1. ख्याल लोक नाट्य
‘ख्याल’ का शाब्दिक अर्थ खेल या पौराणिक/ऐतिहासिक कथाओं को संगीत के माध्यम से मंच पर प्रदर्शित करना है। इसके मुख्य पात्र को ‘खेलाड़ी’ और सूत्रधार को ‘हल्कारा’ कहा जाता है।
कुचामनी ख्याल
- मुख्य क्षेत्र: कुचामन (डीडवाना-कुचामन जिला, पूर्व में नागौर)
- प्रवर्तक (जनक): लच्छीराम (इन्होंने ही प्रसिद्ध ख्याल ‘चाँद नीलगिरी’ और ‘राव रिड़मल’ लिखे थे)।
- प्रमुख कलाकार: उगमराज।
- विशेषताएं: इस ख्याल का रूप ओपेरा (Opera) जैसा होता है। इसमें संगीत और गायन की प्रधानता होती है। इसमें महिला पात्रों की भूमिका भी पुरुषों द्वारा ही निभाई जाती है। इसके प्रदर्शन में ढोलक, शहनाई और सारंगी का प्रयोग होता है।
शेखावाटी ख्याल (चिड़ावा ख्याल)
- मुख्य क्षेत्र: चिड़ावा (झुनझुनूं) और सीकर।
- प्रवर्तक (जनक): नानूराम (इन्होंने ही हीर-रांझा, हरिश्चंद्र और राजा भरथरी के ख्याल रचे थे)।
- स्वर्णकाल के मुख्य कलाकार: दुलिया राणा (इन्हीं के नाम पर इसे दुलिया राणा की शैली भी कहते हैं)।
- विशेषताएं: इसमें वाद्य यंत्रों में ‘हारमोनियम’ का विशेष प्रयोग होता है। इसकी भाषा मारवाड़ी और शेखावाटी का अनूठा मिश्रण होती है, जिसमें गीत और संवाद बहुत ही कलात्मक होते हैं।
तुरा-कलंगी ख्याल
- मुख्य क्षेत्र: चित्तौड़गढ़, घोसुंडी और निम्बाहेड़ा।
- प्रवर्तक (जनक): दो सूफी संत— शाह अली (तुरा के प्रतीक) और तुकनगीर (कलंगी के प्रतीक)।
- प्रतीक अर्थ: ‘तुरा’ को शिव का रूप और ‘कलंगी’ को पार्वती का रूप माना जाता है।
- विशेषताएं: यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा लोक नाट्य है जिसमें मंच की सजावट (पंडाल) की जाती है। इसमें दो पक्षों के बीच काव्यमयी दंगल (संवाद) होता है, जिसे ‘गम्मत’ कहते हैं। इसमें मुख्य वाद्य यंत्र ‘चंग’ होता है। इसके प्रमुख हिंदू कलाकार चेतराम, हामिद बेग और ओंकार सिंह रहे हैं।
जयपुरी ख्याल
- मुख्य क्षेत्र: जयपुर।
- विशेषताएं: यह राजस्थान का सबसे आधुनिक ख्याल है क्योंकि इसमें महिला पात्रों की भूमिका वास्तविक महिलाओं द्वारा ही निभाई जाती है (पुरुष नारी रूप नहीं धरते)। इसमें रूढ़िवादिता को छोड़कर नए सामाजिक विषयों (जैसे— जोगी-जोगण, कान-गूजरी, मियाँ-बीबी) पर नाटक किए जाते हैं।
2. रम्मत लोक नाट्य
- मुख्य क्षेत्र: बीकानेर और जैसलमेर।
- उत्पत्ति स्थान: रम्मत की शुरुआत जैसलमेर में हुई, लेकिन इसका सबसे बड़ा केंद्र बीकानेर (आचार्यों का चौक) है।
- समय: यह मुख्य रूप से होली के अवसर पर रात भर खेली जाती है।
रम्मत का ऐतिहासिक
- जैसलमेर के तेज कवि ने ‘रम्मत श्रीकृष्ण कंपनी’ की स्थापना की थी। उन्होंने 1943 ई. में ‘स्वतंत्र बावनी’ नामक रम्मत रचकर महात्मा गांधी को भेंट की थी। इस पर अंग्रेजों ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया था, तब तेज कवि ने थाने जाकर कहा था— “कमिश्नर खोल दरवाजा, हमें भी जेल जाना है, तुम्हारे बाप का साम्राज्य अब ढहने वाला है।”
- बीकानेर में रम्मत शुरू होने से पहले रामदेव जी के भजन गाए जाते हैं।
- मुख्य वाद्य यंत्र: नगाड़ा और ढोलक।
- प्रसिद्ध रम्मतें: ‘हेडाऊ मेरी री रम्मत’ (जवाहरलाल पुरोहित द्वारा रचित) और ‘अमर सिंह राठौड़ री रम्मत’।
3. गवरी लोक नाट्य
- मुख्य क्षेत्र: मेवाड़ का भील बहुल क्षेत्र (उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा)।
- जाति: यह केवल भील जनजाति के पुरुषों द्वारा किया जाता है।
