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राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलन (Rajasthan Ke Prajamandal Andolan)

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Rajasthan Ke Prajamandal Andolan

1. जयपुर प्रजामंडल (स्थापना: 1931)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इसकी प्रारंभिक स्थापना कपूरचंद पाटनी और जमनालाल बजाज द्वारा की गई थी। यह राजस्थान का सर्वप्रथम प्रजामंडल था।
  • पुनर्गठन (1936): शुरुआत में यह सक्रिय नहीं रहा। वर्ष 1936 में जमनालाल बजाज और हीरालाल शास्त्री के प्रयासों से इसका पुनर्गठन हुआ। इसके बाद चिरंजीलाल मिश्र को प्रजामंडल का अध्यक्ष बनाया गया।
  • जेंटलमैन एग्रीमेंट (1942): प्रजामंडल के अध्यक्ष हीरालाल शास्त्री और जयपुर के दीवान सर मिर्जा इस्माइल के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिसे ‘जेंटलमैन एग्रीमेंट’ कहते हैं। इसके तहत तय हुआ कि जयपुर प्रजामंडल ब्रिटिश विरोधी ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग नहीं लेगा।
  • आजाद मोर्चा का गठन: जेंटलमैन एग्रीमेंट के विरोध में बाबा हरिश्चंद्र, रामकरण जोशी और दौलतमल भंडारी ने प्रजामंडल से अलग होकर ‘आजाद मोर्चे’ का गठन किया और जयपुर में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का संचालन किया।

2. बूंदी प्रजामंडल (स्थापना: 1931)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इसकी स्थापना कांतिलाल चौथानी द्वारा की गई थी। हाड़ौती और बूंदी क्षेत्र में जन जागृति का मुख्य श्रेय पंडित नयनूराम शर्मा को भी जाता है।
  • बूंदी राज्य लोक परिषद (1944): प्रजामंडल की शिथिलता को देखते हुए वर्ष 1944 में ऋषिदत्त मेहता द्वारा ‘बूंदी राज्य लोक परिषद’ की स्थापना की गई।
  • समाचार पत्र: ऋषिदत्त मेहता ने बूंदी में राष्ट्रीय चेतना के प्रसार के लिए अजमेर से ‘राजस्थान’ नामक एक प्रसिद्ध साप्ताहिक समाचार पत्र निकाला था।

3. मारवाड़ प्रजामंडल (स्थापना: 1934)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: जोधपुर (मारवाड़) में राजनीतिक चेतना के जनक जयनारायण व्यास (शेर-ए-राजस्थान) थे। इनके प्रयासों से 1934 में मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना हुई और इसके प्रथम अध्यक्ष भँवरलाल सर्राफ बने।
  • पूर्व की संस्थाएं: मारवाड़ में जनजागृति के लिए इस प्रजामंडल से पूर्व ‘मरुधर हितकारिणी सभा’ (1915), ‘मारवाड़ सेवा संघ’ (1920) और ‘मारवाड़ यूथ लीग’ (1931) जैसी संस्थाएं काम कर रही थीं।
  • प्रमुख दमनकारी घटनाएं: मारवाड़ रियासत में जागीरदारों के अत्याचारों के विरोध में चंडावल दुखांतिका (1942) और डाबड़ा कांड (13 मार्च 1947) जैसी भीषण घटनाएं हुईं, जिनमें कई किसान और स्वतंत्रता सेनानी शहीद हुए।

4. हाड़ौती प्रजामंडल (स्थापना: 1934)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: हाड़ौती क्षेत्र (कोटा-बूंदी) में बेगार प्रथा और सामंती शोषण के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का श्रेय पंडित नयनूराम शर्मा को जाता है। उन्होंने वर्ष 1934 में हाड़ौती प्रजामंडल की नींव रखी।
  • कोटा प्रजामंडल: हाड़ौती प्रजामंडल के निष्क्रिय होने के बाद पंडित नयनूराम शर्मा ने ही वर्ष 1939 में अभिन्न हरि के साथ मिलकर ‘कोटा प्रजामंडल’ की स्थापना की थी।

