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राजस्थान की प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ

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राजस्थान की प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ : Quick Revision Notes

सभ्यतास्थान (जिला)नदीउत्खननकर्ता/खोजकर्ताप्रमुख अवशेष एवं विशेषता (क्या-क्या मिला)
बैराठजयपुरबाणगंगादयाराम साहनी (1936), नील रत्न बनर्जीयहाँ मौरयकालीन अवशेष, अशोक का ‘भाब्रू शिलालेख’ और बौद्ध मठ मिले हैं। इसे ‘विराट नगर’ भी कहते थे।
कालीबंगाहनुमानगढ़घग्घरअमलानंद घोष (खोज), बी.बी. लाल व बी.के. थापरयहाँ जुते हुए खेत के साक्ष्य, अग्नि वेदिकाएँ और ऊँट की अस्थियाँ मिली हैं। यह हड़प्पा कालीन सभ्यता है।
आहड़उदयपुरबेड़च (आयड़)अक्षय कीर्ति व्यास, आर.सी. अग्रवाल, एच.डी. सांकलियाइसे ‘ताम्रवती नगरी’ कहते हैं। यहाँ ताँबा गलाने की भट्टियाँ और ‘उल्टे सीधे’ मृदभांड (Gore & Kot) मिले हैं।
गणेश्वरसीकरकाँतलीरत्न चन्द्र (आर.सी.) अग्रवालइसे ‘ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी’ कहा जाता है। यहाँ ताँबे के मछली पकड़ने के काँटे और तीर मिले हैं।
बागोरभीलवाड़ाकोठारीवी.एन. मिश्रा (वीरेन्द्र नाथ मिश्रा)यहाँ भारत के सबसे प्राचीन पशुपालन के साक्ष्य मिले हैं। इसे ‘आदिम संस्कृति का संग्रहालय’ भी कहते हैं।
बालाथलउदयपुरबनासवी.एन. मिश्रा (1993)यहाँ 11 कमरों वाला विशाल भवन और बुना हुआ कपड़ा मिला है। यह आहड़ सभ्यता से संबंधित है।
गिलुण्डराजसमंदबनासबी.बी. लाल, वसंत शिंदेयहाँ पकी हुई ईंटों के साक्ष्य मिले हैं, जो आहड़ संस्कृति का ही एक प्रमुख केंद्र था।
रंगमहलहनुमानगढ़घग्घरडॉ. हन्ना रिड (स्वीडिश दल)यहाँ कुषाण कालीन और पूर्व-गुप्त कालीन अवशेष मिले हैं। यहाँ ‘गांधार शैली’ की मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं।
नोहभरतपुररूपारेलआर.सी. अग्रवालयहाँ जख बाबा (यक्ष) की विशाल मूर्ति और पाँच संस्कृतियों के अवशेष (लोह युग से कुषाण तक) मिले हैं।
जोधपुराजयपुरसाबीआर.सी. अग्रवाल, विजय कुमारयहाँ लोहा गलाने की भट्टियाँ मिली हैं। (नोट: नाम जोधपुरा है पर स्थान जयपुर है)।
सुनारीझुंझुनूकाँतलीराजस्थान पुरातत्व विभागयहाँ भी प्राचीनतम लोहा गलाने की भट्टियाँ और लोहे के तीर व भाले मिले हैं।
ओझियानाभीलवाड़ाखारीबी.आर. मीणा और आलोक त्रिपाठीयहाँ सफेद रंग के चित्रित बैल और गाय की मृण्मूर्तियाँ मिली हैं।
नगरीचित्तौड़गढ़बेड़चडॉ. डी.आर. भंडारकरइसका प्राचीन नाम ‘मध्यमिका’ था। यहाँ शिवि जनपद के सिक्के और वैष्णव धर्म के प्राचीन साक्ष्य मिले हैं।

राजस्थान की प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ : In Details Notes

