YJ Notes
YJ Notes Notes • Free Books
🏠 Home Rajasthan राजस्थान की प्रमुख नदी घाटी एवं सिंचाई परियोजनाएँ

राजस्थान की प्रमुख नदी घाटी एवं सिंचाई परियोजनाएँ

🔖 Login to Save 🏰 Rajasthan

राजस्थान में जल संसाधनों की अत्यधिक कमी है, जिसके कारण राज्य की कृषि योग्य भूमि का लगभग 2/3 भाग (लगभग 66%) पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर करता है। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य में विभिन्न बहुउद्देश्यीय, वृहद्, मध्यम और पेयजल परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं।

1. राजस्थान में सिंचाई के प्रमुख साधन एवं प्रबंधन (Sources of Irrigation)

  • कुएँ एवं नलकूप (Tubewells & Wells): यह राजस्थान में सिंचाई का सबसे बड़ा साधन है, जिससे कुल सिंचाई का लगभग 66% भाग कवर होता है। इससे सर्वाधिक सिंचाई जयपुर और अलवर जिलों में होती है।
  • नहरें (Canals): सिंचाई का दूसरा सबसे बड़ा साधन है, जिससे लगभग 33% भाग पर सिंचाई होती है। नहरों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई श्रीगंगानगर जिले में की जाती है।
  • तालाब (Tanks/Ponds): तालाबों द्वारा कुल सिंचाई का मात्र 0.6% भाग ही सींचा जाता है। तालाबों से सर्वाधिक सिंचाई भीलवाड़ा और उदयपुर जिलों में होती है।

विशेष प्रबंधन संस्थान

  • सिंचाई प्रबंधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (IMTI): इसकी स्थापना वर्ष 1984 में कोटा में की गई थी, जो राज्य में जल प्रबंधन और आधुनिक सिंचाई तकनीकों के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है।

2. राजस्थान की प्रमुख बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ (Multipurpose Projects)

चंबल नदी घाटी परियोजना

  • साझेदारी: यह राजस्थान और मध्य प्रदेश की 50:50% की संयुक्त परियोजना है।
  • शुरुआत: इसका कार्य 1952-1954 के दौरान प्रारंभ हुआ था।
  • विशेष पोस्टमार्टम: इस परियोजना के तहत तीन चरणों में चंबल नदी पर 4 विशाल बांध बनाए गए हैं:
    1. गांधी सागर बांध (MP) – प्रथम चरण।
    2. राणा प्रताप सागर बांध (चित्तौड़गढ़) – द्वितीय चरण, यह राजस्थान का भराव क्षमता में सबसे बड़ा बांध है।
    3. जवाहर सागर बांध (कोटा) – तृतीय चरण।
    4. कोटा बैराज (कोटा) – प्रथम चरण, इससे केवल सिंचाई के लिए नहरें निकाली गई हैं, बिजली नहीं बनती।

भाखड़ा नांगल परियोजना

  • साझेदारी: यह पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की संयुक्त परियोजना है। इसमें राजस्थान का हिस्सा 15.2% है।
  • विशेष पोस्टमार्टम: यह भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजना है जो सतलुज नदी पर स्थित है। इस पर बना ‘भाखड़ा बांध’ भारत का सबसे ऊँचा कंक्रीट गुरुत्वीय बांध है। पंडित नेहरू ने इसे देखकर ‘आधुनिक भारत के नवीन मंदिर’ की संज्ञा दी थी। इस परियोजना से राजस्थान का हनुमानगढ़ जिला सर्वाधिक लाभान्वित होता है।

व्यास परियोजना

  • नदियाँ: यह रावी और व्यास नदी के अतिरिक्त जल का उपयोग करने के लिए बनाई गई है।
  • साझेदारी: यह पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की संयुक्त परियोजना है।
  • विशेष पोस्टमार्टम: इस परियोजना के तहत दो मुख्य बांध बनाए गए हैं— पोंग बांध (व्यास नदी, हिमाचल प्रदेश) और पंडोह बांध। शीतकाल में जब इंदिरा गांधी नहर में पानी की कमी होती है, तो पोंग बांध से ही जल की आपूर्ति की जाती है।

माही बजाज सागर परियोजना

  • साझेदारी: यह राजस्थान (45%) और गुजरात (55%) की संयुक्त परियोजना है।
  • विशेष विवरण: यह बांसवाड़ा के बोरखेड़ा गाँव में माही नदी पर स्थित है। इस परियोजना के तहत मुख्य बिंदु निम्न हैं:
    • माही बजाज सागर बांध: यह राजस्थान का सबसे लंबा बांध (3109 मीटर) है।
    • कागदी पिकअप बांध: यह मुख्य बांध के नीचे बांसवाड़ा में ही स्थित है, जिससे सिंचाई की नहरें निकाली गई हैं।
    • कडाणा बांध: यह बांध इसी परियोजना का हिस्सा है जो गुजरात के महीसागर जिले में बना हुआ है।
    • विशेष शर्त: इस परियोजना से उत्पादित होने वाली 100% बिजली केवल राजस्थान (विशेषकर आदिवासी क्षेत्र बांसवाड़ा, डूंगरपुर) को मिलती है।