5. धौलपुर प्रजामंडल (स्थापना: 1936)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इसकी स्थापना कृष्णदत्त पालीवाल, मूलचंद और ज्वालाप्रसाद जिज्ञासु के प्रयासों से हुई।
  • तसीमो कांड (11 अप्रैल 1947): धौलपुर रियासत के इतिहास में यह घटना सबसे महत्वपूर्ण है। तसीमो गाँव में एक सभा के दौरान तिरंगे झंडे का अपमान होने से बचाने के लिए ठाकुर छत्तर सिंह और पंचम सिंह पुलिस की गोलियों का सामना करते हुए शहीद हो गए थे।

6. बीकानेर प्रजामंडल (स्थापना: 1936)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इस प्रजामंडल की स्थापना वैद्य मघाराम और लक्ष्मण दास स्वामी द्वारा की गई थी।
  • स्थापना केंद्र (कलकत्ता): बीकानेर के महाराजा गंगासिंह के कड़े प्रतिबंधों और दमनकारी नीतियों के कारण इस प्रजामंडल की स्थापना बीकानेर में न होकर राजस्थान से बाहर कलकत्ता (कोलकाता) में की गई थी। इसे बीकानेर में ‘आजादी के आंदोलन का जनक’ माना जाता है।
  • कांगड़ कांड (1946): बीकानेर रियासत के कांगड़ गाँव में अकाल के समय किसानों से जबरन कर वसूली की गई, जिसके विरोध में किसानों पर अमानवीय अत्याचार हुए।

7. शाहपुरा प्रजामंडल (स्थापना: 1938)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: माणिक्यलाल वर्मा की प्रेरणा से रमेशचंद्र ओझा और लादूराम व्यास ने शाहपुरा प्रजामंडल की स्थापना की।
  • पूर्ण उत्तरदायी शासन: शाहपुरा के तत्कालीन राजा सुदर्शन देव प्रजामंडल की मांगों के समर्थक थे। उन्होंने भारत की सभी रियासतों में से सबसे पहले शाहपुरा में पूर्ण उत्तरदायी शासन की स्थापना कर सत्ता जनता के प्रतिनिधियों को सौंप दी थी।

8. मेवाड़ प्रजामंडल (स्थापना: 1938)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इसकी स्थापना 24 अप्रैल 1938 को माणिक्यलाल वर्मा के प्रयासों से हुई। इसके प्रथम अध्यक्ष बलवंत सिंह मेहता (जिनके घर पर इसकी स्थापना बैठक हुई थी) और उपाध्यक्ष भूरिलाल बया बनाए गए।
  • प्रतिबंध और साहित्य: मेवाड़ सरकार ने स्थापना के तुरंत बाद प्रजामंडल को गैर-कानूनी घोषित कर दिया। इसके बाद माणिक्यलाल वर्मा ने अजमेर को अपना केंद्र बनाया और मेवाड़ सरकार की पोल खोलने के लिए ‘मेवाड़ का वर्तमान शासन’ नामक एक प्रसिद्ध पुस्तिका लिखी।

9. अलवर प्रजामंडल (स्थापना: 1938)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इसकी स्थापना पंडित हरिनारायण शर्मा और कुंजबिहारी लाल मोदी ने की थी।
  • सामाजिक सुधार: पंडित हरिनारायण शर्मा ने अलवर रियासत में शिक्षा के प्रसार और अछूतोद्धार के लिए ‘अस्पृश्यता निवारण संघ’ और ‘वाल्मीकि संघ’ जैसी संस्थाएं भी चलाई थीं।

10. भरतपुर प्रजामंडल (स्थापना: 1938)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इसकी स्थापना किशनलाल जोशी के विशेष प्रयासों से हुई थी। इसके प्रथम अध्यक्ष गोपीलाल यादव और कोषाध्यक्ष मास्टर आदित्येंद्र बने।
  • स्थापना केंद्र (रेवाड़ी): भरतपुर महाराजा की दमनकारी नीतियों के कारण इसकी स्थापना राजपूताना की सीमा से बाहर रेवाड़ी (हरियाणा) में की गई थी।

11. करौली प्रजामंडल (स्थापना: 1938)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: करौली में राजनीतिक चेतना जगाने का श्रेय त्रिलोकचंद माथुर को जाता है। उन्होंने चिरंजीलाल शर्मा और मदन सिंह के साथ मिलकर 1938 में इस प्रजामंडल की स्थापना की।

