राजपूताना (राजस्थान) में जागृति लाने, स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा देने और सामंती अत्याचारों व ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ प्रजा को जागरूक करने में समाचार पत्रों ने रीढ़ की हड्डी का काम किया था. राजस्थान में पत्रकारिता का उद्भव 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ था. मुंशी समर्थदान चारण को राजस्थान में पत्रकारिता का जनक (शुरुआती दौर का) माना जाता है, जबकि आधुनिक राजनीतिक चेतना फैलाने का श्रेय विजय सिंह पथिक को जाता है.
प्रमुख समाचार पत्रों एवं संपादकों का विस्तृत जानकारी
1. मजहरूल सरूर — राजस्थान का पहला समाचार पत्र
- प्रकाशन वर्ष व स्थान: यह 1849 ई. में भरतपुर से प्रकाशित हुआ था.
- विशेष विवरण:
- यह राजस्थान की भूमि से प्रकाशित होने वाला सबसे पहला समाचार पत्र था.
- यह एक द्विभाषी (Bilingual) पत्र था, जो एक ही पृष्ठ पर आधे भाग में उर्दू और आधे भाग में हिंदी लिपि में छपता था. यह भरतपुर की राजकीय प्रेस से महाराजा बलवंत सिंह के समय निकाला गया था.
2. सज्जन कीर्ति सुधाकर — पहला हिंदी साप्ताहिक
- प्रकाशन वर्ष व स्थान: 1879 ई. में उदयपुर (मेवाड़) से.
- विशेष विवरण:
- मेवाड़ के महाराणा सज्जन सिंह के काल में स्थापित ‘सज्जन प्रिंटिंग प्रेस’ से इसका संपादन शुरू हुआ.
- यह राजस्थानी राजा द्वारा निकाला गया पहला साप्ताहिक हिंदी समाचार पत्र था. यद्यपि यह एक सरकारी गजट जैसा था, लेकिन इसमें देश-विदेश की खबरों और ज्ञानवर्धक लेखों को भी स्थान दिया जाता था.
3. राजस्थान केसरी — क्रांतिकारियों की बुलंद आवाज
- प्रकाशन वर्ष व स्थान: 1920 ई. में वर्धा (महाराष्ट्र) से (बाद में इसका कार्यालय अजमेर स्थानांतरित हुआ).
- संपादक व टीम: मुख्य संपादक विजय सिंह पथिक थे, और सह-संपादक रामनारायण चौधरी थे.
- विशेष विवरण:
- इस समाचार पत्र की स्थापना ‘राजस्थान सेवा संघ’ के तत्वावधान में की गई थी. इसके प्रकाशन के लिए आर्थिक (वित्तीय) सहायता गांधीजी के पांचवें पुत्र कहे जाने वाले सेठ जमनालाल बजाज ने प्रदान की थी.
- इसमें ब्रिटिश सरकार और रियासतों के जुल्मों के खिलाफ तीखे लेख छपते थे. पथिक जी की ओजस्वी कविताएँ इसी पत्र के माध्यम से किसानों तक पहुँचती थीं.
4. नवीन राजस्थान एवं तरुण राजस्थान
- नवीन राजस्थान (1922 ई.): अजमेर से विजय सिंह पथिक द्वारा शुरू किया गया. यह बिजौलिया किसान आंदोलन और बेेंगू किसान आंदोलन का सबसे बड़ा प्रवक्ता पत्र बना. इसके तीखे तेवरों के कारण ब्रिटिश सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया.
- तरुण राजस्थान (1923 ई.): जब ‘नवीन राजस्थान’ पर प्रतिबंध लगा, तो पथिक जी और राजस्थान सेवा संघ ने इसका नाम बदलकर ‘तरुण राजस्थान’ कर दिया और इसका प्रकाशन ब्यावर से शुरू किया.
- व्यास जी का प्रवेश: बाद में इसके संपादन का कार्य जय नारायण व्यास को सौंपा गया. जब 1923 में बूँदी के बरड़ क्षेत्र में किसानों पर अत्याचार हुए (डाबी कांड), तो उसका विस्तृत भंडाफोड़ इसी तरुण राजस्थान पत्र ने किया था.