लखवार बांध परियोजना

  • नदी: यमुना नदी (उत्तराखंड के देहरादून जिले में)
  • साझेदारी: यह 6 राज्यों की संयुक्त बहु-उद्देश्यीय परियोजना है, जिसमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं।
  • विशेष विवरण: इस बांध के बनने से ऊपरी यमुना बेसिन के राज्यों को पानी मिलेगा। इस परियोजना के जल वितरण समझौते के तहत राजस्थान को भी अपने हिस्से का पानी प्राप्त होगा।

रेणुकाजी बांध परियोजना

  • नदी: गिरि नदी (सिरमौर जिला, हिमाचल प्रदेश — जो यमुना की सहायक नदी है)
  • साझेदारी: यह भी यमुना बेसिन के 6 राज्यों (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली) का एक संयुक्त प्रयास है।
  • विशेष विवरण: इसके तहत बनने वाले जलाशय से दिल्ली और राजस्थान सहित पड़ोसी राज्यों को गंभीर गर्मी के महीनों में पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

3. राजस्थान की वृहद् सिंचाई परियोजनाएँ (Major Irrigation Canals)

इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP)

  • उपनम: इसे प्रेस की मरुगंगा और जीवन रेखा कहा जाता है। इसका पुराना नाम ‘राजस्थान नहर’ था, जिसे 2 नवंबर 1984 को बदलकर ‘इंदिरा गांधी नहर’ किया गया।
  • मुख्यालय: इसका मुख्यालय जयपुर में स्थित है और इसके योजनाकार इंजीनियर कंवर सेन थे।
  • जल स्रोत: यह पंजाब में सतलुज और व्यास नदी के संगम पर बने ‘हरिके बैराज’ से निकाली गई है।
  • लाभान्वित क्षेत्र: यह हनुमानगढ़ के मसीतावाली हेड से राजस्थान में प्रवेश करती है और इसका अंतिम बिंदु बाड़मेर का गडरा रोड है।

गंग नहर

  • ऐतिहासिक महत्व: यह भारत की प्रथम नहर परियोजना है, जिसका निर्माण बीकानेर के महाराजा गंगासिंह (जिन्हें आधुनिक भारत का भागीरथ कहा जाता है) ने 1927 में करवाया था।
  • जल स्रोत: यह सतलुज नदी का पानी लेकर आती है और पंजाब से निकलकर राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले को सींचती है, जिससे यह जिला अन्न का कटोरा बन गया।

नर्मदा नहर परियोजना

  • जल स्रोत: यह गुजरात के सरदार सरोवर बांध (नर्मदा नदी) से निकाली गई है।
  • साझेदारी: यह चार राज्यों— राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की संयुक्त परियोजना है।
  • विशेषता (मोस्ट इम्पोर्टेन्ट): यह राजस्थान की एकमात्र ऐसी परियोजना है जिसमें फव्वारा सिंचाई पद्धति (Sprinkler Irrigation) को पूरी तरह से अनिवार्य किया गया है। इसके तहत राजस्थान में तीन मुख्य लिफ्ट नहरें बनाई गई हैं:
    1. भादरिया लिफ्ट नहर
    2. पनेरिया लिफ्ट नहर
    3. सांचौर लिफ्ट नहर
  • इससे सर्वाधिक लाभान्वित जिले सांचौर, जालोर और बाड़मेर हैं।

सिद्धमुख नहर परियोजना (राजीव गांधी नोहर परियोजना)

  • जल स्रोत: यह रावी और व्यास नदियों के अतिरिक्त जल का उपयोग करने के लिए यूरोपीय आर्थिक समुदाय के सहयोग से शुरू की गई थी।
  • लाभान्वित क्षेत्र: इससे मुख्य रूप से हनुमानगढ़ (नोहर, भादरा तहसील) और चुरू (तारानगर, राजगढ़ तहसील) जिलों को सिंचाई का पानी मिलता है।

भरतपुर नहर

  • जल स्रोत: यह पश्चिमी यमुना नहर से निकाली गई है।
  • साझेदारी: यह राजस्थान और उत्तर प्रदेश की संयुक्त नहर प्रणाली है, जिससे राजस्थान का केवल भरतपुर जिला लाभान्वित होता है।

