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राज्य विधानमंडल

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राज्य विधानमंडल का स्वरूप

संविधान के अनुसार प्रत्येक राज्य का एक विधानमंडल होगा. यह दो प्रकार का हो सकता है:

  1. एकसदनात्मक (Unicameral): जहाँ केवल एक सदन — विधानसभा (Legislative Assembly) और राज्यपाल होते हैं (जैसे – राजस्थान).
  2. द्विसदनात्मक (Bicameral): जहाँ दो सदन — विधानसभा, विधान परिषद (Legislative Council) और राज्यपाल मिलकर विधानमंडल बनते हैं.

भारत में द्विसदनात्मक व्यवस्था वाले राज्य

वर्तमान में भारत के केवल 6 राज्यों में द्विसदनात्मक (Two Houses) विधानमंडल है:

  1. उत्तर प्रदेश (UP)
  2. बिहार (Bihar)
  3. महाराष्ट्र (Maharashtra)
  4. कर्नाटक (Karnataka)
  5. आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh)
  6. तेलंगाना (Telangana)
    (नोट: जम्मू-कश्मीर में पुनर्गठन के बाद अब विधान परिषद समाप्त कर दी गई है).

महत्वपूर्ण संवैधानिक अनुच्छेद

  • अनुच्छेद 168: राज्यों के विधानमंडलों का गठन (Constitution).
  • अनुच्छेद 169: राज्यों में विधान परिषदों का उत्सादन (उन्मूलन) या सृजन (Abolition or Creation).
  • अनुच्छेद 170: विधानसभाओं की संरचना (Composition of Legislative Assembly).
  • अनुच्छेद 171: विधान परिषदों की संरचना (Composition of Legislative Council).
  • अनुच्छेद 172: राज्य विधानमंडलों की अवधि (Duration).
  • अनुच्छेद 173: विधानमंडल की सदस्यता के लिए योग्यता (Qualifications).
  • अनुच्छेद 174: विधानमंडल के सत्र, सत्रावसान और विघटन (Sessions, Prorogation, and Dissolution).
  • अनुच्छेद 178: विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष (Speaker & Deputy Speaker).
  • अनुच्छेद 182: विधान परिषद के सभापति और उपसभापति (Chairman & Deputy Chairman).
  • अनुच्छेद 200: राज्यपाल द्वारा विधेयकों पर अनुमति देना या राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखना.
  • अनुच्छेद 202: राज्य का वार्षिक वित्तीय विवरण (Budget).
  • अनुच्छेद 213: राज्यपाल की अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की शक्ति.

दोनों सदनों का तुलनात्मक एवं विस्तृत विश्लेषण

विशेषताविधानसभा (Legislative Assembly)विधान परिषद (Legislative Council)
अन्य नामप्रथम सदन, निचला सदन, लोकप्रिय सदन, अस्थायी सदनद्वितीय सदन, उच्च सदन, बुद्धिजीवियों का सदन, स्थायी सदन
संवैधानिक अनुच्छेदअनुच्छेद 170अनुच्छेद 171
सदस्य संख्या (न्यूनतम/अधिकतम)न्यूनतम: 60, अधिकतम: 500
(अपवाद: सिक्किम-32, गोवा-40, मिजोरम-40)
न्यूनतम: 40, अधिकतम: संबधित विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का 1/3
कार्यकाल5 वर्ष (समय से पूर्व राज्यपाल द्वारा भंग किया जा सकता है)स्थायी सदन (कभी भंग नहीं होता, लेकिन प्रत्येक 2 वर्ष बाद 1/3 सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं. सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है).
चुनाव पद्धतिप्रत्यक्ष चुनाव (व्यस्क मताधिकार द्वारा जनता द्वारा सीधा चुनाव)अप्रत्यक्ष चुनाव (आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति)
न्यूनतम आयु सीमा25 वर्ष30 वर्ष

विधानसभा की संरचना एवं निर्वाचन

1. सीटों का निर्धारण

  • विधानसभा की सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर किया गया है.
  • 84वें संविधान संशोधन (2001) द्वारा इसे वर्ष 2026 तक के लिए यथावत (Freeze) कर दिया गया था.
  • आगामी समय में होने वाला परिसीमन (Delimitation) नए संसद भवन और जनगणना के बाद प्रभावी होगा, जिससे सीटें बढ़ेंगी.