1. बैराठ सभ्यता

  • स्थान व जिला: कोटपूतली-बहरोड़ (पूर्व में जयपुर जिला), राजस्थान।
  • संबंधित नदी: बाणगंगा नदी घाटी।
  • खोज व उत्खननकर्ता: सर्वप्रथम 1936-37 में रायबहादुर दयाराम साहनी ने इसका उत्खनन किया। बाद में नीलरत्न बनर्जी और कैलाशनाथ दीक्षित ने यहाँ विस्तृत खुदाई की।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • यह एक प्रमुख मौर्यकालीन और बौद्ध कालीन केंद्र था।
    • यहाँ की ‘बीजक की पहाड़ी’, ‘भीम जी की डूंगरी’ और ‘महादेव जी की डूंगरी’ से प्राचीन अवशेष मिले हैं।
    • सन् 1837 में कैप्टन बर्ट ने यहाँ से सम्राट अशोक का भाब्रू शिलालेख खोजा था, जिससे अशोक के बौद्ध धर्म के प्रति झुकाव के प्रमाण मिलते हैं।

2. कालीबंगा सभ्यता

  • स्थान व जिला: हनुमानगढ़ जिला।
  • संबंधित नदी: घग्घर नदी (प्राचीन सरस्वती/द्विषद्वती नदी)।
  • खोज व उत्खननकर्ता: इसकी खोज 1952 में अमलानंद घोष ने की थी। इसका विस्तृत उत्खनन 1961 से 1969 के बीच बी.बी. लाल (ब्रजवासी लाल) और बी.के. थापर (बालकृष्ण थापर) द्वारा किया गया।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • ‘कालीबंगा’ का शाब्दिक अर्थ है – “काले रंग की चूड़ियाँ”।
    • यह एक सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) का तीसरी राजधानी के रूप में जाना जाने वाला स्थल है।
    • यहाँ से दुनिया के सबसे प्राचीन जुते हुए खेत के साक्ष्य और एक साथ दो फसलें (गेहूँ और जौ) उगाने के प्रमाण मिले हैं।
    • यहाँ भूकंप के प्राचीनतम साक्ष्य और लकड़ी की नालियों के अवशेष भी मिले हैं।

3. आहड़ सभ्यता

  • स्थान व जिला: उदयपुर जिला।
  • संबंधित नदी: बेड़च नदी (जिसे आयड़ नदी भी कहा जाता है)।
  • खोज व उत्खननकर्ता: इसकी खोज सबसे पहले 1953 में अक्षय कीर्ति व्यास ने की। इसके बाद आर.सी. अग्रवाल (रत्नचंद्र अग्रवाल) और पुणे विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एच.डी. सांकलिया ने यहाँ व्यापक उत्खनन कार्य किया।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • इस सभ्यता को ‘ताम्रवती नगरी’, ‘आघाटपुर’ और स्थानीय भाषा में ‘धूलकोट’ (मिट्टी का टीला) भी कहा जाता है।
    • यह एक ताम्रयुगीन ग्रामीण सभ्यता थी, जहाँ ताँबा गलाने की भट्टियाँ मिली हैं।
    • यहाँ से लाल और काले रंग के मृदभांड (मिट्टी के बर्तन) मिले हैं, जिन्हें ‘उल्टे बनाई शैली’ का माना जाता है।

4. गणेश्वर सभ्यता

  • स्थान व जिला: नीम का थाना (पूर्व में सीकर जिला)।
  • संबंधित नदी: काँतली नदी।
  • खोज व उत्खननकर्ता: इसका उत्खनन 1977 में रत्न चन्द्र (आर.सी.) अग्रवाल और विजय कुमार के निर्देशन में हुआ।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • गणेश्वर को भारत में “ताम्रयुगीन सांस्कृतिक सभ्यताओं की जननी” कहा जाता है।
    • यहाँ से अत्यधिक मात्रा में ताँबे के उपकरण (जैसे मछली पकड़ने का काँटा, तीर, कुल्हाड़ी) मिले हैं, जिनमें 99% शुद्ध ताँबा था।
    • यहाँ के मकानों में ईंटों के बजाय पत्थरों का प्रयोग किया जाता था और बाढ़ से बचने के लिए पत्थर के बांध बनाए गए थे।