गुड़गाँव नहर (अब यमुना लिंक नहर)

  • जल स्रोत: यह दिल्ली के पास ओखला नामक स्थान पर यमुना नदी से निकाली गई है।
  • साझेदारी: यह राजस्थान और हरियाणा की संयुक्त परियोजना है। इससे राजस्थान के डीग और भरतपुर जिलों में सिंचाई होती है।

भीखाभाई सागवाड़ा माही नहर

  • जल स्रोत: यह माही नदी पर साइफन बनाकर निकाली गई है।
  • लाभान्वित जिला: इससे मुख्य रूप से डूंगरपुर जिले के आदिवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सिंचाई की सुविधा मिलती है।

4. महत्वपूर्ण मध्यम एवं पेयजल परियोजनाएँ (Medium & Drinking Water Projects)

बीसलपुर परियोजना

  • स्थान: टोंक जिले के टोडारायसिंह कस्बे के पास बनास नदी पर स्थित है।
  • विशेषता: यह राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल (Drinking Water) परियोजना है। इसके माध्यम से जयपुर, अजमेर, टोंक और दौसा जिलों को शुद्ध पीने का पानी सप्लाई किया जाता है।

ईसरदा परियोजना

  • नदी: बनास नदी
  • स्थान: टोंक और सवाई माधोपुर
  • विस्तृत विवरण: यह पूर्वी राजस्थान की एक अत्यंत महत्वपूर्ण पेयजल और सिंचाई परियोजना है। इसका मुख्य उद्देश्य बनास नदी के अतिरिक्त मानसून जल को रोककर टोंक, सवाई माधोपुर और जयपुर के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की किल्लत को हमेशा के लिए दूर करना है।

जाखम परियोजना

  • स्थान: प्रतापगढ़ जिले के अनूपपुरा गाँव में जाखम नदी पर स्थित है।
  • विशेषता: इस परियोजना पर बना जाखम बांध 81 मीटर की ऊँचाई के साथ राजस्थान का सबसे ऊँचा बांध है। इससे प्रतापगढ़, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ के पहाड़ी क्षेत्रों में सिंचाई होती है।

मानसी वाकल परियोजना

  • नदी: मानसी और वाकल नदियाँ
  • स्थान: उदयपुर (गोरिल्ला गाँव के पास)
  • साझेदारी: इसमें राजस्थान सरकार की 70% और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की 30% हिस्सेदारी है।
  • विशेष विवरण (मोस्ट इम्पोर्टेन्ट): इसके तहत उदयपुर शहर को पानी देने के लिए 4.6 किलोमीटर लंबी ‘मानसी-वाकल जल सुरंग’ बनाई गई है, जो राजस्थान की सबसे बड़ी जल सुरंग मानी जाती है।

पार्वती परियोजना (आँगाई बांध)

  • नदी: पार्वती नदी
  • स्थान: धौलपुर
  • विशेष विवरण: धौलपुर जिले की राजाखेड़ा और बाड़ी तहसीलों के लिए यह लाइफलाइन है। इसे स्थानीय भाषा में ‘आँगाई बांध’ भी कहा जाता है, जो जिले का सबसे बड़ा सिंचाई स्रोत है।

ओराई सिंचाई परियोजना

  • नदी: ओराई नदी
  • स्थान: चित्तौड़गढ़
  • विशेष विवरण: इसके माध्यम से चित्तौड़गढ़ और पड़ोसी भीलवाड़ा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है।

गंभीरी परियोजना

  • नदी: गंभीरी नदी
  • स्थान: चित्तौड़गढ़ (निम्बाहेड़ा के पास)
  • विशेष विवरण: यह बांध निम्बाहेड़ा क्षेत्र में कृषि विकास का मुख्य आधार है। मानसून के समय इस नदी का अतिरिक्त पानी इस बांध में सुरक्षित किया जाता है।

इन्द्रा लिफ्ट सिंचाई परियोजना

  • नदी: चंबल नदी
  • स्थान: करौली (और सवाई माधोपुर का कुछ भाग)
  • विशेष विवरण: यह चंबल नदी पर बनी एक बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना है, जिसके माध्यम से ऊँचे पहाड़ी और डांग क्षेत्रों में पानी को लिफ्ट (पंप) करके करौली जिले के खेतों तक पहुँचाया जाता है।

बाघेरी का नाका बांध

  • नदी: बनास नदी
  • स्थान: राजसमंद (नाथद्वारा के पास)
  • विशेष विवरण: यह राजसमंद जिले की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है, जिससे राजसमंद शहर के साथ-साथ नाथद्वारा और आसपास के दर्जनों गाँवों को शुद्ध मीठा पानी मिलता है।