12. सिरोही प्रजामंडल (स्थापना: 1939)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: सिरोही प्रजामंडल की वास्तविक स्थापना गोकुलभाई भट्ट द्वारा की गई थी। गोकुलभाई भट्ट को उनके महान योगदान के कारण “राजस्थान का गांधी” कहा जाता है।
  • प्रारंभिक प्रयास: सिरोही के कुछ प्रवासियों ने सबसे पहले वर्ष 1934 में बम्बई (मुंबई) में सिरोही प्रजामंडल की स्थापना की थी, जिसे बाद में 1939 में सिरोही में व्यवस्थित रूप दिया गया।

13. किशनगढ़ प्रजामंडल (स्थापना: 1939)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इसकी स्थापना कांतिलाल चौथानी और जमाल शाह द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य रियासत में उत्तरदायी शासन की मांग करना था।

14. कुशलगढ़ प्रजामंडल (स्थापना: 1942)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इसकी स्थापना भँवरलाल निगम और सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी व कवि कन्हैयालाल सेठिया (मशहूर रचना ‘पीथल और पाथल’ के लेखक) द्वारा की गई थी। भँवरलाल निगम इसके अध्यक्ष बने थे।

15. बांसवाड़ा प्रजामंडल (स्थापना: 1943)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इसकी स्थापना भूपेन्द्रनाथ त्रिवेदी, धूलजी भाई भावसार और मणिशंकर नागर के प्रयासों से हुई।
  • राष्ट्रवादी संपादन: भूपेन्द्रनाथ त्रिवेदी ने प्रजामंडल के विचारों को फैलाने के लिए बम्बई से ‘संग्राम’ नामक एक प्रसिद्ध साप्ताहिक समाचार पत्र का संपादन और प्रकाशन किया था।

16. डूंगरपुर प्रजामंडल (स्थापना: 1944)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इसकी स्थापना भोगीलाल पंड्या द्वारा की गई थी। भोगीलाल पंड्या को आदिवासियों और पिछड़ों के कल्याण कार्यों के लिए “वागड़ का गांधी” कहा जाता है। इस आंदोलन से हरिदेव जोशी भी गहराई से जुड़े थे।
  • रास्तापाल कांड (19 जून 1947): डूंगरपुर रियासत के रास्तापाल गाँव में पुलिस द्वारा प्रजामंडल के विद्यालय को बंद करवाने और गुरु शेंगाभाई को क्रूरता से घसीटने के विरोध में 13 वर्षीय भील बालिका कालीबाई ने अपनी दरांती से रस्सी काट दी। पुलिस की अंधाधुंध फायरिंग में वीर बालिका कालीबाई शहीद हो गई।

17. प्रतापगढ़ प्रजामंडल (स्थापना: 1945)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इसकी स्थापना चुन्नीलाल प्रभाकर और अमृतलाल पायक के प्रयासों से की गई थी। इन्होंने क्षेत्र में हरिजनों के उत्थान और शिक्षा के प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाई।

18. जैसलमेर प्रजामंडल (स्थापना: 1945)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: जैसलमेर में राजशाही के भयंकर दमन के कारण स्वतंत्रता सेनानी मीठालाल व्यास ने इस प्रजामंडल की स्थापना जैसलमेर से बाहर जोधपुर में की थी।
  • सागरमल गोपा की शहादत (3 अप्रैल 1946): जैसलमेर के महान क्रांतिकारी सागरमल गोपा ने ‘जैसलमेर का गुंडाराज’ और ‘आजादी के दीवाने’ पुस्तकें लिखकर वहाँ के राजा जवाहर सिंह के अत्याचारों का कड़ा विरोध किया था। इसके कारण उन्हें जेल में बंद कर अमानवीय यातनाएं दी गईं और 3 अप्रैल 1946 को जिंदा जला दिया गया।

19. झालावाड़ प्रजामंडल (स्थापना: 1946)

  • संस्थापक एवं नेतृत्व: इसकी स्थापना मांगीलाल भव्य (अध्यक्ष) और कन्हैयालाल मित्तल द्वारा की गई थी।
  • अंतिम प्रजामंडल: यह राजस्थान का सबसे अंतिम प्रजामंडल था। यहाँ के शासक राजा हरिश्चंद्र ने दमन करने के बजाय स्वयं आगे बढ़कर उत्तरदायी शासन की स्थापना में प्रजामंडल का पूर्ण सहयोग दिया था।

