता है।
- इस झील के बिल्कुल नजदीक ही ‘माचिया सफारी पार्क’ स्थित है, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए प्रसिद्ध है।