5. जय नारायण व्यास के क्रांतिकारी पत्र: आगी बाण, अखंड भारत और पीप
शेर-ए-राजस्थान जय नारायण व्यास ने अलग-अलग भाषाओं में जनता को जगाने के लिए तीन महत्वपूर्ण पत्र निकाले
- आगी बाण / अग्नि बाण (1932 ई.): यह ब्यावर से प्रकाशित हुआ था. यह राजस्थानी भाषा (मायड़ भाषा) में छपने वाला पहला संपूर्ण राजनीतिक समाचार पत्र था. इसमें सामंतवाद और जागीरदारों की लाठ-बाग प्रथा पर कड़ा प्रहार किया जाता था.
- अखंड भारत (1936 ई.): इसका प्रकाशन व्यास जी ने बंबई (मुंबई) से हिंदी भाषा में किया था. मारवाड़ प्रजामंडल के नेताओं पर जब जोधपुर में पाबंदी लगी, तो व्यास जी ने मुंबई को केंद्र बनाकर पूरे भारत में राजपूताना के जुल्मों की आवाज को बुलंद किया.
- पीप (Peep): यह दिल्ली से प्रकाशित होने वाला अंग्रेजी भाषा का पाक्षिक (Fortnightly) पत्र था, जिसके माध्यम से व्यास जी दिल्ली के राष्ट्रीय नेताओं (जैसे नेहरू और गांधी) तक राजस्थान की रियासतों की जमीनी हकीकत अंग्रेजी में पहुंचाते थे.
6. त्याग भूमि — गांधीवादी विचारधारा का संवाहक
- प्रकाशन वर्ष व स्थान: 1927 ई. में अजमेर से.
- संपादक: गांधीवादी नेता हरिभाऊ उपाध्याय।
- विशेष विवरण:
- यह पत्र पूरी तरह से गांधीवादी दर्शन, अहिंसा, खादी के प्रचार और सामाजिक सुधारों (जैसे- अछूतोद्धार, महिला शिक्षा) को समर्पित था.
- इसके अधिकांश लेख महिलाओं और किसानों को स्वावलंबी बनाने के लिए लिखे जाते थे. राजपूताना में खादी आंदोलन को घर-घर पहुँचाने में त्याग भूमि का सबसे बड़ा योगदान माना जाता है.
7. रियासती — देशद्रोही षड्यंत्र का भंडाफोड़ करने वाला पत्र
- प्रकाशन वर्ष व स्थान: 1945 ई. में जोधपुर से.
- संपादक: प्रखर पत्रकार सुमनेश जोशी।
- विशेष विवरण :
- स्वतंत्रता के समय जोधपुर के महाराजा हनवंत सिंह मारवाड़ रियासत को भारत में मिलाने के बजाय पाकिस्तान में विलय करने का गुप्त षड्यंत्र रच रहे थे और वे मोहम्मद अली जिन्ना के संपर्क में थे.
- सुमनेश जोशी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने समाचार पत्र ‘रियासती’ में इस गुप्त योजना का भंडाफोड़ (Expose) कर दिया. इस खबर के छपते ही जनता में भारी आक्रोश फैल गया और सरदार वल्लभभाई पटेल के हस्तक्षेप के बाद जोधपुर का भारत में विलय सुरक्षित हुआ.
8. दैनिक नवज्योति
- प्रकाशन वर्ष व स्थान: 1936 ई. में अजमेर से एक साप्ताहिक के रूप में शुरू हुआ, जो बाद में दैनिक (Daily) बना.
- संपादक: कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी।
- विशेष विवरण: यह समाचार पत्र राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत था. कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी ने इसके माध्यम से अजमेर-मेरवाड़ा क्षेत्र के साथ-साथ पूरे राजपूताना के स्वतंत्रता सेनानियों के संदेशों को गाँव-गाँव तक पहुँचाया. यह आज भी राजस्थान के प्रमुख समाचार पत्रों में गिना जाता है.