5. बागोर सभ्यता

  • स्थान व जिला: भीलवाड़ा जिला।
  • संबंधित नदी: कोठारी नदी।
  • खोज व उत्खननकर्ता: महासत्य वाले टीले पर डॉ. वी.एन. मिश्रा (वीरेन्द्र नाथ मिश्रा) और एल.एस. लेश्निक द्वारा 1967 से 1970 के बीच उत्खनन किया गया।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • यह भारत का सबसे समृद्ध पाषाणकालीन (Mesolithic) स्थल माना जाता है।
    • यहाँ से भारत में सबसे प्राचीन पशुपालन के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
    • यहाँ से कृषि और शिकार दोनों के प्रमाण मिले हैं, साथ ही ताँबे के छेद वाली सुई भी प्राप्त हुई है।

6. बालाथल सभ्यता

  • स्थान व जिला: वल्लभनगर तहसील, उदयपुर जिला।
  • संबंधित नदी: बनास नदी घाटी।
  • खोज व उत्खननकर्ता: इसका उत्खनन 1993 में डॉ. वी.एन. मिश्रा के नेतृत्व में डेक्कन कॉलेज, पुणे द्वारा किया गया।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • यह आहड़ संस्कृति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण ताम्रपाषाणिक सभ्यता है।
    • यहाँ से 4000 वर्ष पुराना कुष्ठ रोग (Leprosy) का सबसे प्राचीन प्रमाण मिला है।
    • यहाँ एक बड़ा 11 कमरों का विशाल भवन/दुर्ग जैसा ढांचा और बुने हुए सूती कपड़े के अवशेष भी मिले हैं।

7. गिलुण्ड सभ्यता (Gilund Civilization)

  • स्थान व जिला: राजसमंद जिला।
  • संबंधित नदी: बनास नदी।
  • खोज व उत्खननकर्ता: इसका प्रारंभिक उत्खनन 1959-60 में बी.बी. लाल ने किया। बाद में 1998 से 2003 के बीच प्रोफेसर वसंत शिंदे और पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के डॉ. ग्रेगरी पोशेल ने यहाँ खुदाई की।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • यह भी बनास संस्कृति (आहड़ के समकालीन) का एक मुख्य हिस्सा है।
    • आहड़ में जहाँ पत्थरों का प्रयोग अधिक था, वहीं गिलुण्ड में पक्की ईंटों के प्रचुर उपयोग के साक्ष्य मिले हैं।
    • यहाँ से पांच प्रकार के मिट्टी के बर्तन और हाथीदांत की चूड़ियों के टुकड़े मिले हैं।

8. रंगमहल सभ्यता

  • स्थान व जिला: हनुमानगढ़ जिला।
  • संबंधित नदी: घग्घर नदी घाटी।
  • खोज व उत्खननकर्ता: इस स्थल का उत्खनन 1952-54 में डॉ. हन्ना रिड के नेतृत्व में आए एक स्वीडिश पुरातात्विक दल द्वारा किया गया था।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • यह कुषाणकालीन और गुप्तकालीन सभ्यता के अवशेष समेटे हुए है।
    • यहाँ से कनिष्क प्रथम और कनिष्क तृतीय के समय के सिक्के मिले हैं।
    • रंगमहल से गांधार शैली की मिट्टी की मूर्तियाँ (मृण्मूर्तियाँ) मिली हैं, जिनमें कृष्ण-गोपी और गुरु-शिष्य की आकृतियाँ प्रमुख हैं।

