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System Software, Operating System, Application Software

कंप्यूटर का हार्डवेयर (जैसे मॉनिटर, कीबोर्ड, सीपीयू) चाहे कितना भी महंगा हो, सॉफ्टवेयर के बिना वह सिर्फ एक प्लास्टिक और लोहे का बेजान डिब्बा है। अगर हार्डवेयर कंप्यूटर का ‘शरीर’ है, तो सॉफ्टवेयर उसकी ‘आत्मा’ है।


1. सॉफ्टवेयर की असली परिभाषा क्या है? (What is Software?)

तकनीकी भाषा में सॉफ्टवेयर को समझने के लिए आपको तीन शब्दों का क्रम याद रखना होगा, जो सीधे परीक्षाओं में पूछा जाता है:

📊 एग्जाम स्पेशल फ्लो-चार्ट (रट्टा मार बॉक्स)
Instructions (निर्देश) ➔ Program (प्रोग्राम) ➔ Software (सॉफ्टवेयर)

  • Instructions: कंप्यूटर को दिया जाने वाला एक सिंगल कमांड।
  • Program: कई सारे निर्देशों का समूह (Set of Instructions) जो किसी खास काम को करने के लिए लिखा जाता है।
  • Software: कई सारे प्रोग्राम्स का समूह (Set of Programs) जो कंप्यूटर के पूरे सिस्टम को चलाता है।

2. सॉफ्टवेयर का मुख्य वर्गीकरण (Types of Software)

सॉफ्टवेयर को उनके काम और जिम्मेदारी के आधार पर मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जाता है:

                         [ SOFTWARE ]
                              │
         ┌────────────────────┼────────────────────┐
         ▼                    ▼                    ▼
 [ SYSTEM SOFTWARE ]  [ APPLICATION SOFTWARE ]  [ UTILITY SOFTWARE ]
(कंप्यूटर को चलाने वाले) (यूजर का काम करने वाले) (सिस्टम को मेंटेन करने वाले)

3. सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software) — ‘कंप्यूटर का केयरटेकर’

  • सरल भाषा में समझें: यह वह सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर के बैकग्राउंड में काम करता है और कंप्यूटर के हार्डवेयर को संभालता है। यह यूजर के लिए नहीं, बल्कि खुद कंप्यूटर के लिए काम करता है। अगर यह कंप्यूटर में न हो, तो कंप्यूटर चालू ही नहीं होगा।
  • इसके अंतर्गत मुख्य रूप से चार चीजें आती हैं:
    1. Operating System (OS)
    2. Language Translators (भाषा अनुवादक)
    3. Device Drivers (डिवाइस ड्राइवर)
    4. Linker and Loader (लिंकर और लोडर)

4. ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System – OS) — ‘कंप्यूटर का मैनेजर’

यह सिस्टम सॉफ्टवेयर का सबसे मुख्य हिस्सा है। इसके बिना कंप्यूटर बेजान है।

  • देसी उदाहरण: मान लीजिए आप एक बहुत बड़े होटल में जाते हैं। वहाँ का जो ‘मैनेजर’ होता है, उसका काम होता है कि कौन सा कमरा किसे देना है, वेटर क्या काम करेगा, शेफ खाना कब बनाएगा और कस्टमर को कोई दिक़्क़त न हो। बस, वही मैनेजर कंप्यूटर के अंदर Operating System होता है।
  • टेक्निकल परिभाषा: OS यूजर (इंसान) और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच एक इंटरफेस (Interface / माध्यम) का काम करता है।

💡 स्मार्ट एग्जाम टिप (परीक्षा का फेवरेट पॉइंट)
ऑपरेटिंग सिस्टम के मुख्य काम (Functions) क्या हैं?

  1. Processor Management: किस सॉफ्टवेयर को कितना CPU टाइम मिलेगा.
  2. Memory Management: RAM और Storage का हिसाब-किताब रखना.
  3. File Management: फाइलों को फोल्डर में व्यवस्थित करना.
  4. Device Management: कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर के सिग्नल्स को संभालना.