9. लोकवाणी
- प्रकाशन वर्ष व स्थान: 1943 ई. में जयपुर से.
- संपादक: देवीशंकर तिवाड़ी (इनके साथ सिद्धराज ढड्ढा भी जुड़े थे).
- विशेष विवरण: इस समाचार पत्र की स्थापना देश के महान स्वतंत्रता सेनानी और उद्योगपति सेठ जमनालाल बजाज की स्मृति में की गई थी. यह जयपुर प्रजामंडल की मांगों और उत्तरदायी शासन (Responsible Government) की स्थापना का प्रमुख मुखपत्र बना.
10. राजपूताना हेराल्ड
- संपादक: हनुमान सिंह.
- वर्ष व स्थान: 1885 ई. में अजमेर से.
- महत्व: यह राजस्थान से प्रकाशित होने वाला पहला अंग्रेजी समाचार पत्र था, जिसने जागीरदारी कुप्रथाओं की आलोचना अंग्रेजी हुकूमत के सामने रखी.
11. प्रताप — राष्ट्रीय स्तर पर बिजौलिया को चमकाने वाला पत्र
- संपादक: गणेश शंकर विद्यार्थी।
- स्थान: कानपुर (उत्तर प्रदेश) — यद्यपि यह राजस्थान के बाहर का था, लेकिन राजस्थान इतिहास के लिए सबसे महत्वपूर्ण है.
- विशेष विवरण: विजय सिंह पथिक के कहने पर गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपने इस राष्ट्रीय पत्र ‘प्रताप’ में बिजौलिया किसान आंदोलन के अत्याचारों पर निरंतर श्रृंखला छापी, जिससे यह स्थानीय आंदोलन रातों-रात पूरे भारत का मुख्य राष्ट्रीय मुद्दा बन गया.
12. जयभूमि
- संपादक: गुलाबचंद काला.
- स्थान: जयपुर (1940 ई.).
- महत्व: यह जयपुर रियासत का एक प्रमुख प्रगतिशील पत्र था, जिसने प्रजामंडल आंदोलन और प्रजामंडल के अध्यक्षों के भाषणों को जनता तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई.
13. सर्वहित
- संपादक: पं. रामप्रताप शर्मा.
- स्थान: बूंदी (1890 ई.).
- महत्व: हाड़ौती अंचल का एक प्रारंभिक पत्र जिसने शिक्षा और समाज सुधार की अलख जगाई.
राजस्थान के समाचार पत्र एवं पत्रकारिता का इतिहास
| समाचार पत्र का नाम | संपादक / प्रकाशक | प्रकाशन वर्ष | प्रकाशन का स्थान | विशेष मुख्य बिंदु |
|---|---|---|---|---|
| मजहरूल सरूर | भरतपुर राजकीय प्रेस | 1849 ई. | भरतपुर | राजस्थान का प्रथम द्विभाषी (उर्दू-हिंदी) पत्र |
| राजपूत गज़ट | मौलवी मुराद अली ‘बीमार’ | 1885 ई. | अजमेर | सामंतवाद विरोधी मुस्लिम स्वर |
| देश हितैषी | मुंशी मुन्नालाल शर्मा | 1882 ई. | अजमेर | सामाजिक कुप्रथाओं का विरोध |
| सज्जन कीर्ति सुधाकर | महाराणा सज्जन सिंह | 1879 ई. | उदयपुर | राजस्थान का प्रथम साप्ताहिक हिंदी सरकारी पत्र |
| राजस्थान समाचार | मुंशी समर्थदान चारण | 1889 ई. | अजमेर | प्रथम हिंदी दैनिक समाचार पत्र |
| राजस्थान केसरी | विजय सिंह पथिक / रामनारायण चौधरी | 1920 ई. | वर्धा (महाराष्ट्र) | वित्तीय सहायता: जमुनालाल बजाज |
| नवीन राजस्थान | विजय सिंह पथिक | 1922 ई. | अजमेर | बिजौलिया व बेेंगू आंदोलन का मुख्य पत्र |