9. नोह सभ्यता

  • स्थान व जिला: भरतपुर जिला।
  • संबंधित नदी: रूपारेल नदी।
  • खोज व उत्खननकर्ता: इसका उत्खनन 1963-64 में आर.सी. अग्रवाल (रत्नचंद्र अग्रवाल) के निरीक्षण में करवाया गया था।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण लोहयुगीन सभ्यता स्थल है।
    • यहाँ से पांच सांस्कृतिक युगों (महाभारत काल से लेकर कुषाण काल तक) के अवशेष एक ही स्थान पर मिले हैं।
    • यहाँ से प्राप्त ‘जाख बाबा’ की यक्ष प्रतिमा (मौर्यकालीन) विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहाँ पक्षी चित्रित ईंटें भी मिली हैं।

10. जोधपुरा सभ्यता

  • स्थान व जिला: कोटपूतली-बहरोड़ (पूर्व में जयपुर जिला)।
  • संबंधित नदी: साबी नदी।
  • खोज व उत्खननकर्ता: इसका उत्खनन आर.सी. अग्रवाल और विजय कुमार द्वारा 1972-75 में किया गया।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • नाम ‘जोधपुरा’ होने के बावजूद यह स्थल जयपुर/कोटपूतली क्षेत्र में स्थित है (छात्र अक्सर इसमें भ्रमित होते हैं)।
    • यह एक लोहयुगीन स्थल है, जहाँ से लोहा गलाने की प्राचीन भट्टियाँ मिली हैं।
    • यहाँ के निवासी जोधपुरा-शैली के ‘जोधपुरा वीयर’ (काले रंग के चमकदार मृदभांड) का उपयोग करते थे।

11. सुनारी सभ्यता

  • स्थान व जिला: नीम का थाना (पूर्व में झुंझुनू जिला)।
  • संबंधित नदी: काँतली नदी।
  • खोज व उत्खननकर्ता: इसका उत्खनन 1980-81 में राजस्थान राज्य पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा किया गया था।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • यह एक और प्रसिद्ध लोहयुगीन सभ्यता स्थल है।
    • यहाँ से भारत की सबसे प्राचीन लोहा गलाने की धौंकनीयुक्त भट्टियाँ (Furnaces) प्राप्त हुई हैं।
    • यहाँ के लोग भोजन में चावल और मांस का प्रयोग करते थे तथा रथ खींचने के लिए घोड़ों का उपयोग करते थे।

12. ओझियाना सभ्यता

  • स्थान व जिला: आसींद तहसील, भीलवाड़ा जिला।
  • संबंधित नदी: खारी नदी।
  • खोज व उत्खननकर्ता: इसका उत्खनन वर्ष 2000 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारी बी.आर. मीणा और आलोक त्रिपाठी द्वारा किया गया।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • यह आहड़-बनास संस्कृति का ही एक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित अनूठा केंद्र है।
    • यहाँ से सफेद रंग से चित्रित ‘ओझियाना बुल’ (मिट्टी का बैल) और गाय की लघु मूर्तियाँ मिली हैं, जो धार्मिक महत्व को दर्शाती हैं।
    • यह सभ्यता तीन चरणों में विकसित हुई थी।

13. नगरी सभ्यता

  • स्थान व जिला: चित्तौड़गढ़ जिला।
  • संबंधित नदी: बेड़च नदी।
  • खोज व उत्खननकर्ता: प्राचीन काल में इसका नाम ‘माध्यमिका’ था। यहाँ सर्वप्रथम 1904 में डॉ. डी.आर. भंडारकर (देवदत्त रामकृष्ण भंडारकर) ने उत्खनन किया था।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • यह प्राचीन ‘शिवि जनपद’ की राजधानी थी।
    • यहाँ से शिवि जनपद के सिक्के और गुप्तकालीन कला के अवशेष मिले हैं।
    • यहाँ का ‘घोसुंडी शिलालेख’ राजस्थान में वैष्णव (भागवत) संप्रदाय से संबंधित सबसे प्राचीन लिखित साक्ष्य प्रस्तुत करता है।

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