- समय: यह भाद्रपद कृष्ण एकम से आश्विन शुक्ल एकादशी तक (लगभग 40 दिन) दिन के समय खेला जाने वाला नाटक है।
गवरी का ऐतिहासिक
- यह भारत का सबसे प्राचीन लोक नाट्य है, इसीलिए इसे ‘लोक नाट्यों का मेरुनाट्य’ कहा जाता है।
- कथा का आधार: यह भगवान शिव और भस्मासुर (राक्षस) की पौराणिक कथा पर आधारित है।
- मुख्य पात्र: शिव के रूप को ‘पुरिया’ और पार्वती के रूप को ‘राई’ कहा जाता है (इसीलिए इसे ‘राई नृत्य नाट्य’ भी कहते हैं)। ‘कुटकुटिया’ इस नाटक का विदूषक (Comedian) होता है जो हंसाने का काम करता है।
- इस 40 दिन के उत्सव के दौरान भील पुरुष शराब, मांस और हरी सब्जी का पूरी तरह त्याग करते हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं।
4. तमाशा लोक नाट्य
- मुख्य क्षेत्र: जयपुर।
- स्वर्णकाल (विकास): जयपुर के महाराजा सवाई प्रतापसिंह (हवामहल के निर्माता) के काल में।
- मूल स्थान: यह मूल रूप से महाराष्ट्र की कला है, जिसे जयपुर के भट्ट परिवार ने राजस्थानी रंग दिया।
- प्रसिद्ध कलाकार: बंशीधर भट्ट (इन्हें तमाशा का जनक माना जाता है) और गोपीकृष्ण भट्ट।
- विशेषताएं: यह खुले मंच पर किया जाता है, जिसे जयपुर में ‘अखाड़ा’ कहा जाता है। इसमें संगीत, नृत्य और संवादों का लाजवाब प्रदर्शन होता है। प्रसिद्ध तमाशा नाटकों में ‘हीर-रांझा’ और ‘गोपीचंद’ प्रमुख हैं।
5. चारबेत लोक नाट्य
- मुख्य क्षेत्र: टोंक (नवाबों का शहर)।
- विकास: टोंक के नवाब फैजुल्ला खाँ के समय।
- प्रवर्तक: अब्दुल करीम खाँ और खलीफा निहंग।
- विशेषताएं: यह पठानी मूल का लोक नाट्य है, जो पश्तो भाषा में गाया जाता है। इसमें गायक घुटनों के बल बैठकर ‘डफ’ वाद्य यंत्र बजाते हुए बहुत ऊँचे स्वर में कव्वाली की तरह चार पंक्तियों (चारबेत) में अपनी बात कहता है। यह वीर रस से भरपूर होता है।
6. नौटंकी
- मुख्य क्षेत्र: भरतपुर, डीग, धौलपुर और करौली (पूर्वी राजस्थान)।
- प्रवर्तक: डीग के भूरीलाल।
- प्रसिद्ध कलाकार: नथाराम शर्मा (हाथरस शैली)।
- विशेषताएं: इसका नाम ‘नौटंकी’ इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें 9 प्रकार के वाद्य यंत्रों (जैसे— नगाड़ा, ढोलक, शहनाई, सारंगी, डफ आदि) का एक साथ प्रयोग किया जाता है। इसमें रूप बसंत, सत्यवादी हरिश्चंद्र और लैला-मजनूं के खेल दिखाए जाते हैं।
7. स्वांग / बहरूपिया कला
- मुख्य क्षेत्र: भीलवाड़ा (शाहपुरा क्षेत्र)।
- विशेषताएं: किसी पौराणिक या ऐतिहासिक पात्र (जैसे— शिव, नारद, डाकू, बंदर) का हुबहू वेश धारण करके जनता का मनोरंजन करना स्वांग कहलाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय कलाकार: भीलवाड़ा के जानकीलाल भांड, जिन्हें पूरी दुनिया में ‘मंकी मैन’ के नाम से जाना जाता है। इन्होंने इस राजस्थानी कला को विदेशों में प्रसिद्ध किया। शाहपुरा का ‘नाहरों का स्वांग’ (सिंहों का नाटक) जो शाहजहाँ के समय शुरू हुआ था, आज भी विश्वप्रसिद्ध है।
YJ Notes Special: एग्जाम क्रैकर क्विक फैक्ट्स
- लोक नाट्यों का मेरुनाट्य किसे कहते हैं?: गवरी लोक नाट्य को।
- ‘स्वतंत्र बावनी’ रम्मत किसने लिखी थी?: तेज कवि (जैसलमेर) ने, और महात्मा गांधी को गिफ्ट की थी।
- ‘मंकी मैन’ के नाम से कौन प्रसिद्ध है?: जानकीलाल भांड (भीलवाड़ा)।
- चारबेत लोक नाट्य कहाँ का प्रसिद्ध है?: टोंक जिले का (मुख्य वाद्य: डफ)।
- वह ख्याल जिसमें महिला पात्र खुद महिलाएं निभाती हैं?: जयपुरी ख्याल।
- कुचामनी ख्याल के जनक कौन हैं?: लच्छीराम।
