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राजस्थान की जलवायु एवं ऋतुएं

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राजस्थान की जलवायु मुख्य रूप से उपोष्ण कटिबंधीय प्रकार की है। अरावली पर्वतमाला की विशिष्ट स्थिति, समुद्र तट से दूरी (कच्छ की खाड़ी से लगभग 225 किमी और खंभात की खाड़ी से 400 किमी) और थार के मरुस्थल की उपस्थिति के कारण यहाँ की जलवायु में अत्यधिक विषमताएं पाई जाती हैं।


राजस्थान की जलवायु को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक एवं शब्दावली

  • अरावली की स्थिति : अरावली पर्वतमाला दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर फैली हुई है। यह स्थिति अरब सागर से आने वाले दक्षिण-पश्चिमी मानसून के समानांतर है, जिससे मानसून बिना वर्षा किए सीधा उत्तर की ओर निकल जाता है।
  • तापमान की विलोमता: मरुस्थल में रेत की प्रधानता के कारण यहाँ दिन में तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है और रात में विकिरण के कारण रेत जल्दी ठंडी हो जाती है, जिससे दैनिक तापांतर सर्वाधिक रहता है (विशेषकर जैसलमेर में)।
  • चक्रवात / बबूल्या : ग्रीष्म ऋतु में मरुस्थल में अत्यधिक गर्मी के कारण निम्न वायुदाब का केंद्र बनता है, जिससे स्थानीय स्तर पर धूलभरी हवाओं का बवंडर उठता है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘बबूल्या’ कहते हैं।
  • समवर्षा रेखाएं:
    • 50 सेमी समवर्षा रेखा: यह रेखा राजस्थान को दो समान भागों (शुष्क और आर्द्र) में विभाजित करती है। यह अरावली के समानांतर गुजरती है।
    • 25 सेमी समवर्षा रेखा: यह थार के मरुस्थल को दो भागों (शुष्क मरुस्थल और अर्द्ध-शुष्क मरुस्थल) में बांटती है।

जलवायु का वैज्ञानिक वर्गीकरण

A. व्लादिमीर कोपेन का वर्गीकरण — वनस्पतियों के आधार पर

कोपेन ने वनस्पति, तापमान और वर्षा को आधार मानकर राजस्थान को 4 मुख्य जलवायु प्रदेशों में विभाजित किया है:

                            ┌─────────────────── कोपेन का जलवायु वर्गीकरण ───────────────────┐
                            │                                                                 │
         ┌──────────────────┼───────────────────┬───────────────────┐                         │
     BWhw प्रदेश         BShw प्रदेश          Cwg प्रदेश          Aw प्रदेश                     │
         │                  │                   │                   │                         │
    • शुष्क मरुस्थलीय   • अर्द्ध-शुष्क या     • उप-आर्द्र / मानसूनी• अति-आर्द्र / उष्ण-      │
      जलवायु।             स्टेपी जलवायु।       जलवायु।             कटिबंधीय जलवायु।          │
    • क्षेत्र: जैसलमेर, • क्षेत्र: बाड़मेर,   • क्षेत्र: अरावली   • क्षेत्र: डूंगरपुर,        │
      बाड़मेर का उत्तर,   जालौर, जोधपुर,      के पूर्व के मैदान,  बांसवाड़ा, झालावाड़       │
      बीकानेर, फलोदी।    नागौर, शेखावाटी।    जयपुर, टोंक, अलवर।   और माउंट आबू।             │
  1. BWhw (उष्ण मरुस्थलीय जलवायु): यहाँ वर्षा अत्यंत कम और वाष्पीकरण सर्वाधिक होता है। यहाँ मरुद्भिद (कांटेदार) वनस्पति पाई जाती है।
  2. BShw (अर्द्ध-शुष्क या स्टेपी जलवायु): अरावली के पश्चिम का अर्द्ध-शुष्क मैदान। यहाँ कंटीली झाड़ियां और घास पाई जाती है।
  3. Cwg (उपाद्र / शुष्क शीत मानसूनी जलवायु): अरावली का पूर्वी मैदानी भाग। यह राजस्थान का सबसे बड़ा जलवायु प्रदेश है। यहाँ धोकड़ा वन पाए जाते हैं।
  4. Aw (उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु): दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान। यहाँ सागवान के वन और सवाना तुल्य घास पाई जाती है।

B. थॉर्नथ्वेट का वर्गीकरण — वाष्पीकरण के आधार पर

इन्होंने वर्षण प्रभावकारिता, तापीय दक्षता और वाष्पीकरण को आधार माना। यह वर्गीकरण कोपेन से अधिक व्यावहारिक माना जाता है:

  • EA’d (उष्ण शुष्क जलवायु): पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र (जैसलमेर, बाड़मेर, पश्चिमी जोधपुर, बीकानेर)।
  • DB’w (अर्द्ध-शुष्क / मिश्रित जलवायु): उत्तरी और उत्तर-पूर्वी राजस्थान (श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, बीकानेर का पूर्वी भाग)।
  • DA’w (उष्ण आर्द्र / अर्द्ध-शुष्क जलवायु): मध्य, पूर्वी और विशाल राजस्थान का भाग। यह थॉर्नथ्वेट के अनुसार सबसे बड़ा जलवायु क्षेत्र है।
  • CA’w (उपाद्र-आर्द्र जलवायु): दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, झालावाड़, बारां)।

C. ट्रिवार्था का वर्गीकरण

ट्रिवार्था ने कोपेन के वर्गीकरण को सरल किया और मुख्य रूप से वर्षा की मात्रा को आधार माना:

  • BWh: शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश (जैसलमेर, बीकानेर)।
  • BSh: अर्द्ध-शुष्क प्रदेश (जोधपुर, नागौर, जालौर, शेखावाटी)।
  • CAw: उप-आर्द्र/आर्द्र प्रदेश (पूर्वी मैदानी भाग)।
  • Aw: अति-आर्द्र प्रदेश (दक्षिणी राजस्थान व हाड़ौती पठार)।

राजस्थान की ऋतुएं

राजस्थान में स्पष्ट रूप से तीन प्रमुख ऋतुएं पाई जाती हैं:

1. ग्रीष्म ऋतु — मार्च से जून

  • तापमान: मरुस्थल में मई और जून के महीने में तापमान 45°C से 50°C तक पहुँच जाता है।
  • लू : ग्रीष्म ऋतु में मरुस्थलीय भागों में चलने वाली अत्यंत गर्म, शुष्क और दमनकारी हवाओं को ‘लू’ कहा जाता है।
  • आंधियां : जून के महीने में धूलभरी आंधियां चलती हैं। राजस्थान में सर्वाधिक आंधियां श्रीगंगानगर जिले में (औसत 27 दिन) और न्यूनतम आंधियां झालावाड़ जिले में (औसत 3 दिन) चलती हैं।
  • सबसे गर्म स्थान/जिला: राजस्थान का सबसे गर्म जिला चूरू है (चट्टानी सतह के कारण) और सबसे गर्म स्थान फलोदी व जोधपुर के कुछ हिस्से हैं। सबसे ठंडा और सुहावना स्थान ऊँचाई के कारण माउंट आबू रहता है।

2. वर्षा ऋतु — जुलाई से सितंबर

राजस्थान में मानसून मुख्य रूप से दो शाखाओं से आता है:

  • A. अरब सागर का मानसून : यह मानसून राजस्थान में सबसे पहले (दक्षिणी भाग से) प्रवेश करता है, परंतु अरावली पर्वतमाला इसके समानांतर होने के कारण इसके द्वारा राजस्थान में बहुत कम वर्षा होती है।
  • B. बंगाल की खाड़ी का मानसून : यह मानसून अरावली से टकराकर राजस्थान के पूर्वी, दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी भागों में सर्वाधिक वर्षा करता है। राजस्थान में आने वाली इन मानसूनी हवाओं को स्थानीय भाषा में ‘पुरवाई’ या ‘पुरवइया’ कहा जाता है।
  • वर्षा के आंकड़े :
    • सर्वाधिक वर्षा वाला जिला: झालावाड़ (औसत 100 सेमी), इसे राजस्थान का सबसे आर्द्र जिला कहा जाता है।
    • न्यूनतम वर्षा वाला जिला: जैसलमेर (औसत 10 से 15 सेमी)
    • सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान: माउंट आबू (औसत 150 सेमी), ऊँचाई के कारण यहाँ सर्वाधिक वर्षा होती है।
    • समग्र वर्षा: राजस्थान की औसत वार्षिक वर्षा 57.51 सेमी है।

3. शीत ऋतु — अक्टूबर से फरवरी

शीत ऋतु को पुनः दो उप-भागों में पढ़ा जाता है:

  • मानसून का प्रत्यावर्तन काल : इसे ‘लौटता हुआ मानसून’ भी कहते हैं। इस समय आकाश साफ होता है और उमस बढ़ती है, जिसे ‘कार्तिक की गर्मी’ कहा जाता है।
  • कड़ाके की ठंड : इस दौरान जनवरी सबसे ठंडा महीना होता है।

मावट / मावठ

  • क्या होती है? शीत ऋतु (दिसंबर-जनवरी) में राजस्थान के उत्तरी और पश्चिमी भागों में होने वाली हल्की वर्षा को स्थानीय भाषा में ‘मावट’ कहा जाता है।
  • उत्पत्ति : इसकी उत्पत्ति भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठने वाले ‘पश्चिमी विक्षोभों’ और जेट स्ट्रीम के कारण होती है।
  • गोल्डन ड्रॉप्स : यह वर्षा शीतकालीन रबी की फसल, विशेषकर गेहूं, जौ, चना और सरसों के लिए अमृत के समान होती है, इसलिए मावट की बूंदों को ‘गोल्डन ड्रॉप्स’ या ‘सोनम बूंदें’ कहा जाता है

विगत परीक्षाओं में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न (Previous Years Questions – PYQs)

Q1. व्लादिमीर कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार, राजस्थान का ‘Cwg’ जलवायु प्रदेश किस भौगोलिक क्षेत्र को दर्शाता है? (RAS Pre)

  • उत्तर: पूर्वी मैदानी प्रदेश और अरावली के पूर्वी भागों को (यह कोपेन के अनुसार सबसे बड़ा क्षेत्र है)

Q2. शीत ऋतु में राजस्थान में होने वाली ‘मावट’ (Mawat) वर्षा की उत्पत्ति किस सागर से होने वाले विक्षोभों से होती है? (RPSC 2nd Grade)

  • उत्तर: भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभों से

Q3. बंगाल की खाड़ी के मानसून से आने वाली आर्द्र हवाओं को राजस्थान में स्थानीय भाषा में किस नाम से पुकारा जाता है? (RSSB CET)

  • उत्तर: पुरवाई या पुरवइया (Purvaiya)

Q4. राजस्थान के किस जिले में ग्रीष्म ऋतु में सर्वाधिक दिनों तक धूलभरी आंधियां (औसत 27 दिन) चलती हैं? (REET)

  • उत्तर: श्रीगंगानगर जिले में (जबकि न्यूनतम झालावाड़ में चलती हैं)

Q5. थॉर्नथ्वेट के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार, राजस्थान का कौन सा जलवायु प्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा है? (LDC Exam)

  • उत्तर: DA’w (उष्ण आर्द्र / अर्द्ध-शुष्क जलवायु प्रदेश)
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