2. आरक्षण

  • अनुच्छेद 332: राज्य की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए जनसंख्या के अनुपात में सीटों का आरक्षण.
  • 104वां संविधान संशोधन (2019): इसके तहत SC/ST का आरक्षण विधानसभाओं में अगले 10 वर्ष (25 जनवरी 2030) के लिए बढ़ा दिया गया है, जबकि आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) को मनोनीत करने का प्रावधान (अनुच्छेद 333) अब समाप्त कर दिया गया है.
  • 106वां संविधान संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम): राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% (1/3) सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है, जो आगामी परिसीमन के बाद लागू होगा.

विधान परिषद का सृजन और संरचना

1. विधान परिषद का निर्माण/उन्मूलन (अनुच्छेद 169)

यदि किसी राज्य में विधान परिषद बनानी है या उसे समाप्त करना है, तो उसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • चरण 1: संबंधित राज्य की विधानसभा अपने विशेष बहुमत (कुल सदस्य संख्या का बहुमत + उपस्थित और मत देने वालों का 2/3 बहुमत) से एक प्रस्ताव पारित करेगी.
  • चरण 2: इस प्रस्ताव के बाद संसद अपने साधारण बहुमत से कानून बनाकर विधान परिषद का सृजन या अंत कर सकती है.
  • विशेष तथ्य: इसे संविधान संशोधन (अनुच्छेद 368 के तहत) नहीं माना जाता है.

2. विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन मंडल (अनुच्छेद 171)

विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव 5 अलग-अलग श्रेणियों से होता है

  1. 1/3 सदस्य: स्थानीय निकायों (नगरपालिका, जिला बोर्ड आदि) द्वारा चुने जाते हैं.
  2. 1/3 सदस्य: विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं.
  3. 1/12 सदस्य: कम से कम 3 वर्ष पूर्व स्नातक (Graduates) कर चुके छात्रों द्वारा.
  4. 1/12 सदस्य: माध्यमिक या उससे उच्च शिक्षण संस्थाओं में कम से कम 3 वर्ष से पढ़ा रहे शिक्षकों द्वारा.
  5. 1/6 सदस्य: राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं. ये सदस्य साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन (Cooperative Movement) और समाज सेवा के क्षेत्र से होने चाहिए. (ध्यान रहे: राष्ट्रपति के नामांकन क्षेत्रों में ‘सहकारिता आंदोलन’ शामिल नहीं है, यह केवल राज्यपाल वाले में है)

विधायी प्रक्रिया: साधारण बनाम धन विधेयक

A. साधारण विधेयक (Ordinary Bills)

  • इसे किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है.
  • संसद के मामले में दोनों सदनों में गतिरोध होने पर ‘संयुक्त बैठक’ (Joint Sitting) का प्रावधान है, लेकिन राज्य विधानमंडल में संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है.
  • यदि विधानसभा किसी विधेयक को पारित कर विधान परिषद को भेजती है, तो विधान परिषद उसे पहली बार में 3 महीने तक रोक सकती है. यदि विधानसभा दोबारा पारित करके भेजती है, तो विधान परिषद उसे केवल 1 महीने और रोक सकती है.
  • अर्थात, कोई विधान परिषद किसी साधारण विधेयक को अधिकतम 4 महीने (3+1) तक ही रोक सकती है, इसके बाद वह स्वतः पारित माना जाता है.

B. धन विधेयक (Money Bills)

  • यह केवल विधानसभा में ही पेश किया जा सकता है, वह भी राज्यपाल की पूर्व सिफारिश पर.
  • विधान परिषद धन विधेयक को अधिकतम 14 दिनों तक ही रोक सकती है. यदि वह 14 दिनों में कोई कार्रवाई नहीं करती, तो विधेयक पारित मान लिया जाता है.

