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राजस्थान की मिट्टियाँ एवं उनका वर्गीकरण

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मृदा भूपृष्ठ पर मिलने वाले असंगठित पदार्थों की वह ऊपरी परत है, जो चट्टानों के विखंडन और रासायनिक परिवर्तनों से बनती है. राजस्थान की मिट्टियाँ कृषि उत्पादन की रीढ़ हैं. राज्य में मिट्टियों का स्वरूप यहाँ के भौतिक प्रदेशों, भूगर्भीय संरचना और जलवायु से पूरी तरह प्रभावित है.


मृदा संपदा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सामान्य तथ्य

  • मृदा दिवस: प्रतिवर्ष 5 दिसंबर को ‘विश्व मृदा दिवस’ (World Soil Day) मनाया जाता है.
  • मृदा विज्ञान: मिट्टी के वैज्ञानिक अध्ययन को ‘पेडोलॉजी’ (Pedology) या मृदा विज्ञान कहा जाता है.
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना : इस राष्ट्रीय योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 19 फरवरी 2015 को सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर, राजस्थान) से की गई थी, जिसका नारा था — “स्वस्थ धरा, खेत हरा”.
  • राजस्थान में मिट्टी की मुख्य समस्याएँ:
    1. मृदा अपरदन (Soil Erosion): इसे ‘रेंगती हुई मृत्यु’ कहा जाता है. पश्चिम में वायु द्वारा और पूर्व (चम्बल बेसिन) में जल द्वारा सर्वाधिक अपरदन होता है.
    2. सेम की समस्या (Water Logging): हनुमानगढ़ (बड़ोपल गाँव) और श्रीगंगानगर में इंदिरा गांधी नहर के कारण भूमि का दलदली होना. इसका उपचार जिप्सम और यूकेलिप्टस (सफेदा) के पौधों से किया जाता है.

मिट्टियों का वैज्ञानिक / आधुनिक वर्गीकरण

अमेरिकी कृषि वैज्ञानिकों (USDA) के अनुसार राजस्थान की मिट्टियों को 5 प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है:

                            ┌─────────────────── मिट्टियों का वैज्ञानिक वर्गीकरण ───────────────────┐
                            │                                                                       │
         ┌──────────────────┼───────────────────┬───────────────────┐                               │
  1. एरिडोसोल्स       2. एंटीसोल्स        3. अल्फीसोल्स       4. इन्सेप्टीसोल्स                5. वर्टीसोल्स
       │                  │                   │                   │                                 │
  • शुष्क मिट्टी।     • रेतीली मिट्टी।     • जलोढ़ मिट्टी।     • आर्द्र/पर्वतीय मिट्टी।        • काली मिट्टी।
  • क्षेत्र: पश्चिम    • क्षेत्र: मरुस्थल   • क्षेत्र: पूर्वी    • क्षेत्र: अरावली ढलान          • क्षेत्र: हाड़ौती
    राजस्थान।           का व्यापक भाग।      मैदानी प्रदेश।       (अर्द्ध-शुष्क से आर्द्र)।       (दक्षिण-पूर्व).

1. एरिडोसोल्स — शुष्क मृदा

  • जलवायु: यह पूर्णतः शुष्क जलवायु प्रदेशों में पाई जाती है.
  • विस्तार: चूरू, सीकर, झुंझुनू, नागौर, जोधपुर, फलोदी और जैसलमेर का कुछ भाग.
  • विशेषता: इस मिट्टी में खनिज लवणों की मात्रा अधिक होती है, परंतु नमी और जैविक अंश की भारी कमी होती है.

2. एंटीसोल्स — पीली-भूरी रेतीली मृदा

  • विस्तार: यह पश्चिमी राजस्थान के थार मरुस्थल के सबसे बड़े भूभाग पर पाई जाने वाली मिट्टी है.
  • विशेषता: इसका रंग प्रायः हल्का भूरा या पीला होता है. इसके कण मोटे होते हैं, जिससे इसकी जल धारण क्षमता सबसे कम होती है, लेकिन वायु का संचार अच्छा होता है.

3. अल्फीसोल्स — जलोढ़ / दोमट मृदा

  • जलवायु: यह उपाद्र एवं आर्द्र जलवायु क्षेत्रों में मिलती है.
  • विस्तार: पूर्वी मैदानी प्रदेश — जयपुर, दौसा, अलवर, भरपुर, टोंक, सवाई माधोपुर, और भीलवाड़ा.
  • विशेषता: यह नदियों द्वारा बहाकर लाई गई मिट्टी है, जो कृषि उत्पादन के लिए सर्वाधिक उपजाऊ मानी जाती है. इसमें नाइट्रोजन और पोटाश की अच्छी मात्रा होती है.

4. इन्सेप्टीसोल्स — आर्द्र / पर्वतीय मृदा

  • विस्तार: अरावली पर्वतमाला के ढलानों वाले जिलों — सिरोही, पालि, राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, और भीलवाड़ा के कुछ हिस्सों में.
  • विशेषता: यह पूर्ण विकसित मिट्टी नहीं होती. चट्टानों के टूटने-फूटने के प्रारंभिक चरण में बनती है, इसलिए इसमें कंकड़-पत्थरों की प्रधानता होती है. यह मक्का की खेती के लिए उपयोगी है.