| तरुण राजस्थान | जय नारायण व्यास / विजय सिंह पथिक | 1923 ई. | अजमेर / ब्यावर | नवीन राजस्थान पर रोक के बाद बदला नाम |
| आगी बाण (अग्नि बाण) | जय नारायण व्यास | 1932 ई. | ब्यावर | राजस्थानी भाषा का पहला राजनीतिक पत्र |
| अखंड भारत | जय नारायण व्यास | 1936 ई. | बंबई (मुंबई) | मारवाड़ प्रजामंडल का राष्ट्रीय स्वर |
| पीप (Peep) | जय नारायण व्यास | – | दिल्ली | अंग्रेजी भाषा का पाक्षिक पत्र |
| त्याग भूमि | हरिभाऊ उपाध्याय | 1927 ई. | अजमेर | गांधीवादी विचारधारा और खादी का प्रचार |
| दैनिक नवज्योति | कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी | 1936 ई. | अजमेर | स्वतंत्रता आंदोलन का सिपाही |
| लोकवाणी | देवीशंकर तिवाड़ी | 1943 ई. | जयपुर | जमनालाल बजाज की स्मृति में शुरू |
| प्रजा सेवक | अचलेश्वर प्रसाद शर्मा ‘मामा’ | 1940 ई. | जोधपुर | मारवाड़ की जन-जागृति का अग्रदूत |
| रियासती | सुमनेश जोशी | 1945 ई. | जोधपुर | पाकिस्तान में विलय के षड्यंत्र का भंडाफोड़ |
| जय भूमि | गुलाबचंद काला | 1940 ई. | जयपुर | जयपुर प्रजामंडल की गतिविधियों का केंद्र |
| जय हिंद | कोटा के स्वतंत्रता सेनानी | 1947 ई. | कोटा | हाड़ौती अंचल की स्वतंत्रता की आवाज |
| मारवाड़ गज़ट | बाबू कन्हैयालाल | 1866 ई. | जोधपुर | मारवाड़ का प्रथम निजी समाचार पत्र |
| राजस्थान वीकली | ऋषिदत्त मेहता | 1923 ई. | ब्यावर | हाड़ौती और बूंदी की जन-जागृति |
विगत परीक्षाओं में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न (Previous Years Questions – PYQs)
Q1. राजस्थानी भाषा (मायड़ भाषा) का प्रथम राजनीतिक समाचार पत्र कौन सा था और इसके संपादक कौन थे? (RAS Pre)
- उत्तर: आगी बाण (अग्नि बाण), इसके संपादक जय नारायण व्यास थे (1932 ई., ब्यावर).
Q2. राजस्थान की भूमि से प्रकाशित होने वाला प्रथम द्विभाषी (उर्दू-हिंदी) समाचार पत्र कौन सा था? (RPSC 2nd Grade)
- उत्तर: मजहरूल सरूर (1849 ई., भरतपुर).
Q3. स्वतंत्रता के समय जोधपुर रियासत के पाकिस्तान में मिलने के गुप्त षड्यंत्र का पर्दाफाश किस समाचार पत्र ने किया था? (RSSB CET)
- उत्तर: सुमनेश जोशी द्वारा संपादित ‘रियासती’ समाचार पत्र ने.
Q4. विजय सिंह पथिक द्वारा वर्धा से प्रकाशित ‘राजस्थान केसरी’ समाचार पत्र के लिए वित्तीय (आर्थिक) सहायता किसने दी थी? (REET)
- उत्तर: सेठ जमनालाल बजाज ने (1920 ई.).
Q5. हरिभाऊ उपाध्याय द्वारा संपादित ‘त्याग भूमि’ (1927 ई.) समाचार पत्र का मुख्य उद्देश्य क्या था? (LDC Exam)
- उत्तर: गांधीवादी विचारधारा, खादी का प्रचार और सामाजिक कुप्रथाओं का सुधार.