Quick Revision Summary

प्रजामंडल का नामस्थापना वर्षमुख्य संस्थापक / नेतृत्वविशेष परीक्षा उपयोगी प्रामाणिक तथ्य
जयपुर1931कपूरचंद पाटनी / जमनालाल बजाजप्रथम प्रजामंडल, 1942 में जेंटलमैन एग्रीमेंट हुआ, ‘आजाद मोर्चा’ गठित।
बूंदी1931कांतिलाल चौथानीऋषिदत्त मेहता द्वारा 1944 में ‘बूंदी राज्य लोक परिषद’ की स्थापना।
मारवाड़1934जयनारायण व्यासभँवरलाल सर्राफ प्रथम अध्यक्ष, चंडावल (1942) व डाबड़ा कांड (1947) संबंधित।
हाड़ौती1934पं. नयनूराम शर्मापंडित नयनूराम शर्मा ने बाद में 1939 में ‘कोटा प्रजामंडल’ की स्थापना की।
धौलपुर1936कृष्णदत्त पालीवाल / ज्वालाप्रसाद11 अप्रैल 1947 को ‘तसीमो कांड’ हुआ (छत्तर सिंह व पंचम सिंह शहीद)।
बीकानेर1936वैद्य मघाराम / लक्ष्मण दासस्थापना कलकत्ता में हुई, कांगड़ कांड (1946) इसी रियासत से संबंधित है।
शाहपुरा1938रमेशचंद्र ओझा / लादूराम व्यासराजा सुदर्शन देव द्वारा राजस्थान में सर्वप्रथम पूर्ण उत्तरदायी शासन की स्थापना।
मेवाड़1938माणिक्यलाल वर्माबलवंत सिंह मेहता प्रथम अध्यक्ष, वर्मा जी ने ‘मेवाड़ का वर्तमान शासन’ लिखा।
अलवर1938हरिनारायण शर्मा / कुंजबिहारी लालपंडित हरिनारायण शर्मा ने अस्पृश्यता निवारण हेतु विशेष कार्य किए।
भरतपुर1938किशनलाल जोशी / गोपीलाल यादवस्थापना रेवाड़ी (हरियाणा) में हुई, गोपीलाल यादव इसके प्रथम अध्यक्ष बने।
करौली1938त्रिलोकचंद माथुरकरौली में जनचेतना का मुख्य श्रेय त्रिलोकचंद माथुर को जाता है।
सिरोही1939गोकुलभाई भट्टगोकुलभाई भट्ट को “राजस्थान का गांधी” कहा जाता है, स्थापना बम्बई/सिरोही।
किशनगढ़1939कांतिलाल चौथानी / जमाल शाहकिशनगढ़ रियासत में राजनीतिक चेतना का प्रसार किया।
कुशलगढ़1942भँवरलाल निगम / कन्हैयालाल सेठियासुप्रसिद्ध कवि कन्हैयालाल सेठिया (रचना: पीथल और पाथल) इसके सह-संस्थापक थे।
बांसवाड़ा1943भूपेन्द्रनाथ त्रिवेदीभूपेन्द्रनाथ त्रिवेदी ने बम्बई से ‘संग्राम’ नामक साप्ताहिक पत्र निकाला था।
डूंगरपुर1944भोगीलाल पंड्याभोगीलाल पंड्या को “वागड़ का गांधी” कहते हैं, 1947 में ‘रास्तापाल कांड’ (कालीबाई शहीद)।
प्रतापगढ़1945चुन्नीलाल प्रभाकर / अमृतलाल पायकशिक्षा प्रसार और सामाजिक कुप्रथाओं के उन्मूलन पर विशेष बल दिया।
जैसलमेर1945मीठालाल व्यासस्थापना जोधपुर में हुई, सागरमल गोपा को 1946 में जेल में जिंदा जलाया गया।
झालावाड़1946मांगीलाल भव्य / कन्हैयालाल मित्तलराजस्थान का सबसे अंतिम प्रजामंडल, राजा हरिश्चंद्र का पूर्ण सहयोग मिला।
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