हटियादेह सिंचाई परियोजना

  • नदी: कूनू या कुल नदी (चंबल की सहायक)
  • स्थान: बारां
  • विशेष विवरण: हाड़ौती क्षेत्र के बारां जिले के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में खेती को बढ़ावा देने के लिए यह एक महत्वपूर्ण मध्यम सिंचाई योजना है।

चूलीदेह परियोजना

  • नदी: भद्रावती नदी
  • स्थान: करौली
  • विशेष विवरण: स्थानीय जल स्तर को सुधारने और करौली के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि सिंचाई के संकट को दूर करने के लिए इस बांध का निर्माण किया गया है।

5. पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP)

  • क्या है यह प्रोजेक्ट ?: दक्षिण राजस्थान की नदियों (जैसे चंबल, कुन्नू, पार्वती, कालीसिंध) में मानसून के समय जो अतिरिक्त पानी (Surplus Water) बहकर बेकार चला जाता है, उस पानी को रोककर पानी की कमी वाले पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के जिलों में पहुँचाना ही इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।
  • कितने जिलों को लाभ मिलेगा ?: यह राजस्थान के 13 जिलों की जीवन रेखा है
    • जिलों के नाम : झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, भरतपुर, अलवर, दौसा, जयपुर, टोंक और अजमेर।
  • परियोजना का लक्ष्य: इस महा-परियोजना के जरिए वर्ष 2051 तक इन 13 जिलों के इंसानों और पशुधन के लिए पीने का पानी (Drinking Water) और लगभग 2.8 लाख हेक्टेयर भूमि के लिए सिंचाई का पानी सुनिश्चित किया जाएगा।
  • नवनेरा बांध (नौनेरा बैराज): यह कोटा जिले की दीगोद तहसील के आबरा/नौनेरा गाँव में कालीसिंध नदी पर स्थित है। यह ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ERCP) के तहत बनने वाला सबसे पहला और मुख्य बांध (बैराज) है। मानसून के दौरान कालीसिंध नदी में आने वाले भारी अधिशेष जल को यहीं पर रोका जाएगा।
  • नवीनतम करंट अपडेट: इस प्रोजेक्ट की भारी लागत के कारण इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार और मध्य प्रदेश सरकार के बीच ‘संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल-ERCP’ (Modified PKC-ERCP) लिंक प्रोजेक्ट का ऐतिहासिक समझौता (MoU) साइन हो चुका है, जिससे अब इसका काम बहुत तेजी से चल रहा है।

इसके तहत बनने वाले मुख्य बांध/बैराज (याद रखने योग्य बिंदु)

ईआरसीपी (ERCP) के तहत नदियों के पानी को आपस में जोड़ने के लिए 6 मुख्य बैराज (बांध) और एक बड़ा बांध बनाने का प्रस्ताव है:

  1. नवनेरा (नौनेरा) बैराज – कोटा (कालीसिंध नदी पर).
  2. रामगढ़ बैराज – बारां.
  3. हनोतिया बैराज.
  4. महलपुर बैराज.
  5. मेज बैराज.
  6. राठौड़ बैराज.
  7. डूंगरी बांध – सवाई माधोपुर.

YJ Notes Special

  • राजस्थान का सबसे ऊँचा बांध: जाखम बांध (81 मीटर, प्रतापगढ़)।
  • राजस्थान का सबसे लंबा बांध: माही बजाज सागर बांध (3109 मीटर, बांसवाड़ा)।
  • भराव क्षमता में सबसे बड़ा बांध: राणा प्रताप सागर बांध (चित्तौड़गढ़)।
  • पूरी तरह फव्वारा पद्धति वाली नहर: नर्मदा नहर (लाभान्वित: सांचौर, जालोर, बाड़मेर)।
  • सबसे बड़ी पेयजल परियोजना: बीसलपुर परियोजना (टोंक)।
  • मरुगंगा किसे कहते हैं: इंदिरा गांधी नहर (IGNP) को।
  • राजस्थान की सबसे लंबी जल सुरंग: मानसी वाकल सुरंग (4.6 किमी, उदयपुर)।
  • ईआरसीपी (ERCP) का पहला बांध: नवनेरा / नौनेरा बांध (कोटा)।
  • ईआरसीपी से लाभान्वित जिले: कुल 13 जिले।
  • मानसी वाकल में सरकारी हिस्सेदारी: 70% राजस्थान सरकार और 30% हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड।
  • आँगाई बांध कहाँ है: धौलपुर (पार्वती नदी पर)।

← Previousराजस्थान के प्रसिद्ध ऐतिहासिक युद्ध Next →राजस्थान का एकीकरण
Related Notes