5. वर्टीसोल्स — काली / रेगुर मृदा

  • जलवायु: यह अत्यंत आर्द्र एवं अति-आर्द्र क्षेत्रों में पाई जाती है.
  • विस्तार: दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती अंचल) — कोटा, बूंदी, बारां, और झालावाड़.
  • विशेषता: इसमें क्ले (Clay/महीन कण) की मात्रा सर्वाधिक (40-50%) होती है. इसकी जल धारण क्षमता सबसे अधिक होती है. सूखने पर इस मिट्टी में गहरी दरारें पड़ जाती हैं, इसलिए इसे ‘स्वतः जुताई वाली मिट्टी’ भी कहते हैं. यह कपास, सोयाबीन और संतरे के लिए सर्वोत्तम है.

मिट्टियों का सामान्य / पारंपरिक वर्गीकरण (रंग एवं बनावट के आधार पर)

कृषि विभाग और भौतिक स्वरूप के आधार पर राजस्थान की मिट्टियों को सामान्यतः 8 उप-प्रकारों में पढ़ा जाता है:

A. रेतीली / बलुई मिट्टी

  • क्षेत्र: थार का मरुस्थल (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, फलोदी, जोधपुर).
  • फसलें: बाजरा, मोठ, ग्वार (कम पानी वाली फसलें). इसमें कैल्शियम की अधिकता और नाइट्रोजन की कमी होती है.

B. लाल-लोमी मिट्टी

  • क्षेत्र: दक्षिणी राजस्थान — डूंगरपुर, बांसवाड़ा, और उदयपुर का दक्षिणी भाग.
  • विशेषता: लोह अंश की अधिकता के कारण इसका रंग लाल होता है. यह बारीक कणों वाली मिट्टी है जिसकी जल धारण क्षमता अच्छी होती है.
  • प्रमुख फसल: यह मक्का और चावल की खेती के लिए रामबाण मानी जाती है

C. लाल-काली मिश्रित मिट्टी

  • क्षेत्र: प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, और बांसवाड़ा के सीमावर्ती क्षेत्र.
  • फसलें: मालवा के पठार के असर के कारण इसमें कपास और मक्का दोनों फसलें बेहतरीन तरीके से उगाई जाती हैं.

D. जलोढ़ / कछारी / दोमट मिट्टी

  • क्षेत्र: पूर्वी राजस्थान (चम्बल, बनास, बाणगंगा का बेसिन).
  • विशेषता: यह सबसे उपजाऊ मिट्टी है, जिसमें गेहूं, सरसों, जौ और गन्ने का बंपर उत्पादन होता है.

E. भूरी रेतीली मृदा

  • क्षेत्र: लूनी बेसिन का क्षेत्र (जालौर, सांचौर, पालि, बाड़मेर, नागौर का कुछ हिस्सा). इसमें फॉस्फेट की मात्रा अच्छी होती है.

F. लवणिया मृदा

  • क्षेत्र: बाड़मेर, जालौर (सांचौर का नेहड़ क्षेत्र) और श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के कुछ हिस्से.
  • विशेषता: सिंचाई की अधिकता या खारे पानी के जमाव के कारण मिट्टी में सोडियम क्लोराइड की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे भूमि बंजर हो जाती है. इसे ‘रेह’ या ‘ऊसर’ मिट्टी भी कहते हैं.
  • उपचार: अम्लीय भूमि के उपचार के लिए चूना पत्थर और क्षारीय/लवणीय भूमि के उपचार के लिए जिप्सम का प्रयोग किया जाता है.

G. धूसर मरुस्थलीय / सिरोजम मिट्टी

  • क्षेत्र: अरावली के पश्चिम के अर्द्ध-शुष्क जिले (अजमेर, पालि, नागौर, झुंझुनू). इसका रंग धूसर (Grey) होता है और नाइट्रोजन की कमी होती है.

विगत परीक्षाओं में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न (Previous Years Questions – PYQs)

Q1. अमेरिकी मृदा वर्गीकरण (USDA) के अनुसार, हाड़ौती पठार (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) में मुख्य रूप से किस प्रकार की मिट्टी पाई जाती है? (RAS Pre)

  • उत्तर: वर्टीसोल्स — जिसे काली रेगुर मिट्टी भी कहा जाता है.

Q2. राजस्थान के दक्षिणी जिलों (डूंगरपुर, बांसवाड़ा) में पाई जाने वाली ‘लाल-लोमी’ (Red Loam) मिट्टी किस मुख्य फसल के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है? (RPSC 2nd Grade)

  • उत्तर: मक्का (Maize) की खेती के लिए.

Q3. मिट्टी में क्षारीयता या लवणीयता की समस्या को दूर करने के लिए खेतों में किसका प्रयोग किया जाता है? (RSSB CET)

  • उत्तर: जिप्सम (Gypsum) का (जबकि अम्लीयता दूर करने के लिए रॉक फॉस्फेट या चूने का प्रयोग होता है).

Q4. थार के मरुस्थल के सबसे बड़े भूभाग पर वैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार कौन सी मिट्टी विस्तृत है, जिसकी जल धारण क्षमता न्यूनतम होती है? (REET)

  • उत्तर: एंटीसोल्स (Entisols)

Q5. 19 फरवरी 2015 को देश में ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना’ की शुरुआत राजस्थान के किस स्थान से की गई थी? (LDC Exam)

  • उत्तर: सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) से
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