ऑपरेटिंग सिस्टम के तकनीकी प्रकार (Types of OS):

  • A. Single-User OS: इसमें एक समय पर सिर्फ एक ही व्यक्ति काम कर सकता है। जैसे— MS-DOS
  • B. Multi-User OS: इसमें एक साथ कई यूजर अलग-अलग टर्मिनल्स से एक ही कंप्यूटर (सर्वर) पर काम कर सकते हैं। जैसे— Unix, Linux
  • C. Multi-Tasking OS: इसमें एक समय पर यूजर एक से ज्यादा काम कर सकता है (जैसे गाना सुनते हुए टाइपिंग करना)। जैसे— Windows, macOS
  • D. RTOS (Real-Time Operating System – सबसे इम्पॉर्टेंट): यह बहुत ही एडवांस OS होता है, जहाँ समय की पाबंदी (Deadline) बहुत सख्त होती है। अगर काम एक मिलीसेकंड भी लेट हुआ, तो बड़ा एक्सीडेंट हो सकता है।
    • उपयोग: मिसाइल कंट्रोल सिस्टम, सैटेलाइट लॉन्चिंग, और कारों के एयरबैग सिस्टम में।
    • उदाहरण: VxWorks, RT-Linux

🔍 डीप कॉन्सेप्ट बॉक्स (UI के प्रकार – रट लो)
ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर को दो तरह के स्क्रीन इंटरफेस देता है:

  1. CUI (Character User Interface): इसमें कोई फोटो या माउस काम नहीं करता। हर काम के लिए कीबोर्ड से कमांड टाइप करनी पड़ती है (ब्लैक स्क्रीन)। उदाहरण: MS-DOS
  2. GUI (Graphical User Interface): आज का आधुनिक स्क्रीन, जहाँ बटन, फोटो, आइकॉन होते हैं और माउस से क्लिक करके काम होता है। उदाहरण: Windows, Android

5. लैंग्वेज ट्रांसलेटर (Language Translators) — ‘कंप्यूटर के दुभाषिए’

इंसान अपनी भाषा (जैसे English, C, C++, Java) में कोड लिखता है, जिसे High-Level Language कहते हैं। लेकिन कंप्यूटर सिर्फ करंट की भाषा यानी Machine Language (0 और 1) समझता है। इसलिए बीच में एक ट्रांसलेटर की जरूरत होती है।

यह तीन प्रकार के होते हैं:

  • 1. Assembler (असेम्बलर): यह पुराने जमाने की Assembly Language (जिसमें ADD, SUB जैसे निमोनिक्स कोड यूज़ होते थे) को मशीन लैंग्वेज (0, 1) में बदलता है।
  • 2. Compiler (कंपाइलर – एग्जाम का फेवरेट): यह पूरे के पूरे हाई-लेवल प्रोग्राम को एक साथ (In one go) पढ़ता है और उसे मशीन लैंग्वेज में बदल देता है। यह बहुत तेज़ होता है और गलतियों (Errors) की लिस्ट अंत में एक साथ दिखाता है।
  • 3. Interpreter (इंटरप्रेटर): यह कंपाइलर का भाई है, लेकिन यह काम धीरे करता है। यह प्रोग्राम को एक साथ नहीं, बल्कि एक-एक लाइन करके (Line by Line) मशीन लैंग्वेज में बदलता है। अगर दूसरी लाइन में कोई गलती है, तो यह वहीं रुक जाएगा जब तक आप उसे ठीक नहीं कर देते।

6. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software) — ‘यूजर का मददगार’

  • सरल भाषा में समझें: यह सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के लिए जरूरी नहीं होता, यह हमारे (यूजर के) निजी काम को पूरा करने के लिए बनाया जाता है। अगर आप इसे कंप्यूटर से डिलीट भी कर दें, तो भी कंप्यूटर आराम से चलता रहेगा।
  • देसी उदाहरण: जैसे आपके मोबाइल में ‘WhatsApp’ या ‘Instagram’ है। इनके बिना आपका फोन बंद नहीं होगा, लेकिन आपको चैटिंग करनी है इसलिए आपने इन्हें अलग से इंस्टॉल किया है।

इसके मुख्य उदाहरण (Examples):

  • MS Office Suite: MS Word (टाइपिंग के लिए), MS Excel (कैलकुलेशन के लिए), PowerPoint (प्रेजेंटेशन के लिए).
  • Web Browsers: Google Chrome, Mozilla Firefox, Microsoft Edge (इंटरनेट चलाने के लिए).
  • Graphics Software: Adobe Photoshop, CorelDraw (फोटो एडिटिंग के लिए).

7. यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software) — ‘कंप्यूटर का डॉक्टर’

इसे कई किताबों में सिस्टम सॉफ्टवेयर के अंदर ही गिना जाता है। इसका मुख्य काम कंप्यूटर की सुरक्षा, मेंटेनेंस और उसकी परफॉर्मेंस (स्पीड) को बढ़ाना होता है। इसे ‘सर्विस प्रोग्राम’ भी कहते हैं।

  • देसी उदाहरण: जैसे हम अपनी बाइक या कार की समय-समय पर सर्विस करवाते हैं, वैसे ही कंप्यूटर को अंदर से साफ और सुरक्षित रखने के लिए यूटिलिटी सॉफ्टवेयर काम आते हैं।

क्विक हैक बॉक्स (यूटिलिटी के लाइव उदाहरण)

  • Antivirus: कंप्यूटर को वायरस और हैकर्स से बचाने के लिए (जैसे Windows Defender, QuickHeal, Kaspersky)।
  • Disk Defragmenter: यह हार्ड डिस्क के अंदर बिखरी हुई फाइलों को एक जगह समेट कर अरेंज करता है, जिससे कंप्यूटर की स्पीड बढ़ जाती है।
  • File Compression Tools: बड़ी फाइलों का साइज छोटा (Zipped) करने के लिए (जैसे WinRAR, WinZip)।

8. सॉफ्टवेयर के मालिकाना हक के आधार पर प्रकार (Most Advanced Section)

इंटरनेट और परीक्षाओं के नए पैटर्न में यहाँ से बहुत गहरे सवाल पूछे जा रहे हैं:

  • A. Proprietary / Closed Source Software: ये वो सॉफ्टवेयर हैं जिनका मालिकाना हक किसी कंपनी के पास होता है। इनका सोर्स कोड (मूल कोडिंग) छुपा कर रखा जाता है और इन्हें इस्तेमाल करने के लिए पैसे (License Fee) देने पड़ते हैं। उदाहरण: MS Windows, MS Office, Photoshop
  • B. Open Source Software (ओपन सोर्स): ये वो सॉफ्टवेयर हैं जो इंटरनेट पर पूरी तरह फ्री मिलते हैं और इनका सोर्स कोड भी सबके लिए खुला रहता है। कोई भी प्रोग्रामर इनके कोड को बदलकर अपना नया सॉफ्टवेयर बना सकता है। उदाहरण: Linux, Android, VLC Media Player, WordPress
  • C. Shareware (शेयरवेयर): ये वो सॉफ्टवेयर हैं जो इंटरनेट पर कुछ समय के लिए फ्री (Trial Period – जैसे 30 दिन के लिए) मिलते हैं। ट्रायल खत्म होने के बाद इन्हें इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने पड़ते हैं।
  • D. Freeware (फ्रीवेयर): ये हमेशा के लिए पूरी तरह फ्री होते हैं, लेकिन इनका सोर्स कोड यूजर को नहीं मिलता (यानी आप इनमें बदलाव नहीं कर सकते)। उदाहरण: Adobe Reader, Google Chrome

⚠️ एग्जाम क्रैकर पॉइंट (Linker vs Loader का अंतर)

  • Linker (लिंकर): आपके प्रोग्राम की अलग-अलग फाइलों को आपस में जोड़कर एक सिंगल Executable File (.exe) बनाने का काम करता है।
  • Loader (लोडर): उस बनी हुई .exe फाइल को हार्ड डिस्क से उठाकर कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी यानी RAM (रैम) के अंदर लोड (भेजने) का काम करता है ताकि CPU उसे चला सके।

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