राजस्थान विधानसभा (Rajasthan Legislative Assembly)

राजस्थान एकसदनात्मक (Unicameral) व्यवस्था वाला राज्य है. यहाँ केवल विधानसभा है, विधान परिषद नहीं है (यद्यपि राजस्थान विधानसभा ने 2012 में विधान परिषद गठन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा हुआ है, जो अभी लंबित है).

राजस्थान विधानसभा की ऐतिहासिक यात्रा

  • प्रथम विधानसभा (1952-57): कुल सीटें 160 थीं. प्रथम बैठक 29 मार्च 1952 को सवाई मानसिंह टाउन हॉल (जयपुर) में हुई थी.
  • सीटों का क्रमिक विकास:
    • पहली विधानसभा (1952) ➡️ 160 सीटें
    • दूसरी विधानसभा (1957) ➡️ 176 सीटें
    • चौथी विधानसभा (1967) ➡️ 184 सीटें
    • छठी विधानसभा (1977) ➡️ 200 सीटें (छठी विधानसभा में पहली बार सीटें बढ़कर 200 हुईं जो आज तक यथावत हैं).

वर्तमान सीट संरचना (200 सीटें)

  • अनुसूचित जाति (SC) हेतु आरक्षित सीटें: 34
  • ** अनुसूचित जनजाति (ST) हेतु आरक्षित सीटें:** 25
  • सामान्य व अन्य: 141

नया विधानसभा भवन

  • इसका उद्घाटन 29 नवंबर 2001 को तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन द्वारा किया गया था.
  • यह ज्योति नगर, जयपुर में स्थित है और इसका निर्माण जोधपुर और बंसी पहाड़पुर के गुलाबी व संगमरमर पत्थरों से हुआ है. इसके मुख्य गुंबद की ऊंचाई 104 फीट है.

राजस्थान विधानसभा के गौरव

  • प्रथम विधानसभा अध्यक्ष (Speaker): नरोत्तम लाल जोशी (झुंझुनू)
  • प्रथम उपाध्यक्ष (Deputy Speaker): लाल सिंह शक्तावत
  • प्रथम नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition): कुंवर जसवंत सिंह (बीकानेर)
  • प्रथम महिला विधायक: यशोदा देवी (बांसवाड़ा से, 1953 के उपचुनाव में)
  • प्रथम महिला विधानसभा अध्यक्ष: सुमित्रा सिंह (12वीं विधानसभा, 2003)
  • सर्वाधिक समय तक अध्यक्ष: रामनिवास मिर्धा (लगातार दो बार)
  • एक भी विधानसभा चुनाव न हारने वाले नेता: हरिदेव जोशी

विगत परीक्षाओं में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न (Previous Years Questions – PYQs)

Q1. राज्य विधानमंडल में ‘संयुक्त बैठक’ (Joint Sitting) का प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में है? (RAS Pre)

  • उत्तर: संविधान में राज्य विधानमंडल के लिए संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है (यह केवल संसद के लिए अनुच्छेद 108 में है).

Q2. विधान परिषद किसी साधारण विधेयक को अधिकतम कितनी अवधि तक रोक सकती है? (RPSC 2nd Grade)

  • उत्तर: अधिकतम 4 महीने (पहली बार में 3 महीने, और दूसरी बार में 1 महीना).

Q3. राजस्थान विधानसभा की सदस्य संख्या 160 से बढ़ाकर 200 किस विधानसभा के दौरान की गई थी? (RSSB CET)

  • उत्तर: छठी विधानसभा (1977) के दौरान.

Q4. विधान परिषद में राज्यपाल द्वारा कितने सदस्यों को मनोनीत (Nominate) किया जाता है? (REET)

  • उत्तर: कुल सदस्य संख्या का 1/6 भाग.

Q5. राजस्थान से प्रथम महिला विधायक कौन चुनी गई थीं और कब? (LDC Exam)

  • उत्तर: श्रीमती यशोदा देवी, 1953 के उपचुनाव में बांसवाड़ा सीट से (प्रजा समाजवादी पार्टी).

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